अजमेर में 2,250 सफाई कर्मियों की हड़ताल से सफाई व्यवस्था पर संकट, मानदेय बढ़ाने की मांग तेज

अजमेर नगर निगम के 2250 अस्थायी सफाई कर्मी मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा उठाव प्रभावित होने की आशंका है।

अजमेर नगर निगम के 2250 अस्थायी सफाई कर्मियों ने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों ने दैनिक वेतन 285 से बढ़ाकर 500 रुपए करने की मांग की है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

अजमेर: राजस्थान के अजमेर शहर में नगर निगम के अंतर्गत कार्यरत 2,250 अस्थायी सफाई कर्मियों ने एक बार फिर हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों की मुख्य मांग दैनिक मानदेय में वृद्धि है। उनका कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला 285 रुपये प्रतिदिन का भुगतान महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के मुकाबले बेहद कम है। इसलिए इसे बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया जाना चाहिए।

यह पिछले 15 दिनों के भीतर दूसरी और पिछले छह महीनों में तीसरी बड़ी हड़ताल है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो शहर के कई इलाकों में कचरा जमा होने और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

सफाई कर्मियों ने किया प्रदर्शन और रैली

हड़ताल के दौरान सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम के पुराने भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारी वहां एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने शहर में रैली निकालकर गांधी भवन तक मार्च किया।

कर्मचारियों का कहना है कि वे शहर के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका दावा है कि मौजूदा वेतन संरचना के तहत परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है।

यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।

बार-बार हो रही हड़तालों से बढ़ रही चिंता

अजमेर नगर निगम में हाल के महीनों में सफाई कर्मचारियों की असंतुष्टि लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे पहले फरवरी और मई में भी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी।

उन आंदोलनों के दौरान कर्मचारियों ने केवल मानदेय वृद्धि ही नहीं, बल्कि कर्मचारी भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और ठेका व्यवस्था से जुड़ी कई वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे भी उठाए थे।

कर्मचारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। इसी कारण उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

मानदेय वृद्धि क्यों बना बड़ा मुद्दा?

सफाई कर्मियों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में 285 रुपये प्रतिदिन की आय पर्याप्त नहीं है। बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की कीमतों, किराए और शिक्षा खर्चों ने निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

कर्मचारियों का तर्क है कि नगर निगम के लिए आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के बावजूद उन्हें न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा भी नहीं मिल रही। उनका मानना है कि 500 रुपये प्रतिदिन का मानदेय उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि देशभर में कई नगर निकायों में अनुबंध आधारित कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अजमेर का मामला भी उसी व्यापक चुनौती का हिस्सा माना जा रहा है।

निगम प्रशासन ने बनाई वैकल्पिक व्यवस्था

हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए नगर निगम प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक योजना लागू की है।

निगम ने अपने 1,413 स्थायी सफाई कर्मचारियों को विभिन्न वार्डों और मुख्य सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि आम नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, स्थायी कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के कारण पूरी व्यवस्था को लंबे समय तक संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

प्रतिदिन 300 टन कचरा उठाने की चुनौती

अजमेर नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे का प्रबंधन है। शहर से रोजाना लगभग 300 टन ठोस कचरा एकत्र किया जाता है।

नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में 11 सर्किल और 48 वार्ड आते हैं। इतने बड़े क्षेत्र में नियमित सफाई बनाए रखने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन आवश्यक हैं।

आंकड़ों के अनुसार, नगर निगम में कुल 2,991 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से लगभग 1,201 पद वर्तमान में खाली हैं। इससे पहले ही कर्मचारियों की कमी महसूस की जा रही थी और अब अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में बढ़ सकती हैं समस्याएं

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो शहर के प्रमुख बाजारों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

दरगाह बाजार, देहली गेट, नया बाजार और केसरगंज जैसे क्षेत्रों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यहां नियमित कचरा उठाव न होने पर गंदगी बढ़ सकती है, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याएं पैदा होने का खतरा रहेगा।

व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और कर्मचारियों दोनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है ताकि शहर की सामान्य व्यवस्था प्रभावित न हो।

श्रमिक अधिकार और नगर प्रशासन के बीच संतुलन की जरूरत

यह विवाद केवल वेतन वृद्धि का मुद्दा नहीं है, बल्कि शहरी प्रशासन और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को भी दर्शाता है। नगर निकायों को स्वच्छता सेवाएं सुचारु रूप से संचालित रखने के साथ-साथ कर्मचारियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संवाद, पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था और दीर्घकालिक नीति सुधार ऐसे विवादों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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