भारत में म्युचुअल फंड में रिटेल निवेशक तेजी से बढ़ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और लॉन्ग टर्म निवेश के चलते AUM अगले दो दशकों में 300 लाख करोड़ रुपये पार कर सकता है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बाजार मजबूत होगा।
Mutual Funds: भारत में म्युचुअल फंड में रिटेल निवेशक तेजी से शामिल हो रहे हैं। Bain & Company और Groww की रिपोर्ट के अनुसार, म्युचुअल फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2035 तक 300 लाख करोड़ रुपये पार कर सकता है। डायरेक्ट इक्विटी होल्डिंग्स भी इसी अवधि में 250 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती हैं। यह बढ़ोतरी डिजिटल अपनाने और रिटेल निवेशकों के बढ़ते भरोसे से संभव होगी।
लॉन्ग टर्म निवेश का नजरिया मजबूत
रिपोर्ट में बताया गया है कि पांच वर्ष से अधिक अवधि वाले म्युचुअल फंड होल्डिंग 7% से बढ़कर 16% हो गई है। वहीं, लंबी अवधि वाले SIP होल्डिंग 12% से बढ़कर 21% हो गई हैं। यह दिखाता है कि निवेशक अब शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के बजाय लॉन्ग टर्म निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जेन-जी और मिलेनियल्स का दबदबा
लगभग 9 करोड़ नए खुदरा निवेशक जेन-जी और मिलेनियल्स से आएंगे। ये युवा डिजिटल अपनाने में तेज और वित्तीय साक्षरता में अधिक सक्षम हैं। बैन इंडिया के सौरभ त्रेहन के अनुसार, भारतीय परिवार अब पारंपरिक बचत से अधिक निवेश-ओरिएंटेड दृष्टिकोण अपना रहे हैं। नए निवेशक खासकर टॉप 30 शहरों के बाहर और छोटे शहरों से मार्केट-लिंक्ड उत्पादों को अपना रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से निवेश को बूस्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने रिटेल निवेशक व्यवहार को बदल दिया है। लगभग 80% इक्विटी निवेशक और 35% म्युचुअल फंड निवेशक डिजिटल रूप से ऑनबोर्ड हुए हैं। टियर-2+ शहर डिजिटल निवेश का करीब आधा योगदान दे रहे हैं। Groww के हर्ष जैन के अनुसार, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और नियामकीय सुधार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और नए, विविध निवेशक बेस को जन्म दिया है।
रिटेल निवेश भारत की आर्थिक वृद्धि में अहम
रिटेल निवेश भारत की 10 लाख करोड़ डॉलर अर्थव्यवस्था की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। इससे फाइनैंशल इकोसिस्टम और कैपिटल तक पहुंचने वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में 7 लाख से अधिक नई नौकरियां बन सकती हैं। FY19 में SME से IPO के जरिए जुटाई गई राशि 1,800 करोड़ रुपये थी, जो FY24 में 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
अगले दो दशकों में AUM में तेजी की उम्मीद
रिपोर्ट में अनुमान है कि 2047 तक प्रति व्यक्ति GDP को छह गुना बढ़ाने के लक्ष्य के लिए रिटेल निवेश बढ़ना जरूरी है। अगले दो दशकों में रिटेल म्युचुअल फंड AUM भी छह गुना बढ़ सकते हैं और GDP में इसका हिस्सा 80% से अधिक हो सकता है।










