झारखंड के गोड्डा जिले में सीबीआई ने एसबीआई के एक ब्रांच मैनेजर को 77 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोपी पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के क्लेम और खाते से होल्ड हटाने के बदले घूस मांगने का आरोप है।
रांची: झारखंड के गोड्डा जिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक शाखा प्रबंधक को कथित रिश्वतखोरी के मामले में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बैंक अधिकारी ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की राशि जारी कराने और खाते पर लगी रोक हटाने के बदले लाभार्थी से 77 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के क्लेम के बदले मांगी रिश्वत
झारखंड के गोड्डा जिले में भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की डुमरिया शाखा के प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी के अनुसार आरोपी बैंक अधिकारी ने एक लाभार्थी से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मिलने वाली बीमा राशि जारी कराने के लिए रिश्वत की मांग की थी।
जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता की मां ने अपने जीवनकाल में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत बीमा पॉलिसी ले रखी थी। उनकी मृत्यु के बाद योजना के नियमों के अनुसार आश्रित बेटे को दो लाख रुपये की बीमा राशि मिलनी थी। आरोप है कि इस क्लेम को मंजूरी देने और भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए बैंक प्रबंधक ने रिश्वत की मांग की।
सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता ने जब बैंक से संपर्क किया तो उसे बताया गया कि क्लेम की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पैसे देने होंगे। इसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी से की।
खाते से होल्ड हटाने के नाम पर भी की अतिरिक्त मांग
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने केवल बीमा क्लेम की राशि जारी करने के लिए ही नहीं, बल्कि मृतक महिला के बैंक खाते पर लगी रोक हटाने के लिए भी अलग से रिश्वत मांगी थी।
मृतका के खाते में लगभग 35 हजार रुपये जमा थे, जिन पर तकनीकी कारणों से होल्ड लगा हुआ था। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने इस रोक को हटाने के बदले 17 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे। वहीं बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 60 हजार रुपये की मांग की गई थी।
इस तरह दोनों मामलों को मिलाकर कुल 77 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी सीबीआई को दी, जिसके बाद एजेंसी ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू की।
शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल
सीबीआई ने 31 मई 2026 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और आरोपों की जांच शुरू की। प्रारंभिक सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद एजेंसी ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।
1 जून को सीबीआई की टीम ने निगरानी के बीच कार्रवाई की। शिकायतकर्ता बैंक पहुंचा और आरोपी प्रबंधक को कथित तौर पर 77 हजार रुपये की राशि सौंपी। जैसे ही बैंक अधिकारी ने पैसे स्वीकार किए, पहले से मौजूद सीबीआई अधिकारियों ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
अदालत में पेश किया गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी शाखा प्रबंधक को न्यायालय में पेश किया। एजेंसी अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने पहले भी इस तरह की गतिविधियों में संलिप्तता दिखाई थी या नहीं।
इस कार्रवाई को सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सीबीआई ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी सरकारी या बैंकिंग प्रक्रिया में उनसे अवैध धन की मांग की जाती है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित जांच एजेंसियों को दें।
मामले की आगे की जांच जारी है और सीबीआई जल्द ही अदालत में विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सकती है।










