Bangladesh: कल होगा Tarique Rahman का शपथ ग्रहण, जानिए नई सरकार में किस हिंदू नेता को मिली जगह

बांग्लादेश में 17 फरवरी को नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। बीएनपी को बहुमत मिलने के बाद सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है, प्रधानमंत्री पद के लिए तारिक रहमान का नाम।

बांग्लादेश में 17 फरवरी को नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार बनने की प्रबल संभावना है।

Tarique Rahman Swearing-in Ceremony: बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मंगलवार 17 फरवरी को देश में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें नवनिर्वाचित सांसद और कैबिनेट औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे। इस सरकार का नेतृत्व बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान के हाथों में जाने की प्रबल संभावना है। चुनाव परिणामों के बाद से ही देश और विदेश में इस सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि यह सरकार कई मायनों में परंपरा से हटकर फैसले लेने जा रही है।

संसद भवन में होगा ऐतिहासिक शपथ ग्रहण

इस बार शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन जातीय संसद भवन में किया जाएगा। आमतौर पर बांगाभवन में होने वाला कैबिनेट शपथ ग्रहण पहली बार संसद परिसर में होगा। यह फैसला बीएनपी के अनुरोध पर लिया गया है, जिसे पार्टी अपनी लोकतांत्रिक परंपरा से जोड़कर देख रही है।

कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10 बजे नवनिर्वाचित सांसदों को संसद भवन के भीतर शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद शाम 4 बजे दक्षिण प्लाज़ा में नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह होगा। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार सत्ता के पहले ही दिन एक अलग संदेश देना चाहती है।

चुनाव आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन सांसदों को शपथ दिलाएंगे। संविधान के अनुसार, गजट अधिसूचना जारी होने के तीन दिनों के भीतर सांसदों का शपथ लेना अनिवार्य होता है। शपथ के बाद संसद के भीतर ही संसदीय दल की बैठक होगी, जिसमें संसदीय नेता का चयन किया जाएगा। यही नेता आगे चलकर प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनेगा।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राष्ट्रपति से औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री की नियुक्ति का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद कैबिनेट का गठन किया जाएगा और मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।

राष्ट्रपति की भूमिका

नई कैबिनेट को शपथ मोहम्मद शाहाबुद्दीन दिलाएंगे। कैबिनेट सचिव एम सिराज मिया समारोह का संचालन करेंगे। संसद सचिवालय ने सुरक्षा, प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि अंतरिम प्रशासन के तहत मुख्य सलाहकार प्रो. मुहम्मद यूनुस से सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा। इस सत्ता परिवर्तन को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई बैठकों का आयोजन किया गया है।

क्या है राजनीतिक गणित

13वें संसदीय चुनाव के नतीजों ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय कर दी है। चुनाव आयोग ने 299 में से 297 सीटों के लिए गजट अधिसूचना जारी की। इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

वहीं बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनने की स्थिति बनाई है। बाकी सीटें अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। यह परिणाम दर्शाता है कि देश की राजनीति में विपक्ष की भी मजबूत मौजूदगी रहेगी।

प्रधानमंत्री पद की दौड़

बीएनपी नेतृत्व की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री पद के लिए तारिक रहमान का नाम सबसे आगे है। पार्टी के भीतर उन्हें सरकार का चेहरा मानकर तैयारी की जा रही है। समर्थकों का मानना है कि उनका नेतृत्व बीएनपी को नई दिशा देगा, जबकि आलोचक उनके फैसलों पर कड़ी नजर रखने की बात कह रहे हैं। पार्टी नेतृत्व फिलहाल कैबिनेट की अंतिम सूची को लेकर मंथन कर रहा है। मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री पदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और कई नाम सामने आ चुके हैं।

संभावित मंत्रियों के नाम

सूत्रों के मुताबिक, नई कैबिनेट में अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन का खास ध्यान रखा जाएगा। जिन वरिष्ठ नेताओं के नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में हैं, उनमें मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर, डॉ. खंदाकर मोशर्रफ हुसैन, डॉ. अब्दुल मोयीन खान, आमिर खासरु महमूद चौधरी और सलाहुद्दीन अहमद शामिल हैं।

इसके अलावा सलीमा रहमान, डॉ. एज़ेडएम जाहिद हुसैन, अब्दुल अव्वाल मिंटू, डॉ. रेज़ा किब्रिया और शामा ओबैद इस्लाम के नाम भी चर्चा में हैं। टेक्नोक्रेट कोटे से हुमायूं कबीर पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार कैबिनेट में महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

गठबंधन सहयोगियों की भूमिका

बीएनपी गठबंधन में शामिल दलों को भी सरकार में हिस्सेदारी मिलने की संभावना है। गठबंधन सहयोगियों में गणसंहति आंदोलन के जोनायेद साकी, बांग्लादेश जातीय पार्टी के अंदलीब रहमान पार्थो और बांग्लादेश गण अधिकार परिषद के नुरुल हक नूर के नाम सामने आ रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपना सकती है।

Leave a comment