इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बिना बड़े प्रमोशन और सीमित झलक दिखाए भी फिल्म ने एडवांस बुकिंग में शानदार प्रदर्शन किया है।
- Movie Review: आवारापन 2
- कलाकार: इमरान हाशमी , दिशा पाटनी , शबाना आजमी , श्रिया सरन , पूरन गब्बी और सुविंदर विक्की
- लेखक: विशेष भट्ट , बिलाल सिद्दीकी और नितिन कक्कड़
- निर्देशक: नितिन कक्कड़
- निर्माता: विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट
- रिलीज डेट: 14 अगस्त 2026
- रेटिंग: 2/5
Awarapan 2: साल 2007 में रिलीज हुई इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन’ ने अपनी कहानी, संगीत और भावनात्मक गहराई के दम पर दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई थी। समय के साथ फिल्म को कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला। करीब 19 साल बाद इसका सीक्वल ‘आवारापन 2’ सिनेमाघरों में पहुंचा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह फिल्म पहले भाग की विरासत को आगे बढ़ा पाती है या सिर्फ पुराने नाम और लोकप्रियता का सहारा लेती है?
फिल्म को लेकर दर्शकों में रिलीज से पहले काफी उत्सुकता थी। इमरान हाशमी की वापसी और ‘आवारापन’ ब्रांड के कारण एडवांस बुकिंग को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लेकिन फिल्म देखने के बाद सबसे बड़ी निराशा इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले से होती है।
कहानी में क्या है?
‘आवारापन 2’ की कहानी शिवम पंडित के किरदार से आगे बढ़ती है, जिसे इमरान हाशमी ने निभाया है। पिछली घटनाओं के बाद शिवम भारत लौटकर गुमनामी में जिंदगी जी रहा है। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक बच्ची से होती है, जिसका नाम वह आलिया रखता है। कुछ समय बाद आलिया को एक दंपति गोद ले लेता है, लेकिन कहानी तब गंभीर मोड़ लेती है जब पता चलता है कि यह परिवार मानव तस्करी से जुड़े एक गिरोह का हिस्सा है। आलिया के लापता होने के बाद शिवम उसे बचाने के लिए बैंकॉक पहुंचता है।
वहां वह जोरावर नाम के गैंगस्टर के गिरोह में शामिल हो जाता है। जोरावर की दुश्मनी नफीसा से है। इसी अपराध की दुनिया के बीच शिवम की मुलाकात जोरावर की बहन जारा से होती है और दोनों के बीच भावनात्मक रिश्ता विकसित होता है। अब शिवम आलिया को खोजकर उसे सुरक्षित बचा पाता है या नहीं, यही कहानी का मुख्य आधार है।
इमरान हाशमी के अभिनय में नहीं दिखा पुराना जादू
फिल्म की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इमरान हाशमी के कंधों पर है। वह शुरुआत में अपने किरदार को संभालते नजर आते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका किरदार कमजोर पड़ने लगता है। पहली ‘आवारापन’ में शिवम का दर्द, गुस्सा और भावनात्मक संघर्ष कहानी का मजबूत हिस्सा था। सीक्वल में वही प्रभाव पैदा नहीं हो पाता।
इंटरवल के बाद उनका किरदार ज्यादातर मार खाने और मुश्किलों में फंसने तक सीमित दिखाई देता है। इमरान कुछ दृश्यों में प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन उनका पुराना चार्म लगातार नजर नहीं आता। उनके प्रशंसकों को पहले भाग वाला शिवम जरूर याद आएगा।
दिशा पाटनी और शबाना आजमी को कम मिला स्पेस
दिशा पाटनी ने जारा का किरदार निभाया है। उनका रोल कहानी में महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें बहुत ज्यादा संवाद या मजबूत दृश्य नहीं मिलते। ऐसे में उनकी मौजूदगी सीमित महसूस होती है। शबाना आजमी जैसी अनुभवी अभिनेत्री को भी फिल्म में पर्याप्त स्क्रीन टाइम नहीं मिला। उनके किरदार को शुरुआत में बेहद प्रभावशाली अंदाज में पेश किया जाता है, लेकिन बाद में वह उम्मीद के मुताबिक असर नहीं छोड़ पाता।
वहीं जोरावर के रूप में पूरन गब्बी ने खलनायक का किरदार निभाया है। उनका किरदार आक्रामक और सनकी दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन वह दर्शकों में वास्तविक डर पैदा करने में सफल नहीं होता।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले सबसे कमजोर कड़ी

‘आवारापन 2’ की सबसे बड़ी समस्या इसकी पटकथा है। फिल्म में कई घटनाएं होती हैं, लेकिन उनके पीछे कोई मजबूत भावनात्मक उद्देश्य नजर नहीं आता।निर्देशक नितिन कक्कड़ पुराने भाग की यादों और संदर्भों को दोहराने पर ज्यादा निर्भर दिखाई देते हैं। पुराने किरदारों और कैमियो की मौजूदगी से दर्शकों को पहली फिल्म की याद तो आती है, लेकिन इससे नई कहानी मजबूत नहीं बनती।
पहले भाग में कहानी धीरे-धीरे किरदारों की भावनाओं को स्थापित करती थी। सीक्वल में घटनाएं आगे बढ़ती रहती हैं, लेकिन दर्शक उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं पाते। गाने और इमोशनल दृश्यों की अधिकता भी कहानी की गति को प्रभावित करती है।
क्लाइमैक्स भी नहीं छोड़ता खास प्रभाव
फिल्म का दूसरा भाग भी उम्मीद के मुताबिक रोमांच पैदा नहीं करता। कहानी में एक्शन और संघर्ष जरूर है, लेकिन कई घटनाएं अविश्वसनीय और बचकानी लगती हैं। सबसे ज्यादा निराशा क्लाइमैक्स से होती है। जिस तरह के दमदार टकराव की उम्मीद की जाती है, फिल्म उसका प्रभाव पैदा नहीं कर पाती। ऐसे में दर्शकों को पहली फिल्म के मजबूत ट्रीटमेंट और खलनायकों की कमी महसूस हो सकती है।
‘आवारापन’ की सबसे बड़ी ताकत उसका संगीत था। सीक्वल में पुराने संगीत और शब्दों की झलक सुनकर पुराने प्रशंसकों को जरूर नॉस्टैल्जिया महसूस होता है। हालांकि, नए गानों में वह प्रभाव नहीं दिखाई देता। ‘वे जुनून’ अपेक्षाकृत बेहतर लगता है, लेकिन बाकी गाने लंबे समय तक याद रहने वाला प्रभाव नहीं छोड़ते।
Awarapan 2 देखें या नहीं?
अगर आप इमरान हाशमी के कट्टर प्रशंसक हैं या पहली ‘आवारापन’ से आपका खास जुड़ाव है, तो फिल्म को एक बार देखने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन अगर आप पहली फिल्म जैसी कहानी, भावनात्मक गहराई और दमदार संगीत की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो निराशा हो सकती है।












