अमेरिका में 13 अगस्त को 16 साल बाद पहली बार एक ही दिन तीन राज्यों में तीन लोगों को मृत्युदंड दिया गया। टेनेसी, ओक्लाहोमा और अलबामा में lethal injection से हुई executions ने बढ़ती मौत की सजा और घटते जनसमर्थन पर बहस तेज कर दी।
वॉशिंगटन: अमेरिका में 13 अगस्त 2026 को 16 साल बाद पहली बार एक ही दिन तीन अलग-अलग राज्यों में तीन मौत की सजाएं अमल में लाई गईं। टेनेसी, ओक्लाहोमा और अलबामा में एंथनी डैरेल हाइन्स, कार्लोस कुएस्ता-रोड्रिगेज और जेरेमी विलियम्स को घातक इंजेक्शन के जरिए मौत दी गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका में मृत्युदंड के इस्तेमाल में पिछले वर्ष से तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
तीन राज्यों में एक ही दिन हुईं फांसी
13 अगस्त को अमेरिका में तीन अलग-अलग राज्यों ने मृत्युदंड की अपनी-अपनी प्रक्रियाओं के तहत सजाएं लागू कीं। टेनेसी में 66 वर्षीय एंथनी डैरेल हाइन्स को 1985 में एक मोटल कर्मचारी की हत्या के मामले में मौत दी गई। ओक्लाहोमा में 70 वर्षीय कार्लोस कुएस्ता-रोड्रिगेज को 2003 में अपनी साथी की हत्या के मामले में फांसी दी गई, जबकि अलबामा में 42 वर्षीय जेरेमी विलियम्स को पांच वर्षीय बच्ची के बलात्कार और हत्या के मामले में मृत्युदंड दिया गया। तीनों मामलों में घातक इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया।
एक ही दिन तीन राज्यों में executions होना अमेरिकी इतिहास में बेहद दुर्लभ है। इससे पहले जनवरी 2010 में ऐसा हुआ था। इस लिहाज से 13 अगस्त 2026 की घटनाएं अमेरिका में मृत्युदंड के मौजूदा दौर पर खास ध्यान खींच रही हैं।
2025 में मृत्युदंड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा
अमेरिका में मृत्युदंड की वापसी को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में फांसी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 में 25 लोगों को मौत की सजा दी गई थी, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 47 हो गई। 2025 का आंकड़ा 2009 के बाद अमेरिका में सबसे अधिक था। 13 अगस्त की तीन executions के बाद 2026 में अब तक कम से कम 22 लोगों को मौत दी जा चुकी थी।
इस बढ़ोतरी में फ्लोरिडा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है। 2025 में देशभर में हुई 47 executions में से 19 अकेले फ्लोरिडा में हुई थीं। राज्य में मृत्युदंड को लेकर सख्त रुख रखने वाले रिपब्लिकन गवर्नर रॉन डीसैंटिस के कार्यकाल में capital punishment का इस्तेमाल प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में रहा है।
ट्रंप प्रशासन की नीतियों से भी जुड़ी बहस
अमेरिका में मृत्युदंड की मौजूदा स्थिति को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से अलग करके देखना मुश्किल है। ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को पद संभालने के पहले दिन मृत्युदंड को मजबूत करने वाला कार्यकारी आदेश जारी किया था। आदेश में संघीय स्तर पर गंभीर अपराधों में death penalty की मांग को प्राथमिकता देने और राज्यों को lethal injection के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया गया था।
अप्रैल 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने भी संघीय मृत्युदंड को मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की। विभाग ने lethal injection प्रोटोकॉल को फिर अपनाने, firing squad जैसे अन्य तरीकों को शामिल करने और मृत्युदंड से जुड़े मामलों की आंतरिक प्रक्रियाओं को तेज करने की जानकारी दी।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति की नीतियों का executions की संख्या पर पूरा प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि मौत की सजा वाले मामलों में अपील और कानूनी प्रक्रियाएं कई वर्षों तक चल सकती हैं।
फ्लोरिडा बना मृत्युदंड के बढ़ते इस्तेमाल का केंद्र
अमेरिका में death penalty राज्यों और संघीय सरकार दोनों के अधिकार क्षेत्र में आती है। 2025 में फ्लोरिडा देश में executions का सबसे बड़ा केंद्र रहा। राज्य की सरकार ने मृत्युदंड के इस्तेमाल को लेकर कई नीतिगत बदलाव किए हैं।
फ्लोरिडा में 2023 में capital punishment की सिफारिश से जुड़ी jury प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। इसके अलावा कुछ गंभीर अपराधों को death penalty के दायरे में लाने के लिए कानूनों में परिवर्तन किए गए। समर्थकों का तर्क है कि सबसे गंभीर अपराधों के लिए मौत की सजा न्याय और अपराध रोकने का प्रभावी माध्यम हो सकती है।
