सुप्रीम कोर्ट ने आज, गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े मामले में मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परिसर के पास शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने संबंधी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित परिसर के निकट शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने से संबंधित मुस्लिम पक्ष की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का राज्य प्रशासन द्वारा पूरी तरह पालन नहीं किया गया है।
यह मामला धार्मिक आस्था, प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक निर्देशों के पालन से जुड़ा होने के कारण लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संभावित निर्देशों पर टिकी है।
क्या है पूरा मामला?
भोजशाला परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच धार्मिक उपयोग को लेकर विवाद का केंद्र रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अंतिम फैसला आने तक धार्मिक गतिविधियों के संचालन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अदालत ने विवादित परिसर के निकट शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक खुला स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासन द्वारा जो स्थान उपलब्ध कराया गया है, वह न तो सुविधाजनक है और न ही अदालत की भावना के अनुरूप। इसी आधार पर मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर न्यायालय के आदेशों के पालन की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करने की सहमति दी है। इससे पहले भी याचिका का उल्लेख अदालत में किया गया था, लेकिन समयाभाव के कारण उस दिन विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित विधि अधिकारी से पूछा कि वैकल्पिक नमाज स्थल का स्पष्ट विवरण याचिकाकर्ता को क्यों नहीं दिया गया। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि पहले दिए गए निर्देशों के पालन में कोई कमी है तो उस पर स्पष्टीकरण आवश्यक होगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रशासन द्वारा प्रस्तावित स्थल विवादित परिसर से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है। उनका तर्क है कि यह स्थान न्यायालय के पूर्व निर्देशों की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि, प्रशासन ने केवल एक ही वैकल्पिक स्थल निर्धारित किया है।
यह स्थान नमाजियों के लिए व्यावहारिक रूप से उपयुक्त नहीं है। विवादित परिसर के निकट अन्य खुली जमीन उपलब्ध है, जिसे वैकल्पिक स्थल के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अदालत के पूर्व आदेश का वास्तविक पालन नहीं किया गया है। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
राज्य सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक अन्य स्थान की भी पहचान की है। सरकार का कहना है कि स्थानीय प्रशासन न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस नए प्रस्तावित स्थान पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि वह भी पर्याप्त रूप से उपयुक्त नहीं है और विवादित परिसर से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर स्थित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद किस प्रकार का निर्देश जारी करती है।
पिछली सुनवाई में क्या निर्देश दिए गए थे?
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित परिसर के निकट एक अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच निर्धारित स्थान पर अदा की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों समुदायों की धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना था।
भोजशाला विवाद भारत के उन संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल है, जहां विभिन्न समुदायों के धार्मिक दावों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रश्न न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर यथास्थिति बनाए रखने, सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर देती हैं।











