SIR Controversy: ममता बनर्जी ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की, बोली- SIR वाले राज्यों में दोबारा चुनाव'

SIR Controversy: ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने SIR वाले राज्यों में प्री-SIR वोटर लिस्ट

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। 23 सितंबर को ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि SIR के बाद जिन राज्यों में चुनाव कराए गए हैं, वहां दोबारा चुनाव होना चाहिए।

नई दिल्ली: SIR Controversy को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में Special Intensive Revision (SIR) के बाद चुनाव कराए गए हैं, वहां चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए।

ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित तौर पर मतभेद सामने आने की रिपोर्टें चर्चा में हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन दावों के बीच कहा है कि SIR समेत आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में ऐसी गड़बड़ियां हुई हैं, जिनसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि SIR के बाद जिन राज्यों में चुनाव हो चुके हैं, वहां चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। उनके मुताबिक, यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोबारा चुनाव कराने पर विचार होना चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।

ममता ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच आगे चर्चा होगी। SIR को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form 6 में बदलाव और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।

इन रिपोर्टों के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज की। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और फैसलों में सहमति थी। आयोग के मुताबिक, बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

BJP ने क्या कहा?

SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। भाजपा ने चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया जाना बताया है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी दस्तावेजों को देखना चाहिए और संस्था की आधिकारिक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

SIR को लेकर क्यों है विवाद?

Special Intensive Revision यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण करना है। इसके तहत मतदाता रिकॉर्ड की जांच, पात्र मतदाताओं की पहचान और अपात्र, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया शामिल है। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नामों की जांच और हटाने से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली समेत कुछ क्षेत्रों में नोटिस और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर अदालतों में भी सवाल उठे हैं।

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