अलीगढ़ पुलिस ने जिले में लंबे समय से लापता चल रहे हिस्ट्रीशीटरों की तलाश और उनके सत्यापन के लिए चलाए गए अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने अभियान के दौरान 57 ऐसे हिस्ट्रीशीटरों को तलाशकर उनका सत्यापन कराया, जिनका वर्तमान ठिकाना पुलिस रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं था। इस काम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 33 पुलिसकर्मियों को एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। पुलिस का कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए हिस्ट्रीशीटरों की वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी लगातार अपडेट रखना जरूरी है।
दरअसल, अलीगढ़ पुलिस ने कुछ दिन पहले जिले में ऐसे हिस्ट्रीशीटरों की पहचान की थी, जिनका मौजूदा पता पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले में दो हजार से अधिक अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। इनमें करीब 1800 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन पूरा हो चुका था, जबकि लगभग 200 ऐसे हिस्ट्रीशीटर थे जिनके वर्तमान ठिकाने और गतिविधियों की जानकारी स्पष्ट नहीं थी। इसी स्थिति को देखते हुए एसएसपी ने बीट पुलिसकर्मियों को विशेष अभियान चलाकर इन लोगों का पता लगाने और सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे।
अभियान के तहत पुलिसकर्मियों ने अपने-अपने क्षेत्र में पुराने रिकॉर्ड खंगाले और हिस्ट्रीशीटरों के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई। पुलिस ने उनके वर्तमान पते की पुष्टि करने के साथ यह भी पता लगाने का प्रयास किया कि वे फिलहाल कहां रह रहे हैं और उनकी वर्तमान गतिविधियां क्या हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान 57 लापता हिस्ट्रीशीटरों को तलाशकर उनका सत्यापन कराया गया।
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एसएसपी नीरज जादौन ने पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की थी। घोषणा की गई थी कि जो पुलिसकर्मी लापता हिस्ट्रीशीटर को तलाशकर उसका सत्यापन कराएगा, उसे प्रति हिस्ट्रीशीटर एक हजार रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। इसके बाद बीट स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों ने अभियान में सक्रियता दिखाई और 33 पुलिसकर्मियों ने मिलकर 57 हिस्ट्रीशीटरों का पता लगाया।
पुलिसिंग में बीट कांस्टेबल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बीट पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र के लोगों, संदिग्ध गतिविधियों और पुराने अपराधियों के बारे में स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाता है। हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर नजर रखना भी इसी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में यदि किसी हिस्ट्रीशीटर का वर्तमान पता पुलिस रिकॉर्ड से गायब हो जाए तो उसकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो सकता है। अलीगढ़ पुलिस ने इसी कमी को दूर करने के लिए अभियान चलाया।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि किसी हिस्ट्रीशीटर का सत्यापन केवल रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया नहीं है। इससे पुलिस को यह पता रहता है कि संबंधित व्यक्ति वर्तमान में कहां रह रहा है और उसकी गतिविधियां कैसी हैं। यदि वह अपना क्षेत्र छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर चला गया है तो उसकी जानकारी भी रिकॉर्ड में दर्ज की जा सकती है। इससे भविष्य में किसी घटना की जांच या निगरानी के दौरान पुलिस को मदद मिलती है।
अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों ने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित लोगों की तलाश की। कई मामलों में वर्तमान पते और पुराने पते की जानकारी का मिलान करना पड़ा होगा। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने और मौके पर जाकर सत्यापन करने की प्रक्रिया के जरिए पुलिस ने 57 हिस्ट्रीशीटरों को अपने रिकॉर्ड में दोबारा चिन्हित किया। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को उनके काम के लिए सम्मानित किया गया।
