इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद में कहा, खरीदार तैयार हो तो विक्रेता को करनी होगी रजिस्ट्री

Allahabad High Court ने कहा, खरीदार अनुबंध पूरा करने को तैयार हो तो विक्रेता या उसके वारिसों को संपत्ति की रजिस्ट्री करनी होगी।

Allahabad High Court ने कानपुर के संपत्ति विवाद मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि खरीदार अनुबंध पूरा करने के लिए तैयार है, तो विक्रेता या उसके वारिसों को संपत्ति की रजिस्ट्री करनी होगी।

Prayagraj: Allahabad High Court ने संपत्ति बिक्री समझौते से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि खरीदार की ओर से अनुबंध निभाने की तत्परता साबित होने पर विक्रेता रजिस्ट्री से पीछे नहीं हट सकता। कोर्ट ने कानपुर के सर्वोदय नगर स्थित भूखंड विवाद में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए विक्रेता पक्ष की अपील खारिज कर दी और तय समय में सेल डीड निष्पादित करने का निर्देश दिया।

Allahabad High Court ने कानपुर नगर के एक संपत्ति विवाद मामले में अहम फैसला सुनाते हुए संबंधित अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि खरीदार बिक्री अनुबंध को पूरा करने के लिए लगातार तैयार और इच्छुक रहा है, तो विक्रेता या उसके वारिसों को संपत्ति की रजिस्ट्री करनी ही होगी। अदालत ने इस मामले में दाखिल अपील को खारिज कर दिया।

2012 के बिक्री समझौते से जुड़ा मामला

मामला कानपुर के सर्वोदय नगर, काकादेव स्थित एक भूखंड से जुड़ा है। वर्ष 2012 में Shivani Hospital Private Limited ने इस संपत्ति को 5.25 करोड़ रुपये में खरीदने का समझौता किया था। कंपनी की ओर से 2.41 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन ने शेष रकम जमा कर अपनी वित्तीय क्षमता और अनुबंध पूरा करने की मंशा स्पष्ट कर दी थी। वहीं विक्रेता की बेटियां तय शर्तों के अनुसार समझौता पूरा करने में असफल रहीं।

कम कीमत और दबाव के आरोप खारिज

मामले में विक्रेता पक्ष की ओर से अनुचित प्रभाव और संपत्ति को कम कीमत पर बेचने जैसे आरोप लगाए गए थे, लेकिन कोर्ट ने इन दावों को पर्याप्त आधार न मिलने पर खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति Sandeep Jain की एकलपीठ ने कहा कि खरीदार ने लगातार अनुबंध के पालन की इच्छा दिखाई है, इसलिए विक्रेता पक्ष अब समझौते से पीछे नहीं हट सकता।

एक महीने में रजिस्ट्री करने का आदेश

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी एक महीने के भीतर शेष राशि प्राप्त कर संपत्ति की सेल डीड निष्पादित करें। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो अस्पताल प्रबंधन को अदालत की डिक्री लागू कराने का अधिकार होगा।

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