BharatNet पर CAG की रिपोर्ट, 96.70% ग्राम पंचायतों तक इंफ्रास्ट्रक्चर फिर भी इंटरनेट सिर्फ 33.20% में चालू

CAG रिपोर्ट के मुताबिक BharatNet के तहत 96.70% ग्राम पंचायतों में इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचा, लेकिन नवंबर 2025 तक सिर्फ 33.20% में इंटरनेट सेवा चालू थी।

CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में BharatNet परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। नवंबर 2025 तक 96.70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचने के बावजूद केवल 33.20 प्रतिशत में इंटरनेट सेवा चालू हो सकी।

Tech: गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई BharatNet योजना को लेकर CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 तक देश की 96.70 प्रतिशत ग्राम पंचायतें इंफ्रास्ट्रक्चर से कवर हो चुकी थीं, लेकिन इनमें केवल 33.20 प्रतिशत पंचायतों में ही इंटरनेट सेवा चालू थी। ऑडिटर ने योजना की प्लानिंग और क्रियान्वयन में कमियों को प्रमुख वजह बताया है।

BharatNet के मुख्य उद्देश्य पर CAG ने उठाए सवाल

गांवों और शहरों के बीच डिजिटल अंतर कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई BharatNet परियोजना को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के तहत बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, लेकिन इसका वास्तविक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पाया।

BharatNet का प्रमुख उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों तक हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और अन्य इंटरनेट आधारित सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि, CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने और इंटरनेट सेवा के वास्तविक संचालन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

96.70% ग्राम पंचायतें कवर, लेकिन इंटरनेट चालू केवल 33.20% में

रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 तक देश की 96.70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को BharatNet के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर से कवर किया जा चुका था। पहली नजर में यह आंकड़ा परियोजना की अच्छी प्रगति को दर्शाता है, लेकिन जब वास्तविक इंटरनेट सेवा की स्थिति देखी गई तो तस्वीर अलग नजर आई।

नवंबर 2025 तक केवल 33.20 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में ही इंटरनेट सेवा चालू हो सकी थी। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में पंचायतों तक नेटवर्क से संबंधित बुनियादी ढांचा पहुंचने के बावजूद उसका इस्तेमाल सक्रिय इंटरनेट कनेक्टिविटी के रूप में नहीं हो पा रहा था।

यही अंतर BharatNet की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। केवल केबल, नेटवर्क उपकरण या अन्य तकनीकी ढांचा स्थापित कर देने से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का लक्ष्य पूरा नहीं होता। जब तक सेवा नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होती, तब तक ग्रामीण नागरिकों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल सकता।

Planning और Implementation में बताई गई कमियां

CAG ने परियोजना की स्थिति के पीछे प्लानिंग और क्रियान्वयन से जुड़ी कमियों को महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया है। ऑडिट में यह देखने की कोशिश की गई कि बड़े स्तर पर तैयार किए गए नेटवर्क का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी इंटरनेट सेवा देने के लिए क्यों नहीं हो सका।

इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बावजूद कनेक्टिविटी का सीमित संचालन यह संकेत देता है कि नेटवर्क की योजना बनाने से लेकर उसके रखरखाव और सेवा संचालन तक कई स्तरों पर समस्याएं रही हैं।

BharatNet जैसी परियोजना में केवल फाइबर नेटवर्क बिछाना पर्याप्त नहीं है। नेटवर्क की विश्वसनीयता, रखरखाव, बिजली की उपलब्धता, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और सेवा प्रदाताओं की भागीदारी जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन क्षेत्रों में समन्वय की कमी रहती है तो तैयार नेटवर्क का उपयोग सीमित रह सकता है।

ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है असर

BharatNet का उद्देश्य ग्रामीण भारत में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होने से गांवों में ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार से जुड़े अवसरों तक पहुंच आसान हो सकती है।

लेकिन पंचायत स्तर पर सक्रिय इंटरनेट सेवा की कम हिस्सेदारी ग्रामीण डिजिटल बदलाव की गति को प्रभावित कर सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां निजी इंटरनेट सेवाओं की पहुंच सीमित है, वहां सरकारी नेटवर्क का प्रभावी संचालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

CAG की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्रामीण विकास से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि केवल नेटवर्क कवरेज बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सेवाओं का वास्तविक और नियमित संचालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

आगे BharatNet की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इंफ्रास्ट्रक्चर और वास्तविक सेवा के बीच मौजूद अंतर को किस तरह कम किया जाता है।

Leave a comment