आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले से 3 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने निकले आठ मछुआरे लापता हैं। 12 अगस्त तक नाव नहीं लौटी। Coast Guard, मत्स्य विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त खोज अभियान शुरू किया है।
अमरावती: आंध्र प्रदेश के बी. आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले से मछली पकड़ने समुद्र में निकले आठ मछुआरों के लापता होने से हड़कंप मच गया है। मछुआरों का संपर्क कई दिनों से परिजनों से नहीं हुआ है। भारतीय तटरक्षक बल, मत्स्य विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से तलाश अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर खोज अभियान को हर संभव संसाधन के साथ जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
3 अगस्त को समुद्र में निकली थी नाव
अधिकारियों के मुताबिक, आठों मछुआरे 3 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे कोनसीमा जिले के अल्लावरम मंडल के ओडलारेवु जेट्टी से एक नाव पर सवार होकर बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने के लिए निकले थे। नाव में ओडलारेवु, डुम्मलापेटा और वसलतिप्पा गांवों के मछुआरे सवार थे।
समुद्र में जाने के बाद शुरुआती कुछ समय तक परिवार के लोगों से फोन पर संपर्क बना रहा। अधिकारियों के अनुसार, 3 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे तक मछुआरों से बातचीत हुई थी। इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।
अधिकारियों का अनुमान है कि नाव उसी दिन शाम करीब 6 बजे मछली पकड़ने वाले क्षेत्र तक पहुंच गई होगी। नाव को 12 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद वह तट पर नहीं पहुंची। इसके बाद परिवारों की चिंता बढ़ गई और प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।
परिवारों की बढ़ी चिंता, प्रशासन ने शुरू किया अभियान
मछुआरों के लंबे समय तक वापस नहीं लौटने और संपर्क नहीं होने के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने भारतीय तटरक्षक बल को अलर्ट किया और समुद्र में विशेष तलाशी अभियान शुरू कराया।
लापता नाव पर मोबाइल फोन के अलावा VHF संचार उपकरण भी मौजूद होने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। इसके बावजूद नाव से संपर्क स्थापित नहीं हो सका। समुद्र में मौसम, लहरों और नाव की वास्तविक स्थिति को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
तटरक्षक बल के जहाजों को खोज अभियान में लगाया गया है। इसके अलावा आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी सतर्क किया गया है, ताकि लापता नाव या मछुआरों के बारे में कोई जानकारी मिलने पर तुरंत प्रशासन को सूचित किया जा सके।
कई इलाकों की मछली पकड़ने वाली नावें भी तलाश में शामिल
अधिकारियों के अनुसार, काकीनाडा, भैरवपालम, विशाखापत्तनम और पारादीप से समुद्र में मौजूद मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी अलर्ट किया गया है। इन नावों के जरिए समुद्र में लापता मछुआरों और उनकी नाव के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन का उद्देश्य समुद्र के संभावित क्षेत्रों में खोज का दायरा बढ़ाना है। तटरक्षक बल और राज्य की एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ अभियान चला रही हैं।
अधिकारियों को उम्मीद है कि समुद्र में मौजूद अन्य मछुआरों या जहाजों से कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जिससे लापता नाव की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिले।
चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों से ली पूरी जानकारी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ मामले की समीक्षा की। उन्होंने लापता मछुआरों को खोजने के लिए चलाए जा रहे अभियान की जानकारी ली और अधिकारियों को तलाश में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक लापता नाव और उसमें सवार आठों मछुआरों का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज अभियान जारी रहना चाहिए। उन्होंने Coast Guard, मत्स्य विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
नायडू ने अधिकारियों से कहा कि मछुआरों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाए और उन्हें अभियान की प्रगति की जानकारी दी जाए। सरकार ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया है।
समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा फिर बनी चिंता
आंध्र प्रदेश में समुद्र में मछुआरों के लापता होने की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले महीने भी विशाखापत्तनम के पास समुद्री हादसे में कई मछुआरों की जान चली गई थी।
पिछली घटना में एक मशीनीकृत मछली पकड़ने वाली नाव 1 जुलाई को सात मछुआरों को लेकर समुद्र में गई थी। वापसी के दौरान 4 जुलाई को विशाखापत्तनम के गंगावरम तट से करीब 10 समुद्री मील दूर नाव पलट गई थी।
हादसे के बाद एक मछुआरे को एक व्यापारिक जहाज के चालक दल ने बचा लिया था। उसे 6 जुलाई को तट पर लाया गया था। बाकी छह मछुआरों का चार दिन तक भारतीय नौसेना और Coast Guard ने संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभियान चलाया, लेकिन उनका पता नहीं चल सका।
8 जुलाई को तलाशी अभियान समाप्त कर दिया गया था। बाद में राज्य सरकार ने मृत मछुआरों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी।
अब आठ मछुआरों की सुरक्षित वापसी सबसे बड़ी प्राथमिकता
ताजा मामले में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती समुद्र के बड़े क्षेत्र में लापता नाव का पता लगाना है। 3 अगस्त से संपर्क टूटने और 12 अगस्त तक नाव के वापस नहीं लौटने के बाद खोज अभियान को लगातार विस्तारित किया जा रहा है।
परिवारों के लिए हर गुजरता दिन चिंता बढ़ा रहा है। सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर मछुआरों की तलाश की जाएगी।
फिलहाल Coast Guard के जहाज, राज्य की एजेंसियां और अलग-अलग बंदरगाहों से समुद्र में मौजूद मछली पकड़ने वाली नावें तलाश अभियान में सहयोग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापता मछुआरों की सुरक्षित वापसी तक अभियान को जारी रखा जाएगा।













