गुजरात में ईंधन बचत की बड़ी पहल: पायलट वाहनों की मांग में गिरावट, प्रशासनिक खर्च और ईंधन खपत में कमी

पीएम नरेंद्र मोदी की अपील का असर गुजरात सरकार ने पायलट वाहनों की संख्या में कटौती की, जिससे दो दिनों में 126 कॉल कम हुए और ईंधन व मानव संसाधन की बचत दर्ज की गई।

गुजरात सरकार ने ईंधन बचत अभियान के तहत पायलट वाहनों के उपयोग में कमी की है। दो दिनों में 126 कॉल कम होने से पेट्रोल-डीजल की बचत हुई और सरकारी कामकाज में तैनात कर्मचारियों को अन्य कार्यों में लगाया गया है।

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने ईंधन बचत और प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राज्य के गृह विभाग के अनुसार पिछले दो दिनों में पायलट वाहनों (Pilot Vehicles) के उपयोग में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। यह बदलाव प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस आह्वान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, कारपूलिंग अपनाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की थी।

राज्य सरकार का दावा है कि इन नई व्यवस्थाओं से न केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि सरकारी संसाधनों और मानव शक्ति का भी अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो रहा है।

दो दिनों में 126 पायलट वाहन कॉल में कमी

गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह विभाग से जुड़े मंत्री Harsh Sanghavi ने जानकारी दी कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सिर्फ दो दिनों में पायलट वाहन उपयोग से संबंधित 126 कॉल्स में कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि यह गिरावट इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब अनावश्यक मूवमेंट को कम करने पर गंभीरता से काम कर रहा है। उनके अनुसार यह बदलाव राज्य में ईंधन बचत अभियान के शुरुआती लेकिन प्रभावी परिणामों में से एक है।

अनुमानित 5000 किलोमीटर तक ईंधन की बचत

सरकारी आकलन के अनुसार पायलट वाहनों की संख्या में आई कमी से लगभग 5000 किलोमीटर तक की यात्रा कम हुई है, जिससे पेट्रोल और डीजल दोनों की बचत हुई है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि यदि प्रत्येक पायलट कॉल को औसतन 25 से 50 किलोमीटर की यात्रा मानें, तो कुल मिलाकर यह बचत काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का सीधा असर राज्य के ईंधन खर्च और वाहनों के उपयोग पर पड़ रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर ईंधन बचत संभव होगी।

पायलट वाहनों के स्टाफ का बेहतर उपयोग

सरकारी बयान में यह भी बताया गया कि पायलट वाहन व्यवस्था में आमतौर पर तीन कर्मचारियों की टीम तैनात होती है। अब कॉल्स में कमी आने के बाद इन कर्मचारियों को अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा सकता है।

इस कदम से न केवल मानव संसाधन का पुनर्वितरण होगा, बल्कि पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव कम होगा। सरकार का कहना है कि इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी और जरूरी स्थानों पर अधिक प्रभावी तैनाती संभव होगी।

प्रशासनिक यात्रा पर सख्ती और वर्चुअल मीटिंग पर जोर

गुजरात सरकार ने ईंधन बचत अभियान के तहत प्रशासनिक कार्यशैली में कई बदलाव किए हैं। अब राज्य के विभिन्न विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि जहां तक संभव हो, बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया जाए।

राजधानी Gandhinagar में अनावश्यक यात्रा को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। दूर-दराज के शहरों से आने वाले अधिकारियों को केवल जरूरी मामलों में ही यात्रा करने की अनुमति दी जा रही है।

इसके अलावा, Ahmedabad और गांधीनगर के बीच यात्रा करने वाले अधिकारियों के लिए कारपूलिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकारी वाहन उपयोग में व्यापक बदलाव

नई नीति के तहत मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले के आकार को भी कम किया जा रहा है। पहले जहां कई वाहनों का काफिला सामान्य माना जाता था, अब उसे सीमित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को भी प्रोत्साहित कर रही है ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके।

राज्य प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री की अपील का असर पूरे देश में

प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा दिए गए ईंधन बचत संदेश के बाद कई राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर सुधार देखने को मिल रहे हैं। केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर यह प्रयास किया जा रहा है कि सरकारी यात्रा और वाहन उपयोग को सीमित किया जाए।

कई राज्यों में मंत्रियों के काफिले घटाए गए हैं, जबकि कुछ जगहों पर बैठकों और कार्यक्रमों को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट किया जा रहा है।

पर्यावरण और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कदम लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं। ईंधन की बचत से विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

गुजरात सरकार का यह प्रयास प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसे अन्य राज्य भी अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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