भागलपुर के 6 साल के रियान ने सिंगापुर में लहराया तिरंगा: ASEAN शतरंज चैंपियनशिप में 5 पदक जीतकर रचा इतिहास

भागलपुर के 6 साल के रियान सिद्धार्थ ने सिंगापुर में ASEAN+ Age Group Chess Championship में 5 पदक जीतकर देश और बिहार का नाम रोशन किया।
भागलपुर के 6 साल के रियान ने सिंगापुर में लहराया तिरंगा: ASEAN शतरंज चैंपियनशिप में 5 पदक जीतकर रचा इतिहास
Photo Credit / Attribution: Google

भागलपुर के महज 6 साल के रियान सिद्धार्थ ने विदेश की धरती पर अपनी शतरंज प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का तिरंगा लहराया है। सिंगापुर में आयोजित ASEAN+ Age Group Chess Championship 2026 में रियान ने अलग-अलग स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 5 पदक अपने नाम किए। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में लगातार पदक जीतना रियान की प्रतिभा और मेहनत को दिखाता है।

सिंगापुर में आयोजित यह प्रतियोगिता 7 से 17 अगस्त 2026 तक चल रही है। इसमें ASEAN देशों के अलावा भारत समेत कई संवाद साझेदार देशों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में स्टैंडर्ड, रैपिड और ब्लिट्ज जैसे प्रारूप रखे गए हैं।

रियान के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अभी महज छह वर्ष के हैं। जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खेल-कूद और शुरुआती पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में रियान अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने अपनी समझ, एकाग्रता और बोर्ड पर तेजी से निर्णय लेने की क्षमता के दम पर कई मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया।

सिंगापुर में रियान की सफलता की खबर भागलपुर पहुंचते ही परिवार, परिचितों और स्थानीय खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल बन गया। रियान की उपलब्धि को बिहार के लिए भी गौरव की बात माना जा रहा है। विदेश में भारत का तिरंगा देखकर रियान के परिवार और शुभचिंतकों में उत्साह है।

ASEAN+ Age Group Chess Championship में अलग-अलग आयु वर्गों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इस साल की प्रतियोगिता में ASEAN सदस्य देशों के साथ भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और अन्य देशों के खिलाड़ी भी शामिल हैं।

रियान ने इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करते हुए यह साबित किया कि शतरंज में उम्र से ज्यादा महत्व एकाग्रता, अभ्यास और सही रणनीति का होता है। किसी अनुभवी खिलाड़ी के सामने बोर्ड पर बैठकर कई चालों को पहले से समझना बच्चों के लिए आसान नहीं होता, लेकिन रियान ने इस चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ किया।

शतरंज में एक छोटी सी गलती भी पूरे मुकाबले का परिणाम बदल सकती है। खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी की चाल समझने के साथ अगली कई संभावित चालों का अनुमान लगाना पड़ता है। रियान की उपलब्धि से पता चलता है कि उन्होंने कम उम्र में ही इस खेल की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया है।

रियान की इस उपलब्धि के पीछे लगातार अभ्यास और परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए केवल खेल की तैयारी ही नहीं, बल्कि यात्रा, समय का अंतर, नए माहौल और अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों के साथ मुकाबले के लिए भी मानसिक तैयारी जरूरी होती है।

सिंगापुर पहुंचकर रियान ने जिस तरह प्रदर्शन किया, वह उनके भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने से उन्हें आगे बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलने का आत्मविश्वास मिलेगा।

रियान की सफलता भागलपुर जैसे शहर से आने वाले दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। शतरंज को अक्सर घर या स्कूल के स्तर पर खेले जाने वाले खेल के रूप में देखा जाता है, लेकिन अब बिहार के युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

इस उपलब्धि से भागलपुर के खेल जगत में भी रियान को लेकर उत्साह बढ़ा है। स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि अगर प्रतिभाशाली बच्चों को सही प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में खेलने के अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

रियान के पांच पदक जीतने की उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रतियोगिता में कई देशों के खिलाड़ी शामिल हैं। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अलग-अलग खेल शैलियों और रणनीतियों वाले खिलाड़ियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद रियान ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

सिंगापुर में आयोजित प्रतियोगिता का कार्यक्रम भी काफी व्यापक है। स्टैंडर्ड शतरंज के मुकाबलों के बाद रैपिड और ब्लिट्ज स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त को रैपिड के मुकाबले और 16 अगस्त को ब्लिट्ज स्पर्धाएं रखी गई थीं। 16 अगस्त को रैपिड और ब्लिट्ज के पुरस्कारों के साथ समापन समारोह निर्धारित था।

रियान के पांच पदक जीतने की उपलब्धि से यह भी संकेत मिलता है कि बिहार में शतरंज जैसी खेल प्रतिभाओं को पहचान मिलने की बड़ी संभावना है। छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाले खिलाड़ियों को अगर शुरुआती उम्र से सही मंच मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

शतरंज के खेल में बच्चों की एकाग्रता और सोचने की क्षमता विकसित करने में भी मदद मिलती है। लगातार अभ्यास से खिलाड़ी धैर्य के साथ निर्णय लेना सीखता है। रियान की कम उम्र में मिली यह अंतरराष्ट्रीय सफलता उनके लिए आगे के सफर की मजबूत शुरुआत मानी जा सकती है।

परिवार के लिए भी यह पल बेहद गर्व का है। विदेश में अपने बच्चे को भारत का प्रतिनिधित्व करते और पदक जीतते देखना किसी भी परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। रियान की सफलता ने उनके परिवार के साथ-साथ भागलपुर के लोगों को भी गर्व करने का मौका दिया है।

रियान की उपलब्धि को सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। लोग उन्हें भविष्य का होनहार शतरंज खिलाड़ी बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। छह साल की उम्र में पांच अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना निश्चित रूप से उनके खेल सफर की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

आने वाले वर्षों में रियान के सामने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी चुनौतियां होंगी। अभी से मिले अंतरराष्ट्रीय अनुभव का फायदा उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं में मिल सकता है। अगर अभ्यास और प्रशिक्षण का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो वह आने वाले समय में शतरंज के बड़े मंचों पर भी नजर आ सकते हैं।

कुल मिलाकर, भागलपुर के 6 साल के रियान सिद्धार्थ ने सिंगापुर में आयोजित ASEAN+ Age Group Chess Championship में 5 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि बिहार और देश के लिए गर्व की बात है। सिंगापुर में भारत का तिरंगा लहराने वाले रियान की सफलता ने भागलपुर के खेल प्रेमियों को भी उत्साहित किया है और उनके भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

Leave a comment