ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता कोर्ट की सुनवाई पूरी हो गई। मंदिर और मस्जिद, दोनों पक्षों ने समझौते से इनकार करते हुए कहा कि वे न्यायालय के अंतिम निर्णय को स्वीकार करेंगे। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
वाराणसी: ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों में मध्यस्थता कोर्ट की सुनवाई मंगलवार को पूरी हो गई। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने किसी भी प्रकार के समझौते से इनकार कर दिया और कहा कि वे अदालत के अंतिम निर्णय का सम्मान करेंगे। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई।
मध्यस्थता में नहीं बनी सहमति
ज्ञानवापी विवाद से संबंधित चार अलग-अलग पत्रावलियों पर मध्यस्थता कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान मंदिर और मस्जिद, दोनों पक्षों के प्रतिनिधि और अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी पक्षों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे आपसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं और विवाद का समाधान केवल न्यायालय के निर्णय के माध्यम से ही होना चाहिए।

सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। अब मामले की सुनवाई संबंधित अदालतों में पूर्व निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।
दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम
मंदिर पक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका दावा पहले जैसा ही है और उनका मानना है कि संबंधित स्थल मंदिर है, जहां पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर के तलगृह में पहले से पूजा जारी है और वे अपने दावों को अदालत में आगे भी रखेंगे।
वहीं, मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद समिति के प्रतिनिधि और अधिवक्ता भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हुए। उन्होंने भी किसी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि विवाद का समाधान न्यायालय के अंतिम फैसले के आधार पर ही होना चाहिए।
लंबे समय से अदालतों में विचाराधीन है मामला
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी परिसर से जुड़ा विवाद कई वर्षों से विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है। मंदिर पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर के नीचे प्राचीन मंदिर के अवशेष मौजूद हैं, जबकि मस्जिद पक्ष इस स्थान को वक्फ संपत्ति बताते हुए पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का हवाला देता है।
मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का सर्वे भी कराया जा चुका है, जिसकी रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी कानूनी दलीलें दे रहे हैं। फिलहाल यह विवाद वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से लंबित है।
अब अदालत के फैसले पर रहेगी नजर
मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अदालतों में होगी। चूंकि दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार नहीं हुए हैं, इसलिए विवाद का अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही तय होगा। सभी पक्षों ने अदालत के अंतिम निर्णय का सम्मान करने की बात कही है।










