अयोध्या NH-27 पर 2 हजार से ज्यादा गड्ढे, हर 500 मीटर पर टूटी सड़क; बाइक सवारों के लिए बढ़ा हादसों का खतरा

अयोध्या-लखनऊ NH-27 पर 2 हजार से ज्यादा गड्ढों से सफर मुश्किल है। हर 500 मीटर में सड़क टूटी है, बाइक सवारों के गिरने का खतरा बढ़ा।
अयोध्या NH-27 पर 2 हजार से ज्यादा गड्ढे, हर 500 मीटर पर टूटी सड़क; बाइक सवारों के लिए बढ़ा हादसों का खतरा
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अयोध्या से लखनऊ के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए अयोध्या-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की बदहाल स्थिति परेशानी का बड़ा कारण बन गई है। हाईवे पर जगह-जगह बने गड्ढों और टूटी सड़क के कारण वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गुजरना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे मार्ग पर दो हजार से ज्यादा गड्ढे होने का दावा किया गया है। स्थिति यह है कि करीब हर 500 मीटर के अंतराल पर सड़क का कोई न कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई देता है। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है, क्योंकि अचानक सामने आने वाले गड्ढों से बाइक का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है।

बारिश के बाद हाईवे की स्थिति और खराब होने की बात सामने आई है। सड़क पर मौजूद छोटे-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। तेज रफ्तार से आने वाले वाहन जब अचानक पानी भरे गड्ढे में पहुंचते हैं तो चालक को संभलने का मौका कम मिलता है। खासकर बाइक और स्कूटी सवारों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिम वाली हो जाती है। अयोध्या में बारिश के बाद कई अन्य सड़कों पर भी गड्ढों और जलभराव की समस्या सामने आई है।

अयोध्या-लखनऊ मार्ग उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त सड़क मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से रोजाना बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें, ट्रक, छोटे मालवाहक वाहन और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। अयोध्या में धार्मिक पर्यटन बढ़ने के कारण भी इस मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में सड़क पर लगातार बने गड्ढों से सामान्य यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि हाईवे पर कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है। कुछ स्थानों पर छोटे गड्ढे धीरे-धीरे बड़े होते जा रहे हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भरने के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। दिन के समय वाहन चालक किसी तरह सड़क की स्थिति देखकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय गड्ढों का अनुमान लगाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। सामने से आने वाली गाड़ियों की तेज रोशनी के बीच सड़क पर बने गड्ढे कई बार दिखाई नहीं देते।

दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ी समस्या अचानक सामने आने वाले गड्ढे हैं। कार या बड़े वाहन का चालक किसी गड्ढे से वाहन निकाल भी ले तो बाइक सवार के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। यदि बाइक का पहिया गहरे गड्ढे में चला जाए तो चालक के गिरने की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर इस मार्ग की मरम्मत जल्द कराने की मांग उठ रही है।

सड़क की खराब स्थिति का असर केवल दुर्घटना के खतरे तक सीमित नहीं है। गड्ढों के कारण वाहनों की गति भी प्रभावित होती है। चालक सड़क के खराब हिस्से से बचने के लिए अचानक ब्रेक लगाते हैं या वाहन को दूसरी लेन की तरफ मोड़ते हैं। व्यस्त हाईवे पर इस तरह अचानक लेन बदलने से पीछे और आसपास चल रहे वाहनों के साथ टक्कर का खतरा बढ़ सकता है।

भारी वाहनों के लगातार गुजरने से भी सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर दबाव बढ़ता है। जहां पहले से सड़क कमजोर हो चुकी है, वहां बारिश का पानी पहुंचने के बाद उसकी सतह और जल्दी टूट सकती है। यदि समय रहते गड्ढों की मरम्मत नहीं की जाती है तो छोटे गड्ढे बड़े गड्ढों में बदल सकते हैं। इससे सड़क की हालत लगातार खराब होती जाती है और बाद में मरम्मत के लिए अधिक बड़े काम की जरूरत पड़ सकती है।

अयोध्या में हाल के दिनों में बारिश के बाद शहर की कई सड़कों पर गड्ढों की समस्या सामने आई है। एक रिपोर्ट में करीब 150 बदहाल सड़कों का उल्लेख किया गया था, जहां जगह-जगह सड़क उखड़ने और गड्ढे बनने से यातायात प्रभावित हुआ। देवकाली से धनीराम पुरवा होते हुए हाईवे को जोड़ने वाले मार्ग और अन्य सड़कों पर भी बारिश के बाद पानी भरने तथा गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होने की जानकारी सामने आई थी।

लखनऊ की तरफ भी बारिश के बाद सड़कों की हालत को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में लखनऊ के कई इलाकों में सड़क धंसने और गड्ढे बनने की खबरें सामने आईं। अयोध्या रोड पर इस्माइलगंज सर्विस लेन का हिस्सा भी धंस गया था। स्थानीय स्तर पर शिकायत में सड़क के बार-बार बैठने और एक गड्ढा ठीक होने के बाद दूसरे गड्ढे बनने की बात कही गई।

