अलवर में BJP की सुमनलता अग्रवाल मेयर बनीं, जीत के बाद भावुक हुए संजय शर्मा

अलवर नगर निगम में BJP की सुमनलता अग्रवाल के मेयर चुने जाने के बाद संजय शर्मा हुए भावुक। पिछली बार की घटना को याद करते हुए कहा कि इस बार अलवर की जनता जीती है

अलवर नगर निगम में BJP की सुमनलता अग्रवाल के मेयर चुने जाने के बाद मंत्री संजय शर्मा भावुक हो गए। उन्होंने पिछली बार की घटना को याद करते हुए कहा कि इस बार अलवर की जनता और BJP कार्यकर्ताओं ने उसका जवाब दिया है।

अलवर: राजस्थान के अलवर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सुमनलता अग्रवाल को मेयर चुने जाने के बाद राज्य के कैबिनेट मंत्री संजय शर्मा भावुक हो गए। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने पिछली बार इसी परिसर में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनके साथ धोखा हुआ था, जबकि इस बार BJP प्रत्याशी ने मेयर पद हासिल कर लिया है। अलवर का यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि 65 सदस्यीय नगर निगम में किसी भी प्रमुख दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। BJP के पास 28 और कांग्रेस के पास 23 पार्षद थे। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक बन गया। अंततः सुमनलता अग्रवाल ने 42 वोट हासिल कर मेयर पद अपने नाम किया, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।

सुमनलता अग्रवाल को मिले 42 वोट

अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। हालिया निकाय चुनाव में BJP ने 28 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस को 23 वार्ड में जीत मिली। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 13 वार्ड जीते और एक सीट BSP के खाते में गई। दोनों प्रमुख दल बहुमत के लिए जरूरी 33 के आंकड़े से दूर थे।

मेयर चुनाव में BJP की सुमनलता अग्रवाल को 42 वोट मिले। कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट प्राप्त हुए। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, BJP को अपने पार्षदों के अलावा निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिला, जिससे सुमनलता बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकल गईं।

इस परिणाम ने यह भी दिखाया कि वार्ड चुनाव में किसी पार्टी की सीट संख्या और मेयर चुनाव का अंतिम परिणाम अलग हो सकता है। अलवर में BJP सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत नहीं था। मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन ने सत्ता का समीकरण बदल दिया।

जीत के बाद भावुक हुए मंत्री संजय शर्मा

अलवर नगर निगम चुनाव की जिम्मेदारी BJP की ओर से मंत्री संजय शर्मा को दी गई थी। सुमनलता अग्रवाल की जीत के बाद मीडिया से बातचीत में वह भावुक हो गए और रो पड़े।

संजय शर्मा ने कहा कि पिछली बार इसी नगर परिषद परिसर में उनके साथ धोखा हुआ था और इस बार उसी जगह BJP की प्रत्याशी मेयर बनी हैं। उन्होंने इस जीत को अलवर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत से जोड़ते हुए उनका आभार जताया।

मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, BJP जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता और पार्टी प्रभारी रामचरण वोरा का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और नेतृत्व के सहयोग से BJP को यह सफलता मिली है।

'पिछली बार मुझे छला गया था'

संजय शर्मा ने अपने बयान में पिछली बार के घटनाक्रम को याद किया। उनके अनुसार, उस समय अलवर में BJP का बोर्ड बनने की स्थिति थी, लेकिन बाद की राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा नहीं हो सका।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार BJP के पक्ष में बन रहे बोर्ड को "झूठ, फरेब और गुंडागर्दी" के जरिए रोका गया था। यह उनके द्वारा लगाया गया राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र रूप से किसी अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मंत्री ने इस बार के परिणाम को उसी घटनाक्रम का राजनीतिक जवाब बताया और कहा कि अलवर के पार्षदों ने कांग्रेस तथा कांग्रेस नेता टीकाराम जूली को जवाब दिया है। कांग्रेस या टीकाराम जूली की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया को इस रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

'आज मेरी मेयर विजय की माला पहन रही हैं'

संजय शर्मा ने अपनी भावुकता की वजह बताते हुए पिछली घटना और मौजूदा जीत की तुलना की। उन्होंने कहा कि पिछली बार इसी परिसर में उनके साथ गलत व्यवहार हुआ था, जबकि इस बार उसी परिसर में सुमनलता अग्रवाल विजय की माला पहन रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए भावुक क्षण है। मंत्री ने अलवर की जनता और BJP कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए आने वाले समय में शहर में विकास कार्य तेज करने की बात कही।

उनके मुताबिक, नई मेयर के नेतृत्व में शहर के विकास के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने अलवर की जनता को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि आने वाले समय में शहर में बेहतर काम किए जाएंगे।

2019 में क्या हुआ था?

