भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, मुस्लिम पक्ष की याचिका पर जारी किया नोटिस

Bhojshala Dispute: भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका पर नोटिस जारी किया है। जानें कोर्ट की टिप्पणी

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि भोजशाला परिसर से सटी खुली जगह मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार की नमाज के लिए उपलब्ध कराई जाए।

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने फिलहाल परिसर के भीतर शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं दी है, लेकिन राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मुस्लिम पक्ष के लिए परिसर के निकट एक अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां वे निर्धारित समय के दौरान नमाज अदा कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है और वर्तमान निर्देश अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों के हितों तथा कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं।

मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

यह मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

नमाज के लिए खुले स्थान की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए भोजशाला परिसर के निकट एक अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां वे शांतिपूर्वक नमाज अदा कर सकें। अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था दोनों पक्षों के अधिकारों और संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल भोजशाला परिसर के भीतर नमाज अदा करने पर लगी रोक जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि अंतिम निर्णय से पहले यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले की अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार का ऐसा कदम नहीं उठाया जाए जिससे विवाद और बढ़े या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो।

ASI को दिए गए अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई संरचनात्मक या ढांचागत परिवर्तन नहीं करेगा। इस निर्देश का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थल की वर्तमान स्थिति को बनाए रखना और विवाद के अंतिम निपटारे तक किसी भी प्रकार के बदलाव से बचना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो। अदालत ने राज्य प्रशासन को भी आवश्यक सुरक्षा और प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि न्यायिक आदेशों का शांतिपूर्वक पालन हो सके।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को अपने फैसले में कहा था कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है। हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

इसी फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई लगभग तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक वर्तमान अंतरिम व्यवस्था प्रभावी रहेगी। अदालत के समक्ष आने वाले चरण में दोनों पक्ष अपने विस्तृत तर्क प्रस्तुत करेंगे, जिसके बाद इस विवाद से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

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