बांग्लादेश में 2026 का आम चुनाव ऐतिहासिक बन गया है। पहली बार अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ रही है। शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद BNP और अन्य दल सत्ता की दौड़ में हैं।
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हो रहे आम चुनाव देश के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की तरह देखे जा रहे हैं। इस चुनाव में 300 संसदीय सीटों के लिए मतदान हो रहा है, जबकि कुल संसद की संख्या 350 है। शेष 50 सीटें बाद में नामांकन के जरिए भरी जाती हैं। इस चुनाव को ऐतिहासिक बनाने वाली सबसे बड़ी वजह यह है कि आजादी के 55 साल बाद पहली बार देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अवामी लीग चुनावी मैदान में नहीं है।
अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता छोड़ने और देश से बाहर जाने के बाद यह पहला आम चुनाव है। इस बार सत्ता की दौड़ में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी, नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), जातीय पार्टी और कई स्वतंत्र उम्मीदवार शामिल हैं।
आजादी के बाद पहली बार अवामी लीग बाहर
1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद से अब तक अवामी लीग हर राष्ट्रीय संसदीय चुनाव का हिस्सा रही थी। 55 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब यह पार्टी आम चुनाव से बाहर है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह स्थिति बांग्लादेश की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
अवामी लीग न केवल एक राजनीतिक पार्टी रही है, बल्कि उसने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से लेकर शासन व्यवस्था तक अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में इस पार्टी की गैरमौजूदगी चुनाव को पूरी तरह अलग रंग दे रही है।
शेख हसीना का लंबा राजनीतिक सफर
शेख हसीना बांग्लादेश की राजनीति का ऐसा नाम हैं, जिनके बिना देश का आधुनिक राजनीतिक इतिहास अधूरा माना जाता है। वह देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं और दशकों तक बांग्लादेश की सत्ता की सबसे मजबूत धुरी रहीं।
शेख हसीना बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली महिला प्रधानमंत्री रही हैं। उन्होंने कुल पांच बार प्रधानमंत्री पद संभाला और लगभग दो दशक तक देश का नेतृत्व किया।
पहली बार प्रधानमंत्री बनने का दौर
शेख हसीना पहली बार जून 1996 में प्रधानमंत्री बनी थीं। अवामी लीग की जीत के बाद 23 जून 1996 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। यह कार्यकाल जुलाई 2001 तक चला।
यह कार्यकाल कई मायनों में ऐतिहासिक रहा क्योंकि शेख हसीना बांग्लादेश की पहली ऐसी प्रधानमंत्री बनीं, जिन्होंने अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक सुधार, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय कूटनीति पर ध्यान दिया।

सत्ता में वापसी का रास्ता
2001 के बाद शेख हसीना कुछ वर्षों तक विपक्ष में रहीं। इसके बाद दिसंबर 2008 के आम चुनाव में अवामी लीग ने बड़ी जीत हासिल की। जनवरी 2009 में शेख हसीना दूसरी बार प्रधानमंत्री बनीं।
2009 से शुरू हुआ यह दौर उनके राजनीतिक जीवन का सबसे प्रभावशाली समय माना जाता है। इस कार्यकाल में उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल विकास पर जोर दिया।
2014 का विवादित चुनाव
2014 के आम चुनाव में शेख हसीना तीसरी बार प्रधानमंत्री बनीं। हालांकि यह चुनाव विवादों से घिरा रहा। मुख्य विपक्षी दल BNP ने इस चुनाव का बहिष्कार किया था। चुनाव के बहिष्कार के बावजूद अवामी लीग ने सत्ता बरकरार रखी और शेख हसीना ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। इस चुनाव के बाद देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और गहराया।
2018 की निर्णायक जीत
2018 के चुनाव में अवामी लीग ने एक बार फिर भारी बहुमत हासिल किया। इसके साथ ही शेख हसीना चौथी बार प्रधानमंत्री बनीं और उनका कार्यकाल 2024 तक चला। इस दौरान सरकार ने बड़े विकास प्रोजेक्ट्स, ब्रिज, मेट्रो रेल, पावर सेक्टर और डिजिटल सेवाओं पर काम किया। समर्थकों का मानना है कि यह दौर विकास का प्रतीक था, जबकि आलोचक इसे सत्ता के केंद्रीकरण का समय बताते हैं।
पांचवीं बार सत्ता में वापसी
जनवरी 2024 में शेख हसीना पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनीं। यह चुनाव भी काफी विवादित रहा। BNP ने इसे नकली चुनाव करार देते हुए बहिष्कार किया था। चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी हुई। इसके विरोध में देशभर में जन आंदोलन शुरू हो गया, जिसमें छात्र संगठनों की बड़ी भूमिका रही।
अगस्त 2024 का जन आंदोलन
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसा ने बांग्लादेश की राजनीति को हिला दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वह देश छोड़कर भारत चली गईं। उनके जाने के बाद अवामी लीग कमजोर होती चली गई और अंततः इस चुनाव से बाहर हो गई।
2026 का चुनाव बिना शेख हसीना
12 फरवरी 2026 का चुनाव शेख हसीना और अवामी लीग दोनों के बिना हो रहा है। यह स्थिति बांग्लादेश की राजनीति के लिए बिल्कुल नई है। इस चुनाव में सत्ता के नए दावेदार सामने आए हैं। BNP एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। जमात-ए-इस्लामी और NCP जैसे दल भी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।








