बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र डिप्रेशन में बदल गया है और इसके दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र तट की ओर बढ़ने की संभावना है। आंध्र सरकार ने भारी बारिश के मद्देनजर नदियों, नियंत्रण कक्षों और राहत दलों को अलर्ट किया।
अमरावती: बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य मशीनरी को अलर्ट कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 21 सितंबर 2026 को पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र डिप्रेशन में बदल गया। इसके अगले 24 घंटों में और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई थी। यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों को प्रभावित कर सकता है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए आंध्र प्रदेश की गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वांगलापुडी अनिता ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को संभावित भारी बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए।
दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र की ओर बढ़ रहा सिस्टम
IMD के मुताबिक, 21 सितंबर की शाम 5:30 बजे डिप्रेशन पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में करीब 17.7°N अक्षांश और 87.8°E देशांतर पर केंद्रित था। यह पुरी से लगभग 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, गोपालपुर से 310 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, कलिंगपट्टनम से 390 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और विशाखापत्तनम से करीब 470 किलोमीटर पूर्व में था।
मौसम विभाग ने बताया कि सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और अगले 24 घंटों में डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इसके बाद इसके 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती घंटों के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार करने की संभावना जताई गई है।
उत्तर आंध्र में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान
मौसम तंत्र के प्रभाव से उत्तर आंध्र प्रदेश में बुधवार और गुरुवार को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
IMD ने दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में 23 और 24 सितंबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना भी जताई है। ऐसे में तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
ओडिशा में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने सीमा से लगे जिलों के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया है।
वंशधारा और नागावली नदियों पर विशेष निगरानी
गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वांगलापुडी अनिता ने अधिकारियों को वंशधारा और नागावली नदियों के जलस्तर और प्रवाह की लगातार निगरानी करने को कहा है। इन नदियों का जलस्तर बारिश के दौरान तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए संबंधित जिलों में प्रशासन को पहले से स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने ओडिशा सीमा से लगे जिलों के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और दोनों राज्यों के बीच सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करने को कहा।
इसका उद्देश्य नदी का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में पानी भरने या स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर तत्काल कार्रवाई करना है।
SDRF और NDRF की टीमें तैयार रखने के निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को SDRF और NDRF की टीमों को आपातकालीन बचाव और राहत अभियान के लिए तैयार रखने का निर्देश दिया। जिला और राज्य स्तर के नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने को कहा गया है।
प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी बदलाव की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाएं।
ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य किसी आपात स्थिति में बचाव दलों की त्वरित तैनाती और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में देरी को रोकना है।
निचले इलाकों से लोगों को जरूरत पड़ने पर हटाया जाएगा
मंत्री ने तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा है। यदि किसी क्षेत्र में जलभराव या बाढ़ का खतरा बढ़ता है तो लोगों को तत्काल राहत केंद्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को आवश्यक वस्तुओं, दवाओं, चिकित्सा सेवाओं और अन्य आपातकालीन सुविधाओं की अग्रिम व्यवस्था करने को भी कहा गया है।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि संभावित रूप से प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान की कमी न हो और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
खतरनाक रास्तों और पुलियों पर विशेष निगरानी
बारिश के दौरान नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से छोटे पुल, कॉजवे और निचले रास्ते जलमग्न हो सकते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन को ओवरफ्लो हो रहे स्ट्रीम, संवेदनशील कॉजवे और बाढ़ संभावित इलाकों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
ऐसे स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और आवश्यकता पड़ने पर वाहनों तथा लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का उद्देश्य लोगों को जलभराव वाले रास्तों में प्रवेश करने से रोकना और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव करना है।
50 से 60 किमी प्रति घंटे की हवाओं का अनुमान
मौसम तंत्र के प्रभाव से तटीय इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी बताई गई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।
लोगों को पेड़ों, बड़े होर्डिंग्स और पुराने या जर्जर भवनों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं के दौरान कमजोर संरचनाओं और गिरने की आशंका वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
मौसम तंत्र के समुद्र में सक्रिय होने को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को भी मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करने को कहा गया है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं के बजाय आधिकारिक सरकारी और मौसम विभाग की सलाह पर भरोसा करें।
सरकार ने जिला प्रशासन को किया अलर्ट
मंत्री अनिता ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान मैदानी तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मौसम की स्थिति में किसी भी बदलाव को देखते हुए राहत और बचाव की योजना को तुरंत अपडेट किया जाए। विशेष रूप से नदी किनारे, तटीय क्षेत्रों और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
अभी चक्रवात का नहीं, डिप्रेशन का खतरा
ओडिशा के मुख्य सचिव ने भी 21 सितंबर को कहा कि राज्य में चक्रवात का खतरा नहीं है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन के प्रभाव से भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार बारिश की गतिविधि 22 सितंबर से बढ़ने और अगले दो दिनों में इसके और तेज होने की संभावना थी।
इसलिए फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस भारी बारिश, तेज हवाओं, नदी के बढ़ते जलस्तर और स्थानीय जलभराव से जुड़े जोखिमों को कम करने पर है।
लोगों से आधिकारिक सलाह मानने की अपील
आंध्र प्रदेश सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें। तटीय क्षेत्रों के लोगों को समुद्र से दूरी बनाए रखने और मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार मौसम तंत्र के 23-24 सितंबर के दौरान उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट को प्रभावित करने की संभावना है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक प्रशासन की निगरानी, नदी के जलस्तर और बारिश की तीव्रता पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।