वहीं, मानवाधिकार संगठनों और मृत्युदंड विरोधी समूहों का कहना है कि ऐसी सजा में न्यायिक गलती, भेदभाव और execution की प्रक्रिया में गंभीर समस्याओं का खतरा बना रहता है।
टेनेसी में पिछली असफल प्रक्रिया ने बढ़ाई चिंता
एंथनी हाइन्स की फांसी ने टेनेसी में execution की प्रक्रिया को लेकर पहले से चल रही बहस को भी सामने ला दिया। उनके वकीलों ने पहले राज्य की अदालत में इस आधार पर राहत मांगी थी कि अधिकारी जिस चिकित्सा प्रक्रिया का इस्तेमाल करने वाले थे, उससे जुड़ी पिछली execution में गंभीर समस्याएं सामने आई थीं।
मई 2026 में टेनेसी में टोनी कैरथर्स की lethal injection प्रक्रिया लंबे समय तक पूरी नहीं हो सकी थी। इस घटना के बाद राज्य की execution व्यवस्था और चिकित्सा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठे थे। इसके बावजूद राज्य प्रशासन ने अपने निर्धारित lethal injection प्रोटोकॉल को जारी रखने का फैसला किया।
हाइन्स के मामले में उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी उनके वकीलों ने चिंता जताई थी। इसके बावजूद अदालतों से अंतिम राहत नहीं मिल सकी और 13 अगस्त को सजा पर अमल कर दिया गया।
मौत की सजा पर अमेरिकी समाज की राय बदल रही
दिलचस्प बात यह है कि executions बढ़ने के बावजूद अमेरिकी समाज में मृत्युदंड को लेकर समर्थन पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। गैलप के मई 2026 के सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत अमेरिकियों ने death penalty को नैतिक रूप से स्वीकार्य बताया। यह 2025 के 56 प्रतिशत और 2006 के 71 प्रतिशत के स्तर से काफी कम है। वहीं 39 प्रतिशत लोगों ने इसे नैतिक रूप से गलत माना।
इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण एक समान नहीं है। जहां कुछ राज्यों में सरकारें executions को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन में लंबे समय से गिरावट देखी जा रही है।
मृत्युदंड वाले राज्यों की संख्या अब भी बड़ी
अमेरिका पश्चिमी देशों में उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां death penalty अभी भी कानूनी रूप से मौजूद है। कई राज्यों ने इसे समाप्त कर दिया है या executions पर रोक लगा रखी है, लेकिन बड़ी संख्या में राज्यों में यह कानून के तहत उपलब्ध है।
मृत्युदंड समर्थक इसे गंभीर हिंसक अपराधों के लिए अंतिम और उचित सजा मानते हैं। उनका तर्क है कि इससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलता है और बेहद गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश जाता है। दूसरी ओर, विरोधियों का कहना है कि किसी व्यक्ति की जान लेने की राज्य को दी गई शक्ति न्यायिक भूल की स्थिति में अपरिवर्तनीय परिणाम पैदा कर सकती है।
फांसी की प्रक्रिया भी बनी विवाद का मुद्दा
अमेरिका में बहस केवल इस बात पर नहीं है कि death penalty होनी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि इसे किस तरीके से लागू किया जाए। लंबे समय तक lethal injection प्रमुख तरीका रहा, लेकिन दवाओं की उपलब्धता, दवा कंपनियों की आपत्तियों और कुछ problematic executions के कारण कई राज्यों ने वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया है।
कुछ राज्यों में firing squad और nitrogen hypoxia जैसे तरीकों का इस्तेमाल भी हुआ है। इससे अमेरिका में मृत्युदंड के तरीके को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हुई है।
जूरी से मिलने वाली मौत की सजाओं में गिरावट
मृत्युदंड के इस्तेमाल में हालिया वृद्धि के बावजूद एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अमेरिकी जूरी पहले की तुलना में कम death sentences दे रही हैं। 1990 के दशक में देशभर में हर साल 300 से अधिक मौत की सजाएं सुनाई जाती थीं, जबकि हाल के वर्षों में यह संख्या काफी नीचे आ गई है।
इस विरोधाभास से अमेरिकी capital punishment व्यवस्था की जटिल तस्वीर सामने आती है। एक ओर कुछ राज्य पुराने मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद executions बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नए मामलों में death sentence देने की प्रवृत्ति पहले जैसी नहीं रही।
13 अगस्त को तीन लोगों को एक ही दिन मौत दिए जाने की घटना इसी बदलते परिदृश्य के बीच हुई है। यह घटनाक्रम बताता है कि अमेरिका में मृत्युदंड अभी भी न्याय व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इसके इस्तेमाल, तरीकों और नैतिक औचित्य को लेकर बहस लगातार जारी है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि executions की मौजूदा बढ़ोतरी स्थायी प्रवृत्ति बनती है या राज्यों और जनता के बदलते रुख के कारण इसमें फिर गिरावट आती है।