अलवर के मौजूदा परिणामों को समझने के लिए 2019 के राजनीतिक समीकरण का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 2019 में BJP ने अलवर नगर निकाय में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की थीं, लेकिन मेयर चुनाव में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।

निर्दलीय पार्षदों के समर्थन और क्रॉस-वोटिंग ने उस समय राजनीतिक समीकरण बदल दिया था। इस बार भी निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में रहे, लेकिन उनका समर्थन BJP प्रत्याशी सुमनलता अग्रवाल के पक्ष में गया। इसी वजह से BJP ने बहुमत के आंकड़े से काफी आगे जाकर 42 वोट हासिल किए।

अलवर में BJP और कांग्रेस की स्थिति

इस बार अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में BJP 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस ने 23 वार्ड जीते। 13 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं और एक वार्ड में BSP उम्मीदवार विजयी रहा।

बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। BJP को बहुमत के लिए अपने 28 पार्षदों के अलावा कम से कम पांच अन्य पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी। अंतिम मेयर चुनाव में सुमनलता को 42 वोट मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि उन्हें BJP की अपनी संख्या से अतिरिक्त समर्थन हासिल हुआ।

राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में BJP का प्रदर्शन

अलवर का परिणाम राजस्थान के व्यापक शहरी निकाय चुनावों के बीच आया है। राज्य के 309 नगरीय निकायों में मेयर और चेयरपर्सन पदों के चुनाव हुए हैं। 21 सितंबर तक सामने आए आंकड़ों में BJP और कांग्रेस के बीच राज्यव्यापी परिणामों को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में मामूली अंतर है।

आकाशवाणी ने बताया कि 301 निकायों के परिणाम घोषित होने तक BJP ने 197 और कांग्रेस ने 94 निकायों में बोर्ड बनाया था। वहीं अन्य रिपोर्टों में 302 निकायों के परिणामों के आधार पर BJP के 200 और कांग्रेस के 94 निकायों में बोर्ड बनने की जानकारी दी गई। यह अंतर अलग-अलग समय पर घोषित परिणामों और अपडेटेड चुनावी आंकड़ों के कारण है।

BJP ने छह प्रमुख नगर निगमों में जीता मेयर पद

21 सितंबर को घोषित प्रमुख नगर निगमों के नतीजों में BJP ने अलवर, अजमेर, उदयपुर और पाली में मेयर पद जीता। भरतपुर और भीलवाड़ा में BJP के उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। कांग्रेस को प्रमुख नगर निगमों में बीकानेर में सफलता मिली।

अलवर में BJP की जीत खास इसलिए रही क्योंकि पार्टी के पास 65 सदस्यीय सदन में अपने दम पर बहुमत नहीं था। इसी तरह राजस्थान के अन्य निकायों में भी निर्दलीय पार्षदों ने कई जगह सत्ता के समीकरण प्रभावित किए।

अभी बाकी हैं जयपुर, जोधपुर और कोटा के मेयर चुनाव

राजस्थान के सभी प्रमुख नगर निगमों के मेयर चुनाव का पूरा परिणाम अभी सामने नहीं आया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर पद के चुनाव 25 सितंबर को निर्धारित हैं। इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के चेयरपर्सन पद का चुनाव भी उसी दिन होना है।

इसलिए अलवर में BJP की सुमनलता अग्रवाल की जीत राज्य के शहरी निकाय चुनावों के व्यापक परिणाम का एक हिस्सा है। फिलहाल अलवर में नया बोर्ड गठित हो चुका है और सुमनलता अग्रवाल नगर निगम की मेयर के रूप में कार्यभार संभालेंगी।

अब विकास के मुद्दों पर होगी नजर

मेयर चुनाव के बाद अलवर नगर निगम के सामने शहर की स्थानीय जरूरतों को लेकर कई जिम्मेदारियां होंगी। सुमनलता अग्रवाल ने उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विकास, सफाई और बिजली व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

वहीं राजनीतिक तौर पर यह परिणाम BJP के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी ने स्पष्ट बहुमत के बिना निर्दलीय समर्थन जुटाकर मेयर पद हासिल किया। आने वाले समय में नए बोर्ड के कामकाज, पार्षदों के बीच समन्वय और शहर के विकास से जुड़े फैसलों पर नजर रहेगी।

 

Leave a comment