अनिल अंबानी को बड़ा झटका, केनरा बैंक ने RCOM और RTL को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित किया

केनरा बैंक ने अनिल अंबानी, RCOM और RTL को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित किया। बैंक ने 31,580 करोड़ रुपये के फंड के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।

केनरा बैंक ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस की सहायक कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित किया है। बैंक ने फंड के निर्धारित उद्देश्य से अलग इस्तेमाल और डायवर्जन का आरोप लगाया है।

Business: अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केनरा बैंक ने अनिल अंबानी, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी सहायक कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) से जुड़े मामले में ‘विलफुल डिफॉल्टर’ का फैसला लिया है। बैंक ने कर्ज की रकम के कथित दुरुपयोग और डायवर्जन को लेकर जांच में विसंगतियां सामने आने की बात कही है।

केनरा बैंक की कमेटी ने लिया फैसला

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 8 सितंबर 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए इस घटनाक्रम की जानकारी दी। फाइलिंग के अनुसार, केनरा बैंक की ‘विलफुल डिफॉल्टर रिव्यू कमेटी’ ने 31 अगस्त 2026 को हुई बैठक में यह फैसला लिया।

अनिल अंबानी को बड़ा झटका, केनरा बैंक ने RCOM और RTL को ‘विलफुल डिफॉल्टर’ घोषित किया

बैंक की जांच के मुताबिक, कंपनी ने बैंक से प्राप्त फंड का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिनके लिए कर्ज लिया गया था। बैंक ने रिलायंस ग्रुप की कंपनियों RCOM, RTL और RITL से जुड़े वित्तीय लेनदेन में भी कथित विसंगतियां दर्ज की हैं।

31,580 करोड़ रुपये के फंड से जुड़े लेनदेन पर सवाल

केनरा बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, RCOM, RTL और RITL ने बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। बैंक का आरोप है कि इन फंड से किए गए निवेशों को तुरंत भुनाया गया और संबंधित तथा गैर-संबंधित पक्षों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया गया।

जांच में ‘नेटिजन’ (Netizen) नामक एक इकाई के साथ संदिग्ध लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। बैंक के अनुसार, इन लेनदेन के जरिए फंड डायवर्ट किए जाने की बात सामने आई है। इसी आधार पर बैंक ने मामले को विलफुल डिफॉल्टर से जुड़ी कार्रवाई के तहत लिया है।

विलफुल डिफॉल्टर सामान्य तौर पर ऐसे व्यक्ति या कंपनी को कहा जाता है, जिसके पास कर्ज चुकाने की क्षमता होने के बावजूद वह जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाता। हालांकि, इस मामले में बैंक की ओर से लगाए गए आरोपों और कंपनी के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है।

RCOM ने दिवाला प्रक्रिया का दिया हवाला

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने अपने जवाब में कहा है कि RCOM और RTL दोनों फिलहाल कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के अधीन हैं। कंपनी के अनुसार, केनरा बैंक का यह मामला दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले की अवधि से संबंधित है।

कंपनी ने बताया कि लेनदारों की समिति (CoC) पहले ही समाधान योजनाओं को मंजूरी दे चुकी है और ये योजनाएं अब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के समक्ष लंबित हैं। RCOM का कहना है कि उसे दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 32A के तहत सुरक्षा प्राप्त है। कंपनी के अनुसार, समाधान योजना मंजूर होने के बाद यह प्रावधान पिछले अपराधों के लिए कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

अनिल अंबानी ने 2019 में छोड़ा था पद

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने यह भी कहा है कि वह इस घटनाक्रम को लेकर कानूनी सलाह ले रही है। कंपनी के मुताबिक, अनिल अंबानी ने 15 नवंबर 2019 को ही RCOM के चेयरमैन और निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।

अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और NCLT में लंबित समाधान योजनाओं के नतीजे अहम होंगे। केनरा बैंक के आरोपों और RCOM की ओर से IBC की धारा 32A के तहत सुरक्षा के दावे के बीच आगे की स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, इसे निवेश सलाह न समझें। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

Leave a comment