इस पूरे मार्ग पर सड़क की स्थिति को लेकर सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों में है जिन्हें रोजाना अयोध्या और लखनऊ के बीच आना-जाना पड़ता है। नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए रोज यात्रा करने वाले लोगों को खराब सड़क के कारण अधिक समय लग रहा है। वाहन चालकों को गड्ढों से बचने के लिए गति कम करनी पड़ती है, जिससे कई जगह यातायात की रफ्तार भी प्रभावित होती है।

अयोध्या जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग लखनऊ की तरफ से अयोध्या पहुंचते हैं। निजी कारों के साथ बड़ी संख्या में बसें और अन्य यात्री वाहन इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में हाईवे की खराब स्थिति का असर स्थानीय यात्रियों के साथ बाहर से आने वाले लोगों पर भी पड़ता है।

सड़क पर बने गड्ढों के कारण वाहनों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। गहरे गड्ढे में पहिया जाने पर टायर, रिम और सस्पेंशन को नुकसान हो सकता है। बाइक में पहिया या अन्य हिस्से क्षतिग्रस्त होने के अलावा चालक के गिरने का खतरा रहता है। कार चालकों को भी अचानक ब्रेक लगाने या गड्ढे से बचने के दौरान वाहन को नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है।

रात में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। हाईवे पर तेज रफ्तार से वाहन चलते हैं और कई जगह सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण गड्ढे देर से दिखाई देते हैं। बारिश के दौरान पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे के बीच का अंतर भी समझना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में वाहन चालक अनुमान के आधार पर आगे बढ़ते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

बाराबंकी में हाल ही में लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर एक अलग सड़क दुर्घटना में बाइक सवार तीन युवकों में से दो की मौत और एक के गंभीर घायल होने की खबर भी सामने आई थी। उस मामले में पुलिस ने बताया था कि बाइक को पहले एक कार ने टक्कर मारी और उसके बाद दूसरे वाहन से कुचलने की स्थिति बनी। हालांकि उस दुर्घटना का कारण सड़क के गड्ढे बताए जाने की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उसे इस सड़क की खराब स्थिति से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।

NH-27 की खराब स्थिति के बीच सड़क की नियमित मरम्मत और रखरखाव की जरूरत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सड़क की सतह पर बने छोटे गड्ढों की समय रहते मरम्मत की जाए तो उन्हें बड़ा होने से रोका जा सकता है। इसके साथ ही बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था भी जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक सड़क पर पानी जमा रहने से सड़क की ऊपरी परत कमजोर हो सकती है।

किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव का सीधा संबंध यातायात की सुरक्षा से होता है। खासकर ऐसे मार्ग पर जहां भारी वाहनों और यात्री वाहनों की संख्या अधिक हो, वहां क्षतिग्रस्त हिस्सों को जल्द चिन्हित करके उनकी मरम्मत करना जरूरी होता है। गड्ढों के साथ-साथ सड़क के किनारे, सर्विस लेन, जल निकासी और संकेतक व्यवस्था की भी नियमित जांच की जरूरत होती है।

अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से 2026 में NH-27 से जुड़े एक अप्रोच रोड और ड्रेन निर्माण का टेंडर भी जारी किया गया था। इससे यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में मुख्य मार्ग से जुड़े संपर्क मार्ग और जल निकासी से संबंधित निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। हालांकि यह टेंडर पूरे NH-27 पर बताए जा रहे गड्ढों की मरम्मत का प्रमाण नहीं है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क की स्थिति का विस्तृत सर्वे कराया जाए और जहां-जहां गड्ढे हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जाए। केवल गड्ढों में अस्थायी सामग्री भरने के बजाय सड़क की मजबूती और पानी की निकासी की समस्या को भी देखा जाए, ताकि कुछ समय बाद उसी जगह फिर से गड्ढे न बनें।

वाहन चालकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी सावधानी यही है कि इस मार्ग पर विशेषकर बारिश और रात के समय गति नियंत्रित रखी जाए। गड्ढों से बचने के लिए अचानक दूसरी लेन में जाने से भी बचना जरूरी है, क्योंकि हाईवे पर पीछे से तेज गति में आ रहे वाहन के कारण टक्कर का खतरा हो सकता है। दोपहिया वाहन चालक हेलमेट का इस्तेमाल करें और पानी भरे हिस्सों में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

अयोध्या-लखनऊ NH-27 पर दो हजार से अधिक गड्ढों का दावा सामने आने के बाद अब लोगों की नजर सड़क की मरम्मत पर है। हर कुछ दूरी पर टूटती सड़क और बारिश के बाद गड्ढों में जमा पानी ने यात्रा को मुश्किल बना दिया है। खासकर बाइक सवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो बारिश और भारी यातायात के बीच सड़क की स्थिति और खराब होने की आशंका रहेगी।

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