रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्षी विधायक मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचे और JPSC तथा JSSC CGL समेत राज्य में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच CBI से कराने की मांग की। विपक्ष ने सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को ‘न्याय चाहिए, धोखा नहीं।’
विपक्षी विधायकों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां भी दिखाई दीं। इन पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और युवाओं को न्याय देने की मांग लिखी गई थी। मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचने के कदम को विपक्ष ने कथित परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया।
विपक्ष का कहना है कि झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक मेहनत की है। ऐसे में यदि किसी परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं या पेपर लीक, नकल अथवा अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं तो अभ्यर्थियों के भरोसे को नुकसान पहुंचता है। विपक्ष ने कहा कि ऐसी स्थिति में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने JPSC और JSSC CGL की परीक्षाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर अभ्यर्थियों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसलिए केवल विभागीय जांच के बजाय CBI जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।
विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। उनका कहना था कि राज्य के युवाओं ने नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत की है और उन्हें परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा चाहिए। यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी है।
विपक्ष ने सरकार से मांग की कि JPSC और JSSC CGL के अलावा जिन प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, उनकी भी जांच कराई जाए। नेताओं का कहना है कि किसी एक परीक्षा तक जांच सीमित रखने से युवाओं के मन में उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होगा।
मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचने का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना। विपक्ष ने इसे युवाओं के मुद्दे को सदन तक पहुंचाने का तरीका बताया। विधायकों ने कहा कि सरकार को अभ्यर्थियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
विपक्षी नेताओं के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी परीक्षा में अनियमितता की शिकायत आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी स्तर पर क्यों न हों।
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में पहले से ही काफी दबाव रहता है। लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए किसी भी तरह की गड़बड़ी गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है। कई अभ्यर्थी उम्र सीमा और भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक चलने की वजह से भी परेशान रहते हैं।
विपक्ष ने कहा कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। नेताओं ने ‘न्याय चाहिए, धोखा नहीं’ का नारा लगाते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को उनके अधिकार और मेहनत का सम्मान मिलना चाहिए।
विधानसभा परिसर में प्रदर्शन के दौरान विपक्षी विधायकों ने सरकार से CBI जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि स्वतंत्र जांच से ही यह पता चल सकेगा कि परीक्षा प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है या नहीं। यदि आरोप गलत हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा जा सकता है। सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं है और लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
इस मुद्दे पर विधानसभा सत्र के दौरान हंगामे की स्थिति भी बन सकती है। विपक्ष इसे युवाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहा है। नेताओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना केवल किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे राज्य के युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
विपक्ष ने यह भी कहा कि परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या हजारों में होती है। ऐसे में किसी भी शिकायत की जांच जल्द और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। जांच में देरी होने से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ती है और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल लंबे समय तक बने रहते हैं।
JPSC और JSSC राज्य में सरकारी नियुक्तियों के लिए महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से होने वाली परीक्षाओं पर लाखों युवाओं की उम्मीदें टिकी रहती हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
विपक्ष का कहना है कि यदि सरकार को अपनी परीक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा है तो उसे CBI जांच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। नेताओं ने कहा कि स्वतंत्र जांच के बाद यदि व्यवस्था में कोई कमी नहीं मिलती है तो सरकार भी अपना पक्ष मजबूती से रख सकेगी।
मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचने वाले विपक्षी नेताओं ने अपने प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की कि परीक्षा गड़बड़ी का मुद्दा सदन में लगातार उठाया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक अभ्यर्थियों को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
विपक्ष की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई प्रमुख है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को उचित राहत देने की मांग भी उठाई जा रही है।
विधानसभा में विरोध के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाएगा, जबकि सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब दिया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार CBI जांच की मांग को लेकर क्या रुख अपनाती है।
फिलहाल मास्क पहनकर विधानसभा पहुंचे विपक्षी विधायकों का प्रदर्शन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर गया है। JPSC और JSSC CGL समेत परीक्षाओं की CBI जांच की मांग के साथ विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह युवाओं के मुद्दे को विधानसभा में मजबूती से उठाता रहेगा।











