डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी स्टेशनरी पर करोड़ों खर्च, SBI और HDFC बैंक सबसे आगे

FY2025 में डिजिटल बैंकिंग बढ़ने के बावजूद SBI और HDFC बैंक ने प्रिंटिंग व स्टेशनरी पर सबसे अधिक खर्च किया। जानें किन बैंकों का खर्च और मुनाफे का अनुपात सबसे ज्यादा रहा।

डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के बावजूद भारतीय बैंक प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर भारी खर्च कर रहे हैं। FY2025 में SBI और HDFC बैंक इस मामले में सबसे आगे रहे, जबकि IDFC फर्स्ट बैंक ने अपने मुनाफे का सबसे बड़ा हिस्सा इस मद में खर्च किया।

Business: देश में डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद बैंकों का प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर खर्च अब भी काफी अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार कई बड़े सरकारी और निजी बैंकों ने इस मद में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिससे पारंपरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं की जरूरत अब भी साफ दिखाई देती है।

डिजिटल सेवाओं के बावजूद जारी है भारी खर्च

ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल दस्तावेजों के बढ़ते उपयोग के बावजूद भारतीय बैंक अभी भी प्रिंटिंग, कागज, पेन और अन्य स्टेशनरी पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, यह खर्च केवल शाखाओं के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि दस्तावेजों की प्रिंटिंग, पासबुक, चेकबुक, फॉर्म, नियामकीय रिकॉर्ड और ग्राहकों से जुड़े कई आवश्यक कागजी कार्यों पर भी होता है।

डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी स्टेशनरी पर करोड़ों खर्च, SBI और HDFC बैंक सबसे आगे

वित्त वर्ष 2024-25 में इस श्रेणी में सबसे अधिक खर्च स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने किया। बैंक ने प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर 986.4 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बाद HDFC बैंक दूसरे स्थान पर रहा, जिसने इस मद में 922.5 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं एक्सिस बैंक ने 373.8 करोड़ रुपये और ICICI बैंक ने 318.5 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया।

कई बैंकों में मुनाफे के मुकाबले खर्च ज्यादा

कुल खर्च के लिहाज से भले ही SBI और HDFC बैंक सबसे ऊपर रहे, लेकिन मुनाफे के अनुपात में IDFC First Bank का खर्च सबसे अधिक रहा। बैंक ने स्टेशनरी और प्रिंटिंग पर 122.7 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसके वार्षिक शुद्ध लाभ का लगभग 8.05 प्रतिशत है।

इसी तरह IndusInd Bank का 114.9 करोड़ रुपये का खर्च उसके नेट प्रॉफिट का 4.46 प्रतिशत रहा। Yes Bank और AU Small Finance Bank में भी यह खर्च उनके कुल मुनाफे का उल्लेखनीय हिस्सा रहा। इसके विपरीत Bank of Baroda, Punjab National Bank, Canara Bank और Union Bank of India जैसे सरकारी बैंकों ने इस मद में अपने लाभ का लगभग एक प्रतिशत या उससे कम खर्च किया।

क्यों अब भी जरूरी है प्रिंटिंग और स्टेशनरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे के बावजूद बैंक पूरी तरह पेपरलेस नहीं हो पाए हैं। चेकबुक, पासबुक, ग्राहक आवेदन, कानूनी दस्तावेज, ऑडिट रिकॉर्ड, नियामकीय अनुपालन और कई आंतरिक प्रक्रियाओं में अब भी प्रिंटेड दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ग्राहक अभी भी पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं, जिससे प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर खर्च पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है।

हालांकि बैंक लगातार डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पारंपरिक और डिजिटल दोनों व्यवस्थाएं समानांतर रूप से संचालित हो रही हैं। यही कारण है कि तकनीकी बदलाव के बावजूद प्रिंटिंग और स्टेशनरी पर होने वाला खर्च अभी भी बैंकों के परिचालन व्यय का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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