एशियन गेम्स 2026 में चमकेगा राजस्थान का सितारा, कोटा की दिव्यांशी ने भारतीय वुशु टीम में बनाई ऐतिहासिक जगह

राजस्थान: कोटा की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में चुनी गईं। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह राज्य की पहली वुशु खिलाड़ी बनी हैं

राजस्थान की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी ने इतिहास रचते हुए एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है। कोटा की इस खिलाड़ी ने चयन ट्रायल्स में शानदार प्रदर्शन कर कई अनुभवी खिलाड़ियों को हराया और राज्य को नई पहचान दिलाई।

कोटा: राजस्थान के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार राज्य की किसी वुशु खिलाड़ी ने एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई है। कोटा की युवा खिलाड़ी दिव्यांशी का चयन एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय वुशु टीम में हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और समर्पण का परिणाम है, बल्कि राजस्थान में वुशु खेल के बढ़ते स्तर और संभावनाओं का भी प्रमाण है।

दिव्यांशी का चयन ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय वुशु लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। अब उनसे एशियाई खेलों में देश के लिए पदक जीतने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती उन्हें भारत की प्रमुख पदक दावेदार खिलाड़ियों में शामिल करती है।

वर्षों की मेहनत ने दिलाई ऐतिहासिक सफलता

किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष और अनुशासन छिपा होता है। दिव्यांशी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने वर्ष 2017 में वुशु खेल की शुरुआत की थी और तब से लगातार अपने खेल को निखारने में जुटी रहीं।

उनके कोच अशोक गौतम के अनुसार, दिव्यांशी ने कभी भी कठिन परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया। नियमित अभ्यास, फिटनेस पर विशेष ध्यान और प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और खुद को देश की शीर्ष खिलाड़ियों में स्थापित कर लिया।

राष्ट्रीय स्तर पर जीते 12 स्वर्ण पदक

दिव्यांशी की उपलब्धियों की सूची बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 12 स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। इनमें सब-जूनियर, जूनियर, स्कूल गेम्स, खेलो इंडिया और फेडरेशन कप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। हर स्तर पर उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि वे बड़े मंच पर दबाव झेलने की क्षमता रखती हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी सफलता ने चयनकर्ताओं का ध्यान भी आकर्षित किया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अवसरों तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी छोड़ी छाप

दिव्यांशी ने केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। वर्ष 2024 में आयोजित जूनियर विश्व वुशु चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत और राजस्थान का नाम रोशन किया था।

यह पदक उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। विश्व स्तर पर पदक जीतने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिला और आत्मविश्वास भी बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव उन्हें एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजन में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा।

चयन ट्रायल में किया शानदार प्रदर्शन

एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना बेहद कठिन प्रक्रिया होती है। इसके लिए खिलाड़ियों को कई चरणों में आयोजित चयन ट्रायल से गुजरना पड़ता है। दिव्यांशी ने इन सभी ट्रायल्स में शानदार प्रदर्शन किया और अपने दमदार खेल से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। 

अंतिम ट्रायल जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित किया गया, जहां देशभर की शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंची थीं। 60 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्यांशी ने लगातार जीत दर्ज करते हुए खुद को सबसे मजबूत दावेदार साबित किया। उनका प्रदर्शन तकनीकी रूप से बेहद प्रभावशाली रहा और उन्होंने हर मुकाबले में आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया।

एशियन गेम्स 2026 में चमकेगा राजस्थान का सितारा, कोटा की दिव्यांशी ने भारतीय वुशु टीम में बनाई ऐतिहासिक जगह

अर्जुन अवार्डी खिलाड़ी को हराकर रचा इतिहास

श्रीनगर में हुए चयन ट्रायल के दौरान दिव्यांशी ने कई मजबूत खिलाड़ियों को हराया। सबसे बड़ी उपलब्धि तब सामने आई जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकीं और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित रोशीबीना देवी को पराजित कर दिया। यह मुकाबला चयन प्रक्रिया का सबसे चर्चित परिणाम माना गया। रोशीबीना देवी भारतीय वुशु की अनुभवी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं और उन्हें हराना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।  दिव्यांशी ने इस मुकाबले में न केवल अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि मानसिक मजबूती का भी शानदार परिचय दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि वह देश की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।

फाइनल में हिमांशी को हराकर पक्का किया टिकट

ट्रायल के अंतिम चरण में दिव्यांशी का मुकाबला चंडीगढ़ की हिमांशी से हुआ। यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इसकी विजेता को एशियन गेम्स का टिकट मिलना था।

दिव्यांशी ने पूरे मुकाबले के दौरान नियंत्रण बनाए रखा और आक्रामक रणनीति के साथ खेलते हुए जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली और राजस्थान के खेल इतिहास में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। उनकी सफलता के बाद खेल जगत और राज्यभर में खुशी की लहर दौड़ गई। कई खिलाड़ियों और खेल संगठनों ने उन्हें बधाई दी।

14 किलो वजन घटाकर हासिल की बड़ी उपलब्धि

दिव्यांशी की सफलता केवल तकनीकी प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि उनके अनुशासन और समर्पण की भी मिसाल है। चयन ट्रायल की शुरुआत के समय उनका वजन लगभग 74 किलोग्राम था, जबकि प्रतियोगिता में केवल 52 और 60 किलोग्राम भार वर्ग शामिल थे। ऐसे में उन्हें अपने वजन को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती थी।

कोच अशोक गौतम के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़ी मेहनत की और लगभग 14 किलोग्राम वजन कम किया। इसके लिए उन्होंने विशेष फिटनेस कार्यक्रम, संतुलित आहार और नियमित प्रशिक्षण का पालन किया। खेल विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में वजन कम करने के बाद भी प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन दिव्यांशी ने यह चुनौती सफलतापूर्वक पूरी की।

खेल परिवार से मिला प्रेरणा का माहौल

दिव्यांशी की सफलता में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी मां शशि प्रभा राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और वर्तमान में कोटा एसपी कार्यालय में कार्यरत हैं।

वहीं उनके पिता सुनील कुमार भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। अनुशासन और देश सेवा की भावना उन्हें परिवार से ही विरासत में मिली है। उनका छोटा भाई कुणाल चौधरी भी खेलों से जुड़ा हुआ है और जूनियर स्तर पर बॉक्सिंग तथा वुशु में हिस्सा लेता है। परिवार का खेलों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिव्यांशी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

चीन में होने वाली प्रतियोगिता पर टिकी नजरें

एशियन गेम्स की तैयारियों के तहत चीन के हुबेई प्रांत में 23 से 30 जून तक आयोजित होने वाली शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन वुशु चैंपियनशिप भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए अपनी तैयारियों को परखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने का बड़ा अवसर होगी। भारतीय टीम को उम्मीद है कि दिव्यांशी वहां भी प्रभावशाली प्रदर्शन करेंगी और एशियन गेम्स से पहले अपनी तैयारियों को और मजबूत बनाएंगी।

राजस्थान के लिए प्रेरणा बनी दिव्यांशी

दिव्यांशी का एशियन गेम्स के लिए चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि राजस्थान के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनकी सफलता उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

कोटा की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। अब पूरे देश की नजरें एशियन गेम्स 2026 पर होंगी, जहां दिव्यांशी भारतीय तिरंगे के साथ राजस्थान की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती नजर आएंगी।

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