अजमेर पुलिस साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई में 215 गुम और चोरी मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी कीमत 50 लाख से अधिक है। तकनीकी ट्रैकिंग और CEIR पोर्टल की मदद से मोबाइल अलग-अलग राज्यों से रिकवर कर मालिकों को लौटाए गए।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले में पुलिस ने साइबर अपराध और मोबाइल चोरी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। अजमेर पुलिस की साइबर सेल और विभिन्न थाना इकाइयों की संयुक्त टीम ने मिलकर 215 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल फोन की कुल अनुमानित कीमत 50 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद मोबाइल मालिकों के चेहरों पर खुशी लौट आई, जिन्होंने अपने खोए हुए फोन वापस मिलने पर पुलिस का आभार व्यक्त किया।
यह अभियान न केवल तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल ट्रैकिंग और समन्वित पुलिसिंग के माध्यम से आधुनिक समय की चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
CEIR पोर्टल और तकनीकी ट्रैकिंग बनी सफलता की कुंजी
पुलिस के अनुसार इस पूरे अभियान में केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) पोर्टल, मोबाइल IMEI ट्रैकिंग, और डिजिटल निगरानी तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जैसे ही किसी मोबाइल की शिकायत दर्ज की गई, उसकी तकनीकी जानकारी सिस्टम में फीड कर दी गई।
इसके बाद साइबर सेल की टीम ने लगातार मॉनिटरिंग करते हुए उन मोबाइलों को ट्रैक किया जो अलग-अलग राज्यों में सक्रिय पाए गए थे। कई मामलों में यह भी सामने आया कि चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन राजस्थान के बाहर अन्य राज्यों में उपयोग किए जा रहे थे।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने न केवल लोकेशन ट्रेस की, बल्कि संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर रिकवरी ऑपरेशन को आगे बढ़ाया।
कई राज्यों तक फैला था मोबाइल नेटवर्क उपयोग का मामला
जांच में सामने आया कि बरामद किए गए कई मोबाइल फोन राजस्थान के बाहर विभिन्न राज्यों में सक्रिय थे। कुछ फोन सामान्य उपयोग में थे जबकि कुछ को बदलकर या सिम बदलकर उपयोग किया जा रहा था ताकि उनकी पहचान छिपाई जा सके।
हालांकि साइबर सेल की टीम ने लगातार डिजिटल ट्रैकिंग और फील्ड इनपुट के माध्यम से इन डिवाइसों की पहचान की और उन्हें बरामद करने में सफलता हासिल की। यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक अपराधियों के लिए बच निकलना कितना कठिन बना रही है।

पुलिस टीम का समन्वित अभियान और नेतृत्व
इस पूरे ऑपरेशन को जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अंजाम दिया गया। साइबर सेल के विशेषज्ञों के साथ-साथ जिले के विभिन्न थानों की टीमों ने मिलकर एक संगठित अभियान चलाया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ धैर्य और सतत निगरानी बेहद जरूरी होती है। टीम ने कई दिनों तक लगातार डेटा एनालिसिस, कॉल डिटेल ट्रैकिंग और IMEI मॉनिटरिंग के जरिए इन मोबाइलों को खोज निकाला।
मोबाइल लौटाने पर भावुक हुए लोग, पुलिस का जताया आभार
मोबाइल वापस मिलने के दौरान कई लोगों ने खुशी जाहिर की और पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दिया। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका खोया हुआ फोन वापस मिल पाएगा, लेकिन अजमेर पुलिस की इस कार्रवाई ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया।
मोबाइल वितरण कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्वयं पीड़ितों को उनके मोबाइल सौंपे। इस दौरान “थैंक यू अजमेर पुलिस” जैसे शब्दों से माहौल भावुक और सकारात्मक हो गया।
एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम को किया सम्मानित
अजमेर पुलिस अधीक्षक ने इस सफल अभियान में शामिल साइबर सेल और थाना स्तर के पुलिसकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पुलिस की तकनीकी क्षमता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में भी इस तरह के डिजिटल अपराधों और गुम मोबाइल मामलों में तेज कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम नागरिकों का विश्वास पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत हो सके।
आम जनता के लिए पुलिस की महत्वपूर्ण सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता बरतें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी रखने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा पुलिस ने निम्नलिखित सुझाव भी दिए हैं:
- मोबाइल में मजबूत पासवर्ड और बायोमेट्रिक लॉक का उपयोग करें
- “Find My Device” जैसी लोकेशन ट्रैकिंग सुविधा हमेशा ऑन रखें
- मोबाइल गुम या चोरी होने पर तुरंत सिम ब्लॉक करवाएं
- CEIR पोर्टल या नजदीकी थाने में तुरंत शिकायत दर्ज करें
मोबाइल का IMEI नंबर सुरक्षित रखें
इन सावधानियों से मोबाइल रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है और दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह मामला भारत में डिजिटल पुलिसिंग की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। CEIR जैसे प्लेटफॉर्म और साइबर सेल की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक के सही उपयोग से बड़े पैमाने पर अपराध नियंत्रण संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से न केवल चोरी और गुम मोबाइल की समस्या कम होगी, बल्कि साइबर अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।









