असम के कछार में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 28 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं जब्त; तीन गिरफ्तार

असम के कछार जिले में पुलिस और असम राइफल्स ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 28 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की। 1.1 लाख याबा टैबलेट और हेरोइन के साथ तीन आरोपी पकड़े गए।

असम के कछार जिले में पुलिस और असम राइफल्स की संयुक्त कार्रवाई में करीब 28 करोड़ रुपये मूल्य की नशीली दवाएं जब्त की गईं। अभियान के दौरान 1.1 लाख याबा टैबलेट और 223 ग्राम हेरोइन बरामद कर तीन संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया।

गुवाहाटी: असम में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। कछार जिले में असम पुलिस और असम राइफल्स की संयुक्त कार्रवाई में करीब 28 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स जब्त की गई हैं। इस अभियान के दौरान तीन संदिग्ध ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य में चलाए जा रहे व्यापक नशा विरोधी अभियान का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से राज्य में सक्रिय ड्रग नेटवर्क और तस्करी से जुड़े लोगों के खिलाफ अभियान चला रही हैं।

भारी मात्रा में याबा टैबलेट और हेरोइन बरामद

संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले पदार्थ बरामद किए। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई में लगभग 1.1 लाख याबा टैबलेट और 223 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। याबा टैबलेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग माना जाता है, जिसमें आमतौर पर मेथामफेटामाइन और अन्य रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं। इसके अवैध इस्तेमाल और तस्करी को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। बरामद की गई खेप की अनुमानित कीमत करीब 28 करोड़ रुपये बताई गई है, जो हाल के समय में राज्य में हुई बड़ी ड्रग बरामदगी में से एक मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दी जानकारी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए सुरक्षा एजेंसियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चला रही है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि असम में ड्रग माफिया के खिलाफ कानून का पूरा प्रभाव लागू किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार युवाओं को नशे से बचाने और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

ड्रग नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश

असम पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां पड़ोसी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण नशीले पदार्थों की तस्करी की चुनौती बनी रहती है। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि संगठित तस्करी नेटवर्क को रोकने के लिए लगातार खुफिया निगरानी और संयुक्त अभियान जरूरी हैं।

हाल के वर्षों में असम पुलिस ने कई बड़े ऑपरेशन चलाकर भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त की हैं। इन अभियानों का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों को पकड़ना नहीं बल्कि इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क को कमजोर करना है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद ड्रग्स कहां से लाई गई थीं और इसे किन इलाकों में पहुंचाने की योजना थी।

इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों के संभावित संपर्कों, तस्करी के रास्तों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

नशे के खिलाफ असम सरकार की रणनीति

असम सरकार पिछले कुछ समय से ड्रग्स के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का कहना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा भी है।

राज्य प्रशासन पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर नशे के कारोबार को रोकने के लिए काम कर रहा है। इसके तहत ड्रग सप्लाई चेन को तोड़ने, तस्करों की पहचान करने और अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में बढ़ी निगरानी

पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा एजेंसियां ड्रग तस्करी के खिलाफ विशेष सतर्कता बरत रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि अवैध पदार्थों की आवाजाही को रोका जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रग तस्करी रोकने के लिए केवल जब्ती और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग भी जरूरी है। इससे तस्करी के बड़े नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिल सकती है।

युवाओं को नशे से बचाने पर जोर

अधिकारियों का कहना है कि ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए कानून के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं। युवाओं में नशे के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाने और पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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