बाली रन क्लब विवाद: इंडोनेशियाई लोगों से कथित भेदभाव ने फिर छेड़ी नस्लवाद और रंगभेद पर बहस

बीजिंग: बाली के एक रन क्लब पर इंडोनेशियाई नागरिकों से भेदभाव के आरोप लगे हैं। विवाद के बाद क्लब की गतिविधियां निलंबित हुईं और नस्लीय भेदभाव पर नई बहस छिड़ गई।

बाली के एंटूराज रन क्लब पर इंडोनेशियाई नागरिकों के साथ कथित भेदभाव के आरोप लगे हैं। विवाद के बाद क्लब की गतिविधियां निलंबित कर दी गईं, जबकि प्रशासन ने जांच शुरू कर दी और नस्लवाद पर नई बहस छिड़ गई।

जकार्ता: इंडोनेशिया के लोकप्रिय पर्यटन द्वीप बाली में एक रनिंग क्लब पर स्थानीय लोगों के साथ कथित भेदभाव के आरोप लगने के बाद विवाद गहरा गया है। इस घटना ने न केवल क्लब की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाली में लंबे समय से उठते रहे नस्लवाद (Racism) और रंगभेद (Colourism) के मुद्दे को भी फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब बाली में रहने वाले कई इंडोनेशियाई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनकी सदस्यता के आवेदन अस्वीकार कर दिए गए, जबकि विदेशी नागरिकों को आसानी से क्लब में शामिल होने की अनुमति मिल गई। इस मामले ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की और प्रशासन तक मामला पहुंच गया।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

कांग्गू (Canggu) स्थित रनिंग क्लब 'एंटूराज' (Entourage) ने मई और जून के दौरान सुबह आयोजित होने वाली 'साइलेंट डिस्को रन' गतिविधियों के जरिए लोकप्रियता हासिल की थी। लेकिन जुलाई में कई इंडोनेशियाई नागरिकों ने दावा किया कि क्लब ने उनके आवेदन केवल उनकी राष्ट्रीयता या फोन नंबर के आधार पर अस्वीकार कर दिए।

एक वायरल पोस्ट में एक इंडोनेशियाई महिला ने बताया कि जब उसने आवेदन में अपनी राष्ट्रीयता इंडोनेशियाई लिखी तो उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया, जबकि उसके जर्मन बॉयफ्रेंड का आवेदन तुरंत स्वीकार कर लिया गया। महिला ने यह भी दावा किया कि कुछ इंडोनेशियाई प्रतिभागियों को केवल इसलिए आमंत्रण मिला क्योंकि उनके मोबाइल नंबर इंडोनेशिया के +62 कोड से शुरू नहीं होते थे। उनके अनुसार, किसी विशेष राष्ट्रीयता या समुदाय को बाहर रखना सीधे तौर पर भेदभाव का उदाहरण है।

व्हाट्सएप ग्रुप तक नहीं मिली पहुंच

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि दो बार आवेदन खारिज होने के बाद उसे सदस्यता तो मिल गई, लेकिन उसे क्लब के व्हाट्सएप समूहों में शामिल नहीं किया गया। उसने आरोप लगाया कि इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया। इन आरोपों ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी और कई लोगों ने इसे स्थानीय नागरिकों के साथ अनुचित व्यवहार करार दिया।

प्रशासन ने लिया संज्ञान

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब बाली की सीनेटर नी लुह जलेलांतिक ने इस विवाद को सार्वजनिक रूप से उठाया और आव्रजन विभाग से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि बाली दुनिया भर के पर्यटकों का स्वागत करता है, लेकिन स्थानीय लोगों के साथ भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करते हुए स्थानीय निवासियों को बाहर रखना बाली की संस्कृति और मेहमाननवाजी की भावना के खिलाफ है।

क्लब ने मानी तकनीकी गलती

विवाद बढ़ने के बाद एंटूराज रनिंग क्लब ने अपनी सभी गतिविधियां अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। क्लब ने आरोपों से पूरी तरह इनकार करते हुए कहा कि उसके जून में आयोजित अंतिम रनिंग कार्यक्रम में सबसे अधिक प्रतिभागी स्वयं इंडोनेशियाई नागरिक थे। क्लब के अनुसार, व्हाट्सएप समूहों और कुछ अन्य आयोजनों में शामिल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही स्वचालित प्रणाली (ऑटोमेटेड अप्रूवल सिस्टम) में तकनीकी त्रुटि थी, जिसके कारण कुछ +62 नंबर वाले लोगों के आवेदन गलती से अस्वीकार हो गए। 

क्लब ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य डिजिटल नोमैड्स और विभिन्न देशों के लोगों को जोड़ने वाला समुदाय बनाना था, लेकिन तकनीकी प्रक्रिया में अनजाने में पक्षपात जैसी स्थिति पैदा हो गई।

संस्थापकों पर कार्रवाई

मामले ने तूल पकड़ने के बाद क्लब के दो डच संस्थापक इंडोनेशिया छोड़कर सिंगापुर चले गए। इंडोनेशिया के आव्रजन महानिदेशक ने बताया कि दोनों के खिलाफ दोबारा देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों ने आवश्यक अनुमति के बिना सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए और वीजा नियमों का भी उल्लंघन किया। प्रशासन ने उनके वीजा प्रायोजक संगठन से भी स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इंडोनेशिया के भीतर कोई विदेशी समूह अपने अलग नियम बनाकर स्थानीय नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता।

फिर उठे नस्लवाद और रंगभेद के सवाल

यह विवाद केवल एक रनिंग क्लब तक सीमित नहीं रहा। कई इंडोनेशियाई नागरिकों ने दावा किया कि बाली के कुछ होटल, रेस्तरां और व्यवसाय विदेशी पर्यटकों, विशेष रूप से पश्चिमी देशों के लोगों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि स्थानीय लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है। नीदरलैंड में रहने वाली इंडोनेशियाई मूल की लॉरेन रिवा ने बताया कि उन्होंने वर्षों के दौरान कई बार ऐसे अनुभव किए, जहां दुकानदारों और रेस्तरां कर्मचारियों का व्यवहार विदेशी ग्राहकों के प्रति अधिक सम्मानजनक था। उन्होंने दावा किया कि कई बार स्थानीय ग्राहकों को कम महत्व दिया जाता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के साथ अधिक विनम्रता दिखाई जाती है।

बदलती सोच की जरूरत

बाली के क्षेत्रीय प्रतिनिधि परिषद के सदस्य आर्य वेदाकर्णा ने कहा कि द्वीप पर लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि विदेशी पर्यटक अधिक खर्च करते हैं और मोलभाव कम करते हैं, इसलिए व्यवसायी उन्हें प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलना जरूरी है ताकि स्थानीय और विदेशी सभी लोगों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके। उनके अनुसार, पर्यटन उद्योग तभी टिकाऊ और सम्मानजनक बन सकता है जब उसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।

पर्यटन उद्योग पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं तो बाली की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है। पर्यटन बाली की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और समानता, सम्मान तथा समावेशिता पर्यटकों और स्थानीय समुदाय दोनों के विश्वास के लिए आवश्यक हैं। फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित भेदभाव तकनीकी गलती का परिणाम था या किसी व्यवस्थित नीति का हिस्सा।

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