Akriti Chaudhary NSA Case: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, नोएडा DM को अकेले जिम्मेदार ठहराने पर सवाल

Akriti Chaudhary NSA Case में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा DM को अकेले जिम्मेदार ठहराने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि NSA हिरासत की प्रक्रिया में कई स्तरों

स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि हिरासत का फैसला कई अधिकारियों की जांच और मंजूरी के बाद लिया गया था, तो गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम को इसके लिए अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

Akriti Chaudhary NSA Case: अकृति चौधरी NSA केस में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत की प्रक्रिया कई अधिकारियों और स्तरों से गुजरने के बाद आगे बढ़ी थी, तो केवल जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मेधा रूपम की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

मामला दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और छात्र कार्यकर्ता अकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सितंबर की शुरुआत में उनकी हिरासत को रद्द कर दिया था और अधिकारियों के वेतन से कुल 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि वसूलकर उन्हें देने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुखता से सामने आया कि NSA के तहत हिरासत का फैसला क्या केवल डीएम का व्यक्तिगत निर्णय था या इसके पीछे प्रशासनिक प्रक्रिया के कई स्तर शामिल थे। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि संबंधित प्रस्ताव पुलिस और प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों से होकर जिलाधिकारी तक पहुंचा था। 

सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अगर निर्णय लेने की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर आगे बढ़ी है, तो केवल डीएम को अलग करके मुआवजे की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं हो सकता। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी कहा कि डीएम तक पहुंचने से पहले रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों के कई स्तरों से होकर गुजरी थी। उनके मुताबिक, NSA की प्रक्रिया में आगे भी वैधानिक समीक्षा और पुष्टि के चरण शामिल होते हैं।

हाई कोर्ट ने क्यों रद्द की थी हिरासत?

अकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनके खिलाफ NSA के प्रावधान लागू किए गए थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को उनकी हिरासत को रद्द करते हुए कहा था कि हिरासत के आधार पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने अकृति को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया था, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत न हो। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने अधिकारियों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।

बाद में मेधा रूपम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जिलाधिकारी के सामने हिरासत से जुड़ा रिकॉर्ड एक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद आया था और केवल अंतिम आदेश जारी करने वाले अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

NSA में क्या होती है प्रक्रिया?

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निवारक हिरासत की प्रक्रिया में प्रशासन और पुलिस की अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं। इस मामले में अदालत के समक्ष यह बताया गया कि प्रस्ताव पुलिस स्तर से शुरू होकर वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से जिलाधिकारी तक पहुंचा था। इसके बाद हिरासत आदेश की वैधानिक समीक्षा के लिए सलाहकार बोर्ड और सरकार के स्तर पर भी प्रक्रिया होती है।

इसी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल उठा कि जिम्मेदारी तय करते समय निर्णय श्रृंखला में शामिल सभी स्तरों को ध्यान में रखा जाना चाहिए या नहीं।

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