एसएसपी नीरज जादौन ने इस उपलब्धि के बाद पुलिसकर्मियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रभावी पुलिसिंग के लिए अपराधियों की निगरानी और उनका सत्यापन लगातार जारी रहना चाहिए। पुलिसकर्मियों को आगे भी इसी तरह मेहनत और लगन के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इस अभियान का एक उद्देश्य पुलिस रिकॉर्ड को जमीनी स्थिति के अनुरूप अपडेट करना भी है। किसी अपराधी की हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद उसकी गतिविधियों और पते से जुड़ी जानकारी समय-समय पर सत्यापित की जाती है। यदि कोई व्यक्ति अपना स्थान बदल लेता है या लंबे समय तक अपने पुराने पते पर नहीं मिलता तो रिकॉर्ड में उसका सत्यापन लंबित हो सकता है। ऐसे मामलों में बीट पुलिस की सक्रियता महत्वपूर्ण हो जाती है।
अलीगढ़ पुलिस की ओर से चलाए गए अभियान में 57 हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन पूरा होना इसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे पुलिस के पास इन लोगों के वर्तमान ठिकानों की जानकारी उपलब्ध होगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस उनकी निगरानी कर सकेगी। साथ ही जिन लोगों का सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें भी अभियान के अगले चरण में तलाशने की कोशिश जारी रह सकती है।
कुछ दिन पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक अलीगढ़ में करीब 200 हिस्ट्रीशीटर ऐसे थे जिनका वर्तमान ठिकाना पुलिस रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं था। जिले में दो हजार से अधिक हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं और करीब 1800 का सत्यापन पूरा हो चुका था। अब 57 और लोगों का पता लगाए जाने के बाद पुलिस के सामने बाकी लोगों का सत्यापन पूरा करने की चुनौती है।
पुलिस की इस कार्रवाई को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ स्थानीय पुलिसिंग को मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। किसी भी जिले में पुलिस के लिए यह जरूरी होता है कि उसके रिकॉर्ड में दर्ज पुराने अपराधियों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो। यदि किसी व्यक्ति का पता और गतिविधियां लंबे समय तक अज्ञात रहें तो उसके संबंध में पुलिस की निगरानी कमजोर पड़ सकती है। इसी कारण समय-समय पर हिस्ट्रीशीटरों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है।
अलीगढ़ पुलिस ने इस काम को केवल विभागीय जिम्मेदारी तक सीमित रखने के बजाय पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन से जोड़ दिया। प्रति हिस्ट्रीशीटर एक हजार रुपये के पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र की घोषणा से पुलिसकर्मियों में अभियान के प्रति सक्रियता बढ़ाने की कोशिश की गई। परिणामस्वरूप 33 पुलिसकर्मियों ने 57 लापता हिस्ट्रीशीटरों को तलाशने और सत्यापन कराने में सफलता हासिल की।
एसएसपी की ओर से पुलिसकर्मियों को सम्मानित किए जाने का उद्देश्य दूसरे कर्मचारियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। पुलिस विभाग में बीट स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर किसी इलाके की स्थानीय परिस्थितियों की सबसे ज्यादा जानकारी होती है। इसलिए उनकी सक्रियता से अपराधियों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस को समय पर जानकारी मिल सकती है।
अलीगढ़ पुलिस का यह अभियान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। जिन हिस्ट्रीशीटरों का अभी तक सत्यापन नहीं हो पाया है, उनके वर्तमान ठिकाने की जानकारी जुटाना पुलिस के लिए अगला लक्ष्य हो सकता है। साथ ही जिन 57 लोगों का सत्यापन किया गया है, उनकी जानकारी भी संबंधित रिकॉर्ड में अपडेट की जाएगी, ताकि भविष्य में उनकी निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से चलती रहे।
फिलहाल 57 लापता हिस्ट्रीशीटरों की तलाश और सत्यापन के बाद अलीगढ़ पुलिस ने अपने अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस काम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 33 पुलिसकर्मियों को एसएसपी नीरज जादौन ने नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। पुलिस अधिकारियों का जोर अब इसी तरह नियमित सत्यापन और मजबूत बीट पुलिसिंग के जरिए अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने पर है।












