भारत में LPMS लॉन्च: लैंड पोर्ट्स पर सीमा व्यापार और कस्टम प्रक्रिया में डिजिटल क्रांति

भारत सरकार ने LPMS सिस्टम लॉन्च किया, जिससे अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम लैंड पोर्ट पर व्यापार डिजिटल होगा। सीमा व्यापार और प्रबंधन में बड़ा सुधार होगा।

भारत सरकार ने LPMS सिस्टम लॉन्च किया, जिससे अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम लैंड पोर्ट पर व्यापार डिजिटल होगा। सीमा व्यापार और प्रबंधन में बड़ा सुधार होगा।

अगरतला: भारत सरकार सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Land Port Management System (LPMS) लॉन्च करने जा रही है। इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ 9 जून 2026 को नई दिल्ली में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा उद्घाटन किए जाने की संभावना है।

यह पहल देश के भूमि बंदरगाहों (Land Ports) के संचालन को एकीकृत और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है।

सीमा प्रबंधन और व्यापार में डिजिटल बदलाव की शुरुआत

LPMS को एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य देश के सभी प्रमुख लैंड पोर्ट्स की प्रक्रियाओं को एक ही सिस्टम में जोड़ना है। इस सिस्टम के जरिए सीमा पर होने वाला व्यापार, यात्रियों की आवाजाही और माल ढुलाई से जुड़ी सभी गतिविधियां डिजिटल रूप से नियंत्रित और मॉनिटर की जाएंगी।

इससे कस्टम क्लियरेंस, लॉजिस्टिक्स ट्रैकिंग, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और भुगतान प्रणाली पूरी तरह ऑनलाइन और रियल-टाइम हो जाएगी।

ICEGATE और ULIP जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेशन

LPMS को भारत सरकार के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे ICEGATE (Indian Customs Electronic Gateway) और ULIP (Unified Logistics Interface Platform) के साथ एकीकृत किया गया है। इसके अलावा इसे मोटर वाहन सिस्टम से भी जोड़ा गया है।

इस इंटीग्रेशन से विभिन्न सरकारी एजेंसियों और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियों के बीच डेटा का आदान-प्रदान आसान होगा और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे कागजी कार्यवाही कम होगी और प्रक्रियाएं अधिक तेज और सटीक बनेंगी।

त्रिपुरा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहल

यह योजना पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारत-बांग्लादेश व्यापार का प्रमुख प्रवेश द्वार है। त्रिपुरा के अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम लैंड पोर्ट इस व्यापारिक नेटवर्क में अहम भूमिका निभाते हैं।

LPMS लागू होने के बाद इन सभी लैंड पोर्ट्स पर माल की आवाजाही, कस्टम प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था अधिक सुगम और डिजिटल हो जाएगी। इससे सीमा व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

श्रीमंतपुर लैंड पोर्ट पर नई सुविधाओं का उद्घाटन

इस अवसर पर श्रीमंतपुर लैंड पोर्ट पर विकसित की गई नई स्टेकहोल्डर आवास सुविधा का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह सुविधा सीमा पर काम करने वाले विभिन्न हितधारकों जैसे सुरक्षा कर्मियों, कस्टम अधिकारियों, व्यापारियों, ट्रक ड्राइवरों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए बनाई गई है।

इस सुविधा से सीमा पर कार्यरत लोगों को बेहतर आवास और कार्य वातावरण मिलेगा, जिससे संचालन अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सकेगा।

कस्टम और लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी

LPMS के लागू होने के बाद कस्टम क्लियरेंस प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। स्लॉट बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान, कार्गो ट्रैकिंग और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

इससे समय की बचत होगी, मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और व्यापारिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही सीमा पर होने वाली देरी और जटिलताओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

सीमा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में सुधार

यह सिस्टम केवल व्यापार को ही नहीं, बल्कि सीमा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। रियल-टाइम डेटा एक्सचेंज और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।

इससे अवैध व्यापार, तस्करी और अनधिकृत आवागमन पर नियंत्रण करने में सुरक्षा एजेंसियों को अधिक मदद मिलेगी।

भारत-बांग्लादेश व्यापार को मिलेगा नया आयाम

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार में भूमि बंदरगाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। LPMS लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात प्रक्रिया अधिक तेज और व्यवस्थित हो जाएगी।

कृषि उत्पाद, निर्माण सामग्री, मशीनरी और अन्य वस्तुओं की आवाजाही आसान होने से व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सरकार का मानना है कि LPMS जैसे डिजिटल सुधार भारत को “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के करीब ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

यह प्रणाली न केवल व्यापार और लॉजिस्टिक्स को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी।

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