आंध्र प्रदेश के मंत्री नारायण ने अमरावती में MLA और MLC क्वार्टर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि आवासीय परिसरों और अधिकारियों के दफ्तरों का निर्माण अंतिम चरण में है तथा जल्द ही इन्हें सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को सौंप दिया जाएगा।
अमरावती: आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राज्य के मंत्री नारायण ने मंगलवार को अमरावती में निर्माणाधीन विधायक (MLA) और विधान परिषद सदस्य (MLC) आवासीय परिसरों का निरीक्षण किया और घोषणा की कि इन भवनों को जल्द ही सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को सौंप दिया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि कई महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाएं अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और आने वाले समय में अमरावती को एक आधुनिक प्रशासनिक राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा।
MLA और MLC आवासीय परिसर अंतिम चरण में
मंत्री नारायण के अनुसार, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए बनाए जा रहे आवासीय कॉम्प्लेक्स लगभग तैयार हो चुके हैं। उन्होंने निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को निर्देश दिया कि बचा हुआ कार्य, विशेषकर इंटीरियर फिनिशिंग और सुविधाओं से जुड़ा काम, जल्द पूरा किया जाए।
सरकार का उद्देश्य है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जल्द आधुनिक और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रशासनिक कार्यों में सुविधा हो सके।
अधिकारियों और मंत्रियों के लिए भी तैयार हो रहे नए भवन
मंत्री ने जानकारी दी कि केवल विधायक और MLC आवास ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय और मंत्रियों के बंगलों का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि Group-1 और Group-2 अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे आवासीय टावर भी लगभग पूर्ण हो चुके हैं। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और सुचारु बनेगी।

अमरावती को आधुनिक प्रशासनिक राजधानी बनाने की कोशिश
अमरावती परियोजना आंध्र प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी राजधानी विकास योजनाओं में से एक मानी जाती है। राज्य विभाजन के बाद इसे नई राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक बदलावों और वित्तीय चुनौतियों के कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई थी। अब राज्य सरकार एक बार फिर अमरावती विकास को प्राथमिकता देने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाता है, तो अमरावती दक्षिण भारत के प्रमुख प्रशासनिक और शहरी केंद्रों में शामिल हो सकता है।
भूमि पूलिंग योजना पर सरकार का दावा
निरीक्षण के दौरान मंत्री नारायण ने अमरावती की भूमि पूलिंग योजना पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 34,525 एकड़ भूमि के अंतर्गत आने वाले किसानों को प्लॉट आवंटित कर दिए हैं।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि 674 किसानों को अभी तक प्लॉट वितरण नहीं हो पाया है। इसके पीछे कानूनी विवादों और न्यायिक प्रक्रियाओं को वजह बताया गया।
भूमि पूलिंग योजना अमरावती परियोजना का अहम हिस्सा रही है, जिसके तहत किसानों ने राजधानी निर्माण के लिए अपनी जमीन सरकार को सौंपी थी। बदले में उन्हें विकसित भूखंड और अन्य सुविधाएं देने का वादा किया गया था।
राजनीतिक विवादों पर मंत्री का पलटवार
मंत्री नारायण ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अमरावती परियोजना को लेकर जानबूझकर राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “सरकार ने जमीन ली लेकिन किसानों को प्लॉट नहीं दिए” जैसे दावों की सत्यता पहले जांचनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और अधिकांश किसानों को भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमरावती परियोजना को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
चुनावी राजनीति में अहम मुद्दा बना अमरावती
अमरावती विकास परियोजना आंध्र प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने राजधानी के विकास मॉडल, भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढांचे की प्राथमिकताओं को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में भी अमरावती का मुद्दा प्रमुख भूमिका निभा सकता है। राजधानी विकास की गति और किसानों से जुड़े वादों की स्थिति पर जनता की नजर बनी हुई है।
आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना
विशेषज्ञों के अनुसार अमरावती परियोजना केवल प्रशासनिक राजधानी का निर्माण नहीं है, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास, निवेश आकर्षण और शहरी विस्तार से भी जुड़ी हुई है।
यदि परियोजना को योजनानुसार पूरा किया जाता है, तो इससे रोजगार, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।









