अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट कामेंग जिले के सेप्पा में पुलिस, जिला प्रशासन, CWC और श्रम विभाग ने बाल श्रम के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया। दुकानों में काम कर रहे नौ नाबालिगों को मुक्त कराकर Child Care Institution भेजा गया, जहां उनकी देखभाल और काउंसलिंग होगी।
कामेंग: अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट कामेंग जिले के सेप्पा कस्बे में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस, जिला प्रशासन, बाल कल्याण समिति और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान अलग-अलग दुकानों में काम कर रहे नौ नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया।
बाल श्रम की सूचना के बाद चलाया गया अभियान
अधिकारियों को सेप्पा शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने की जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर ईस्ट कामेंग पुलिस ने जिला प्रशासन, Child Welfare Committee (CWC) और Labour Department के साथ मिलकर संयुक्त प्रवर्तन अभियान शुरू किया।
अभियान के दौरान अधिकारियों की टीम ने शहर की विभिन्न दुकानों और कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं निर्धारित कानूनी उम्र से कम बच्चों को रोजगार तो नहीं दिया जा रहा है।
दुकानों से 9 बच्चे किए गए रेस्क्यू
जांच के दौरान टीम को अलग-अलग दुकानों में नौ बच्चे काम करते हुए मिले। अधिकारियों ने सभी नाबालिगों को वहां से मुक्त कराया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की।
रेस्क्यू किए गए बच्चों को आगे की देखभाल और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए Child Care Institution (CCI) भेजा गया। वहां बच्चों को देखभाल और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही संबंधित बाल संरक्षण कानूनों के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य केवल बच्चों को रोजगार से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा करना भी है।
बाल श्रम रोकने के लिए कई विभाग एक साथ आए
इस कार्रवाई में कई सरकारी और बाल संरक्षण संस्थाओं के शामिल होने से अभियान की व्यापकता सामने आती है। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और जांच से जुड़े पहलुओं को संभाला, जबकि जिला प्रशासन, CWC और श्रम विभाग ने बाल संरक्षण तथा रोजगार कानूनों से संबंधित कार्रवाई में सहयोग किया।
इस तरह के संयुक्त अभियान का उद्देश्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बच्चों से अवैध रूप से काम कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित जांच और कानून का प्रभावी पालन बच्चों को शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बच्चों के शिक्षा और सुरक्षित बचपन के अधिकार पर जोर
ईस्ट कामेंग पुलिस ने कहा कि अभियान बच्चों को श्रम और किसी भी तरह के शोषण से बचाने के प्रशासन के सामूहिक प्रयास को दर्शाता है। पुलिस के अनुसार, प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन का अधिकार है।
बाल श्रम बच्चों को स्कूल और सामान्य विकास के अवसरों से दूर कर सकता है। कम उम्र में काम करने के कारण उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाल श्रम से जुड़े मामलों में प्रशासन की सक्रिय निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दुकानदारों को दी गई सख्त चेतावनी
कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने दुकानदारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों को नाबालिगों को रोजगार देने के खिलाफ चेतावनी दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों को काम पर लगाने के मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों ने कारोबारियों से अपील की कि वे बच्चों को रोजगार देने के बजाय उनके शिक्षा और सुरक्षा के अधिकारों का सम्मान करें। साथ ही आम लोगों से भी ऐसे मामलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने और जांच में सहयोग करने की अपील की गई है।
आम लोगों से भी सहयोग की अपील
ईस्ट कामेंग पुलिस ने लोगों से कहा है कि यदि उन्हें किसी दुकान, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या अन्य स्थान पर बच्चों से काम कराए जाने की जानकारी मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।
प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी कार्रवाई से बाल श्रम की समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज, परिवार, कारोबारी समुदाय और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी है।
रेस्क्यू के बाद बच्चों की स्थिति पर ध्यान
नौ बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद उन्हें सीधे Child Care Institution भेजा गया है, जहां उनकी देखभाल और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि बच्चों की परिस्थितियों और जरूरतों का आकलन किया जाए तथा कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।
बाल संरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को तत्काल सुरक्षित वातावरण देने के साथ-साथ उनके भविष्य के लिए उचित सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों में बच्चों की पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है।
बाल श्रम मुक्त जिला बनाने की दिशा में कदम
ईस्ट कामेंग प्रशासन की यह कार्रवाई जिले को बाल श्रम से मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है। सेप्पा में अभियान के दौरान नौ नाबालिगों का मिलना यह बताता है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की निगरानी लगातार बनाए रखना जरूरी है।
प्रशासन की ओर से आगे भी ऐसे निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान जारी रहने की उम्मीद है। यदि दुकानदारों और कारोबारियों के बीच कानून को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाती है और आम नागरिक संदिग्ध मामलों की जानकारी देते हैं, तो बच्चों को श्रम और शोषण से बचाने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
बाल श्रम के खिलाफ सख्ती का संदेश
सेप्पा में हुई कार्रवाई ने स्थानीय दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों को अवैध रूप से रोजगार में लगाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई के जरिए बाल संरक्षण को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
ईस्ट कामेंग पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम करें। पुलिस ने अपने संदेश में कहा कि सामूहिक प्रयासों से बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।










