खतरे के निशान से 21 सेमी नीचे पहुंची गंगा: जलस्तर स्थिर होने से राहत की उम्मीद फरक्का बराज के गेट खुलने का असर दिखने लगा

भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 21 सेमी नीचे पहुंच गया है। फरक्का बराज के गेट खुलने से पानी घटने की उम्मीद है, प्रशासन अलर्ट है।
 खतरे के निशान से 21 सेमी नीचे पहुंची गंगा: जलस्तर स्थिर होने से राहत की उम्मीद फरक्का बराज के गेट खुलने का असर दिखने लगा
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भागलपुर में पिछले कई दिनों से बाढ़ की आशंका के बीच अब गंगा के जलस्तर को लेकर थोड़ी राहत की खबर सामने आई है। लगातार बढ़ने के बाद नदी का जलस्तर अब स्थिर होने की ओर है और बुधवार को यह खतरे के निशान से करीब 21 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। जलस्तर में यह बदलाव तटवर्ती और दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है। हालांकि प्रशासन और जल संसाधन विभाग अभी स्थिति को पूरी तरह सामान्य नहीं मान रहे हैं और नदी के जलस्तर, तटबंधों तथा संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

भागलपुर में गंगा का खतरे का निशान 33.68 मीटर बताया गया है। पिछले दिनों नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा था और निचले इलाकों में खेतों तथा गांवों तक पानी पहुंचने लगा था। कुछ दिन पहले जलस्तर 32.85 मीटर तक पहुंच गया था और नदी खतरे के निशान के काफी करीब आ गई थी। उस समय पानी करीब डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। 

अब स्थिति में कुछ बदलाव आया है। जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार थमने के बाद पानी खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। इसके पीछे फरक्का बराज के गेट खोले जाने को अहम वजह माना जा रहा है। गेट खुलने के बाद गंगा के पानी का बहाव आगे की ओर बढ़ने और नदी पर बना दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे भागलपुर सहित गंगा किनारे के इलाकों में आने वाले दिनों में जलस्तर और नीचे जाने की संभावना जताई जा रही है। 

दरअसल, पिछले दिनों गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर जिले के कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी थी। नदी के किनारे बसे गांवों के अलावा दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी लगातार निगरानी रखनी पड़ रही थी। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। कई जगह फसलें पानी में डूबने लगी थीं और लोगों को पशुओं के चारे से लेकर रोजमर्रा के सामान को सुरक्षित स्थान पर रखने की जरूरत महसूस होने लगी थी।

भागलपुर के बरारी, रजंदीपुर, फरका, बाबूपुर, घोषपुर, इंग्लिश, मासाढ़ू, ममलखा, शंकरपुर और अठगामा जैसे तटवर्ती इलाकों में गंगा के बढ़ते पानी का असर देखा गया था। पानी धीरे-धीरे निचले हिस्सों की ओर फैल रहा था। ऐसे में ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया तो पानी घरों और आबादी वाले हिस्सों में भी प्रवेश कर सकता है। 

गंगा के जलस्तर में कमी की उम्मीद के बीच भी प्रशासन ने सतर्कता कम नहीं की है। तटबंधों पर निगरानी जारी है और संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। क्योंकि जलस्तर घटने के बावजूद नदी के किनारे कटाव और तटबंधों पर दबाव की समस्या बनी रह सकती है। किसी भी कमजोर हिस्से में अचानक पानी का दबाव बढ़ने पर स्थिति दोबारा गंभीर हो सकती है।

बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही राहत और बचाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं। नाव, राहत सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों को तैयार रखने पर जोर दिया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी नदी के जलस्तर में अचानक बदलाव होने की स्थिति में सावधानी बरतने को कहा जा रहा है।

भागलपुर में बाढ़ की स्थिति केवल स्थानीय बारिश पर निर्भर नहीं करती। गंगा के ऊपरी हिस्सों में होने वाली बारिश और वहां से आने वाला पानी भी नदी के जलस्तर को प्रभावित करता है। पिछले दिनों प्रयागराज और वाराणसी की ओर भी गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसका असर आगे बिहार के हिस्सों में दिखाई देने की आशंका थी। 

इसी वजह से भागलपुर प्रशासन नदी के अलग-अलग गेज और जलस्तर की स्थिति पर नजर रख रहा है। गंगा के साथ-साथ कोसी जैसी दूसरी नदियों का बढ़ता पानी भी नवगछिया और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति को प्रभावित कर रहा था। 25 अगस्त की रिपोर्टों में नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई इलाकों में गंभीर स्थिति बताई गई थी। 

इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था। इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। फरक्का बराज के गेट खोले जाने के बाद जलस्तर कम होने की उम्मीद भी जताई गई थी। 

फरक्का बराज को लेकर बिहार में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज रही है। बिहार सरकार की ओर से गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए फरक्का बराज से पानी के सुगम प्रवाह की मांग की गई थी। इसके बाद गेट खोले जाने की खबर से बिहार के गंगा किनारे बसे इलाकों में पानी का दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। 

हालांकि गंगा के जलस्तर में कमी का मतलब यह नहीं है कि बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी होने की संभावना मौसम और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पानी के प्रवाह पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रशासन अभी भी किसी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है।

ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि जिस तेजी से कुछ दिन पहले पानी बढ़ रहा था, फिलहाल वैसी स्थिति नहीं है। जलस्तर स्थिर होने से लोगों को उम्मीद है कि खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी का फैलाव आगे नहीं बढ़ेगा। यदि फरक्का बराज से पानी का बहाव इसी तरह जारी रहा और ऊपर से आने वाले पानी का दबाव कम रहा तो गंगा के जलस्तर में आने वाले दिनों में और गिरावट देखी जा सकती है।

लेकिन जलस्तर घटने के बावजूद बाढ़ से हुए नुकसान की चुनौती बनी रहेगी। जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां फसल को नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी और कृषि गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए आवागमन और पशुओं के चारे की समस्या भी बनी रह सकती है।

तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पानी घटने के दौरान भी कटाव की समस्या कई जगह गंभीर हो सकती है। नदी की धारा बदलने और तेज बहाव के कारण किनारे की मिट्टी कट सकती है। ऐसे में प्रशासन को केवल जलस्तर पर नहीं, बल्कि तटबंधों और कटाव प्रभावित हिस्सों पर भी लगातार निगरानी रखनी होगी।

भागलपुर में गंगा के जलस्तर में मौजूदा बदलाव को फिलहाल राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर नीचे पहुंचना निश्चित रूप से पिछले दिनों की तुलना में बेहतर स्थिति है, लेकिन नदी अभी भी ऊंचे स्तर पर बह रही है। इसलिए ग्रामीणों और तटवर्ती इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। 

प्रशासन की कोशिश है कि यदि जलस्तर दोबारा बढ़ता है तो उससे पहले प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की व्यवस्था मजबूत कर ली जाए। नावों और राहत सामग्री की उपलब्धता, तटबंधों की निगरानी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना प्राथमिकता बनी हुई है।

फिलहाल भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर नीचे है और फरक्का बराज के गेट खोले जाने के बाद आने वाले समय में और राहत की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि नदी की स्थिति लगातार बदल सकती है, इसलिए प्रशासन अलर्ट मोड में है। अगर जलस्तर में गिरावट का यह सिलसिला जारी रहता है तो तटवर्ती और दियारा इलाकों के लोगों को बाढ़ के बढ़ते खतरे से बड़ी राहत मिल सकती है। 

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