बंगाल के 3 बागी TMC सांसदों ने BJP से बनाई दूरी, बोले- न पार्टी में जाएंगे, न NDA का हिस्सा बनेंगे

अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान नई दिल्ली: और यूसुफ पठान ने BJP में शामिल होने और NDA का हिस्सा बनने से इनकार किया। तीनों ने केंद्र से सहयोग जारी रखने की बात कही।

पश्चिम बंगाल के तीन बागी TMC सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने BJP में शामिल होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वे NDA का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन क्षेत्रीय विकास और जनता के हित में केंद्र से सहयोग करेंगे।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए तीन बागी सांसदों अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। तीनों सांसदों ने कहा है कि वे BJP में शामिल नहीं होंगे और न ही NDA का हिस्सा हैं। हालांकि, अपने-अपने क्षेत्रों के विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर वे केंद्र और राज्य सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। तीनों सांसदों के रुख को लेकर अटकलें उस समय तेज हुईं, जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठकों में नजर आए।

NCPI से जुड़े TMC के बागी सांसदों ने NDA के साथ काम करने की घोषणा पहले की थी, जिसके बाद उनके BJP के और करीब जाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान ने स्पष्ट किया है कि वे BJP में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार के साथ किसी मुद्दे पर बातचीत करना या प्रधानमंत्री से मुलाकात करना BJP की सदस्यता लेने के बराबर नहीं है।

TMC छोड़कर NCPI में शामिल हुआ था बागी गुट

ये तीनों सांसद उन 20 TMC सांसदों के समूह में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम ने संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा किया।

बागी सांसदों ने पहले NDA के साथ काम करने की बात कही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके इस कदम के बाद NDA की संख्या में भी बदलाव का दावा किया गया था। हालांकि, इन सांसदों की संसदीय स्थिति और NCPI के साथ विलय की औपचारिक मान्यता को लेकर प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।

अबू ताहिर और खलीलुर ने BJP में जाने से किया इनकार

अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान से BJP में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए थे। दोनों ने इस संभावना से इनकार किया। खलीलुर रहमान ने कहा कि वे BJP में शामिल नहीं हो रहे हैं और NCPI के साथ बने रहेंगे। भविष्य में उनकी राजनीतिक दिशा क्या होगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला समय के साथ होगा। अबू ताहिर खान ने भी BJP और NDA से दूरी स्पष्ट करते हुए कहा कि वे BJP के साथ नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों और खासकर जरूरतमंद तबकों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

NDA की बैठक से तीनों ने बनाई दूरी

हाल के घटनाक्रम में यह तथ्य भी सामने आया कि NCPI के कई सांसद NDA की बैठकों में शामिल हुए, लेकिन अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने एक महत्वपूर्ण NDA बैठक से दूरी बनाए रखी थी। रिपोर्टों के अनुसार, NCPI के 17 सांसदों ने 4 जुलाई की बैठक में हिस्सा लिया था, जबकि ये तीन सांसद उसमें मौजूद नहीं थे। इसके बाद तीनों सांसदों की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा और बढ़ गई। कुछ रिपोर्टों में इसे NCPI के भीतर मतभेद से भी जोड़कर देखा गया, हालांकि पार्टी की ओर से बड़े विभाजन की बात से इनकार किया गया है।

अमित शाह से भी मिले थे तीनों सांसद

अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल से जुड़े कई मुद्दे उनके सामने रखे। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कुछ क्षेत्रों में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे शामिल थे। सांसदों ने इन विषयों को लेकर अपनी चिंताएं गृह मंत्री के सामने रखीं। इस मुलाकात के बाद भी राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठा कि क्या तीनों सांसद केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी के करीब जा रहे हैं। हालांकि, सांसदों के ताजा बयान से BJP में शामिल होने की संभावना फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही है।

NCPI ने मतभेद की खबरों को किया खारिज

NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी में किसी बड़ी दरार की अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि NCPI के सांसदों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक में बंगाल के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे पहले भी NCPI के बागी सांसदों ने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय हितों के लिए एक नए मंच के माध्यम से काम करना है। हालांकि, तीन मुस्लिम सांसदों के BJP से दूरी बनाने के बयान के बाद NCPI के भीतर अलग-अलग राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा जरूर तेज हुई है।

TMC ने साधा निशाना, BJP की ‘बी-टीम’ बताया

दूसरी ओर, TMC ने तीनों सांसदों के रुख पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि TMC छोड़ने के बाद इन सांसदों का राजनीतिक रुख BJP और NDA के हितों से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। TMC नेता कुणाल घोष ने NCPI को BJP की ‘बी-टीम’ बताया है। पार्टी की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि ये सांसद BJP और NDA से दूरी रखते हैं तो फिर उनके केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संपर्क का राजनीतिक अर्थ क्या है। हालांकि, यह TMC का राजनीतिक आरोप है और तीनों सांसदों ने BJP में शामिल होने की संभावना से खुद इनकार किया है।

संसदीय पहचान को लेकर भी सवाल

बागी सांसदों की राजनीतिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी संसदीय पहचान है। रिपोर्टों के मुताबिक, NCPI में विलय की घोषणा के बावजूद लोकसभा में उनकी औपचारिक स्थिति को लेकर प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है। अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान का दावा है कि लोकसभा में उन्हें अभी भी TMC सांसद के रूप में संबोधित किया जाता है और उनके नाम के साथ TMC का उल्लेख किया जाता है। ऐसे में NCPI में विलय, NDA को समर्थन और संसद में उनकी औपचारिक पहचान—इन तीनों पहलुओं के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना अभी बाकी है।

बंगाल की राजनीति में क्या होगा असर?

पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार तेज रहा है। ऐसे में 20 बागी सांसदों का TMC से अलग होना राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया है। तीन मुस्लिम सांसदों का BJP में शामिल होने से इनकार इस समीकरण को एक नया मोड़ देता है। इससे यह संकेत मिलता है कि NCPI से जुड़े सभी सांसदों की राजनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान का रुख यह बताता है कि वे BJP की राजनीति से सहमत नहीं होने के बावजूद केंद्र सरकार के साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

आगे की रणनीति पर रहेगी नजर

फिलहाल तीनों सांसदों ने BJP में जाने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने NDA का हिस्सा होने से भी इनकार किया है और NCPI के साथ बने रहने की बात कही है। हालांकि, उनकी भविष्य की राजनीतिक दिशा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। खासतौर पर संसदीय स्तर पर NCPI की स्थिति, बागी सांसदों के समूह की एकजुटता और केंद्र के साथ उनके संबंध आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेंगे।

पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष के बीच तीनों सांसदों का यह रुख राज्य की सियासत में एक अलग धुरी बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ उनकी मुलाकातों के बावजूद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने BJP में शामिल होने से इनकार किया है।

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