अक्टूबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति 27 महीने के निचले स्तर पर, RBI नीति बैठक में ब्याज दरों पर भी हुआ असर

अक्टूबर 2025 में थोक महंगाई (-)1.21% पर, खाद्य और ईंधन कीमतों में गिरावट। CPI भी 0.25% पर, RBI की दर कटौती की उम्मीद बढ़ी।

अक्टूबर 2025 में WPI महंगाई दर -1.21% रही, 27 महीने के निचले स्तर पर। खाद्य, ईंधन और विनिर्मित उत्पादों के दाम कम हुए। खुदरा CPI 0.25% पर, GST कटौती और अनुकूल बेस इफेक्ट महंगाई में राहत का कारण।

WPI: अक्टूबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर (-)1.21% पर आ गई है, जो पिछले 27 महीनों का सबसे निचला स्तर है। सितंबर 2025 में यह 0.13% थी, जबकि अक्टूबर 2024 में 2.75% रही थी। इस गिरावट का मुख्य कारण दाल, सब्जियां और अन्य खाद्य वस्तुओं में तेज कमी, साथ ही ईंधन और विनिर्मित उत्पादों के दाम कम होना रहा।

महंगाई में राहत का कारण

उद्योग मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर में नकारात्मक मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली, मिनरल ऑयल और बेसिक मेटल्स के दाम घटने के कारण आई है। WPI आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में 8.31% की गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर के 5.22% से ज्यादा है।

सबसे बड़ी गिरावट वाली वस्तुएं

सब्जियों के दाम में –34.97% की कमी आई, दालों में –16.50%, आलू –39.88% और प्याज –65.43% सस्ता हुआ। इस तरह आम जनता को जरूरी वस्तुओं में राहत मिली है।

विनिर्मित उत्पाद और ईंधन में नरमी

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई अक्टूबर में घटकर 1.54% रही। ईंधन और बिजली में –2.55% की गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार सातवें महीने कीमतों में नरमी का संकेत है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसरा ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 के बाकी महीनों में अनुकूल बेस इफेक्ट के कारण WPI में गिरावट जारी रह सकती है। नवंबर 2025 में थोक महंगाई 1% से नीचे रहने की संभावना है।

GST कटौती का असर

22 सितंबर से लागू GST दरों में कटौती का भी असर महंगाई में देखा गया। चार-स्तरीय GST स्लैब को घटाकर केवल दो स्लैब (5% और 18%) कर देने से दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती हुईं और थोक एवं खुदरा महंगाई में गिरावट आई।

खुदरा महंगाई में भी कमी

अक्टूबर में खुदरा महंगाई (CPI) 0.25% पर रिकॉर्ड निचले स्तर पर रही। सितंबर में यह 1.44% थी। थोक और खुदरा महंगाई में तेजी से गिरावट के कारण आरबीआई की दिसंबर 3–5 की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ गई है।

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