देश के मौसम में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून किसी भी समय केरल में दस्तक दे सकता है, जिससे देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
नई दिल्ली: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने की संभावना है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत 17 राज्यों के लिए भारी बारिश, तेज आंधी और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन चुकी हैं। हालांकि इस वर्ष मानसून के आगमन में सामान्य से कुछ देरी देखी गई है, जिससे कृषि, जल संसाधन और मौसम संबंधी गतिविधियों पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
केरल में जल्द पहुंच सकता है मानसून
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून हर वर्ष जून की शुरुआत में केरल पहुंचता है और यहीं से पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी प्रगति शुरू होती है। इस बार मानसून के आगमन में कुछ दिनों की देरी हुई है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियां विकसित हो रही हैं।
मानसून के केरल में प्रवेश के बाद दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर भारत और तटीय क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इससे गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ जलाशयों और कृषि क्षेत्र को भी फायदा होगा।
उत्तर भारत में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक अस्थिर मौसम बना रहेगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भी तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ मध्यम वर्षा का दौर जारी रहने की उम्मीद है, जिससे कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में भी तेज हवाओं, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की गई है।

मध्य और पश्चिमी भारत में भी सक्रिय रहेगा मौसम
मध्य भारत के राज्यों में भी वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान है, जबकि राज्य के अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा जारी रह सकती है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। वहीं गुजरात में भी मौसम विभाग ने वर्षा और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व गतिविधियों के कारण इन क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है।
दक्षिण भारत मानसून के शुरुआती प्रभावों का सबसे पहले सामना करेगा। केरल और माहे क्षेत्र में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई हिस्सों में भी वर्षा गतिविधियां तेज हो सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है, जिसके चलते मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को भी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना
पूर्वी भारत के राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आगामी दिनों में मौसम सक्रिय रहेगा। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से ओडिशा में कुछ स्थानों पर तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जबकि बिहार और झारखंड में लगातार वर्षा के कारण जलभराव की स्थिति बन सकती है।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी व्यापक वर्षा गतिविधियों का अनुमान है। कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में वृद्धि और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
मानसून में देरी की वजह क्या है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष मानसून के आगमन में देरी के पीछे प्रमुख कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल-नीनो परिस्थितियां हो सकती हैं। अल-नीनो एक जलवायु घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है और भारत में मानसून की तीव्रता तथा समय को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की शुरुआत में हुई देरी का मतलब यह नहीं है कि पूरे मौसम के दौरान वर्षा कम होगी। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति और वर्षा वितरण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।










