झारखंड में भाजपा का सियासी गेमप्लान, अमित शाह ने नेताओं को आक्रामक रणनीति अपनाने का दिया निर्देश

अमित शाह ने झारखंड भाजपा नेताओं के साथ बैठक में सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने और जनमुद्दों को मजबूती से उठाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में झारखंड भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की। राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा के दौरान उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने और जनमुद्दों को मजबूती से उठाने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली में झारखंड भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और पार्टी की आगामी रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने नेताओं को सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन के खिलाफ रक्षात्मक रुख छोड़कर आक्रामक राजनीति करने का संदेश दिया। बैठक में छात्र आंदोलन, एमएमडीआर कानून में संशोधन, एफसीआरए बिल, एसआईआर और घुसपैठ समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

अमित शाह से मिले झारखंड भाजपा के आठ प्रमुख नेता

नई दिल्ली में हुई इस बैठक को झारखंड भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो. आदित्य साहू ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के लिए 24 नेताओं के नाम भेजे थे, जिनमें से आठ नेताओं को बैठक में शामिल होने की मंजूरी मिली।

बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय, दीपक प्रकाश और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल रहे।

झारखंड भाजपा की ओर से जारी प्रेस बयान में बैठक में हुई विस्तृत चर्चा का ब्योरा नहीं दिया गया। बयान के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से राज्य के कई समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की और गृह मंत्री ने पार्टी नेताओं को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

रक्षात्मक नहीं, आक्रामक राजनीति पर जोर

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने झारखंड भाजपा नेताओं को सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ रक्षात्मक राजनीति से बाहर निकलकर आक्रामक तरीके से मुद्दे उठाने को कहा। बैठक में राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर भी चर्चा हुई।

भाजपा नेताओं को छात्रों की समस्याओं को मजबूती से उठाने और सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करने का संदेश दिया गया। पार्टी से कहा गया कि युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार जनता के बीच उठाया जाए।

एमएमडीआर संशोधन और एफसीआरए बिल पर भी चर्चा

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर कानून में किए गए संशोधन को लेकर झामुमो के विरोध पर भी चर्चा हुई। भाजपा नेताओं को निर्देश दिया गया कि वे इस मुद्दे पर जनता के बीच जाकर केंद्र सरकार का पक्ष स्पष्ट करें।

पार्टी नेताओं से कहा गया कि लोगों को बताया जाए कि एमएमडीआर कानून में किया गया संशोधन झारखंड या झारखंडी जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि राज्य और देशहित को ध्यान में रखकर किया गया है। झामुमो की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर देने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

प्रस्तावित एफसीआरए बिल को लेकर भी पार्टी को जनता के बीच जानकारी देने की बात कही गई। विदेशों से मिलने वाली फंडिंग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था। हालांकि, विधेयक संसद से पारित नहीं हो सका और इसे 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेजा गया है।

एसआईआर और घुसपैठ के मुद्दे पर भी फोकस

बैठक में एसआईआर के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। भाजपा नेताओं को विपक्ष की ओर से संभावित आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी का जवाब तथ्यों के आधार पर देने को कहा गया।

इसके साथ ही झारखंड में घुसपैठ के मुद्दे पर भी पार्टी को लगातार आक्रामक रुख बनाए रखने का संदेश दिया गया। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों को भी जनता के बीच मजबूती से रखने की रणनीति पर चर्चा हुई।

कांग्रेस की ओर से परिसीमन को लेकर बनाए जा रहे राजनीतिक मुद्दे के जवाब में भाजपा को अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया। कांग्रेस की ओर से यह दावा किए जाने का उल्लेख किया गया कि परिसीमन से आदिवासी समुदाय को नुकसान हो सकता है और उनकी सीटों की संख्या घट सकती है।

झारखंड भाजपा के लिए क्यों अहम है बैठक

झारखंड भाजपा के लिए अमित शाह के साथ हुई यह बैठक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य भाजपा के लिए पूर्वी और मध्य भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण राजनीतिक क्षेत्रों में शामिल है। झारखंड को छोड़कर आसपास के बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में भाजपा या उसके नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकारें हैं।

झारखंड में पिछले दो विधानसभा चुनावों से भाजपा सत्ता से बाहर है। पार्टी अब तक हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक रणनीति तैयार करने में चुनौती का सामना करती रही है।

ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बैठक में मिले निर्देशों के बाद झारखंड भाजपा आने वाले दिनों में जनमुद्दों और सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज कर सकती है।

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