MP में Highrise निर्माण होगा आसान, नए भूमि विकास नियमों में FAR 4 और 60 मीटर ऊंचाई का प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में नए भूमि विकास नियमों के तहत FAR 4 और 60 मीटर तक ऊंचाई का प्रस्ताव है। इससे हाईराइज निर्माण और शहरी जमीन का उपयोग आसान होगा।

मध्य प्रदेश सरकार 2012 के भूमि विकास नियमों की जगह नए नियम लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों से हाईराइज निर्माण आसान होगा, FAR बढ़ेगा और शहरी जमीन के अधिक प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

भोपाल: मध्य प्रदेश में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को आसान बनाने के लिए सरकार भूमि विकास नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित ‘भूमि विकास नियम 2026’ में इमारतों की ऊंचाई सीमा बढ़ाने, FAR को 4 करने और प्लॉट पर निर्माण की क्षमता बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। नए नियम लागू होने के बाद बड़े शहरों में 15 से 20 मंजिल तक की इमारतों का निर्माण आसान हो सकता है।

14 साल पुराने नियमों की जगह आएंगे नए प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में शहरी विकास और बहुमंजिला निर्माण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2012 से लागू भूमि विकास नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए करीब 200 पन्नों का नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसे उच्चस्तरीय बैठक के बाद अंतिम रूप दिया जा सकता है।

प्रस्तावित ‘भूमि विकास नियम 2026’ में भवन निर्माण की ऊंचाई, प्लॉट पर निर्माण की सीमा, फ्लोर एरिया रेशो और पर्यावरण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए जाने हैं। सरकार का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में सीमित जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना और निर्माण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है।

नए नियम लागू होने के बाद प्रदेश के बड़े शहरों में हाईराइज इमारतों के निर्माण की राह आसान होने की उम्मीद है। इससे 15 से 20 मंजिल तक के प्रोजेक्ट को पहले की तुलना में कम जटिल अनुमति प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

30 मीटर से बढ़कर 45 से 60 मीटर होगी ऊंचाई सीमा

मौजूदा व्यवस्था के तहत 30 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों के निर्माण के लिए विशेष अनुमति की जरूरत पड़ती है। प्रस्तावित नियमों में इस सीमा को बढ़ाकर 45 से 60 मीटर करने की तैयारी है।

इस बदलाव का सीधा असर बहुमंजिला इमारतों के निर्माण पर पड़ेगा। 15 से 20 मंजिल तक की इमारतों के लिए अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता कई मामलों में कम हो सकती है। हालांकि, किसी क्षेत्र में वास्तविक निर्माण ऊंचाई कितनी होगी, यह संबंधित शहर के मास्टर प्लान और अन्य तकनीकी प्रावधानों के आधार पर तय होगी।

FAR 3 से बढ़कर 4 करने का प्रस्ताव

नए भूमि विकास नियमों में प्लॉट पर निर्माण की क्षमता बढ़ाने के लिए अधिकतम FAR यानी Floor Area Ratio को 3 से बढ़ाकर 4 करने का प्रस्ताव है। इसके तहत बेस FAR और प्रीमियम FAR की व्यवस्था रखी जाएगी।

प्रस्ताव के अनुसार दो FAR बेस के रूप में उपलब्ध होगा, जबकि अतिरिक्त दो FAR प्रीमियम के रूप में लिया जा सकेगा। इसके लिए बिल्डर या भू-स्वामी को कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर बिल्ट-अप एरिया के अनुसार शुल्क देना होगा।

इससे एक ही प्लॉट पर पहले की तुलना में अधिक निर्मित क्षेत्र उपलब्ध हो सकेगा। खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां जमीन सीमित है, वहां यह व्यवस्था निर्माण क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ओपन स्पेस के बाद बची जमीन के इस्तेमाल की छूट

प्रस्तावित नियमों में Marginal Open Space यानी MOS के प्रावधानों में भी बदलाव किया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में खुले स्थान के लिए निर्धारित क्षेत्र छोड़ने के बाद प्लॉट के बचे हिस्से पर निर्माण को लेकर अलग-अलग सीमाएं लागू होती हैं।

नए प्रावधानों में अनिवार्य ओपन स्पेस छोड़ने के बाद बची जमीन का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने की अनुमति देने की तैयारी है। इससे आवासीय, व्यावसायिक और अन्य प्रकार के प्रोजेक्ट में उपलब्ध जमीन का उपयोग बढ़ सकता है।

Flat FAR की व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर

नए नियमों में ‘Flat FAR’ से जुड़ी व्यवस्था को भी अधिक स्पष्ट करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में लिफ्ट, कॉरिडोर और कॉमन एरिया जैसी जगहों के आधार पर अतिरिक्त निर्माण छूट मिलने की गुंजाइश रहती है।

नई व्यवस्था में Ground Coverage के आधार पर FAR की गणना को निर्धारित करने का प्रस्ताव है। एक बार गणना तय होने के बाद उसमें बदलाव की गुंजाइश सीमित रहेगी। इससे निर्माण क्षेत्र की गणना और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

Green TDR और TOD को मिलेगा बढ़ावा

नए भूमि विकास नियमों में पर्यावरण संरक्षण को भी शहरी विकास से जोड़ने की तैयारी है। Green TDR के तहत पर्यावरण या जलस्रोतों को संरक्षित रखने वाले भूखंड मालिकों को अतिरिक्त FAR का लाभ देने का प्रस्ताव है।

इसके साथ ही Transit Oriented Development यानी TOD को भी बढ़ावा देने की योजना है। मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास सघन और Mixed-Use Development के लिए अतिरिक्त FAR की सुविधा दी जा सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास को बढ़ावा देना और लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना है।

मास्टर प्लान के आधार पर तय होगा निर्माण

नए नियम पूरे प्रदेश में एक समान ऊंचाई या निर्माण की अनुमति नहीं देंगे। किसी शहर के किस हिस्से में कितनी ऊंची इमारत बन सकती है, किस क्षेत्र में Mixed Land Use की अनुमति होगी और निर्माण की अन्य शर्तें क्या होंगी, यह संबंधित शहर के Master Plan के आधार पर तय किया जाएगा।

सरकार नए नियमों में पुराने प्रावधानों को सरल और स्पष्ट करने पर भी जोर दे रही है। करीब 110 सेक्शन को नए स्वरूप में तैयार किए जाने की जानकारी है।

यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में हाईराइज निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ सीमित शहरी जमीन के अधिक प्रभावी इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी। साथ ही पर्यावरण और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े प्रावधानों के जरिए शहरी विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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