भोपाल नगर निगम के सर्वे में पुराने शहर की 1,500 जर्जर इमारतों की पहचान हुई है। इनमें 242 भवन ऐसे हैं, जिन पर मानसून के दौरान गिरने का गंभीर खतरा है। प्रशासन ने 2,000 से अधिक नोटिस जारी किए हैं।
भोपाल: मानसून के आगमन से पहले भोपाल नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। पुराने शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में जर्जर इमारतें चिन्हित की गई हैं, जिनमें से सैकड़ों भवन भारी बारिश के दौरान खतरा पैदा कर सकते हैं। प्रशासन ने मकान मालिकों को नोटिस जारी कर सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
पुराने शहर में 1,500 जर्जर भवनों की पहचान
भोपाल नगर निगम (BMC) द्वारा कराए गए सर्वे में पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 1,500 जर्जर और खस्ताहाल इमारतों की पहचान की गई है। बैरसिया रोड, बुधवारा, इतवारा, जहांगीराबाद, सुल्तानिया रोड और हमीदिया रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे भवन मौजूद हैं, जिनकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 242 इमारतें अत्यधिक कमजोर हैं और आगामी मानसून के दौरान इनके ढहने का गंभीर खतरा बना हुआ है। ऐसे भवनों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।
2,000 से ज्यादा नोटिस जारी, फिर भी लोग नहीं छोड़ रहे मकान
नगर निगम ने संभावित हादसों को रोकने के लिए असुरक्षित भवनों के मालिकों और निवासियों को 2,000 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। नोटिस के माध्यम से लोगों को भवन खाली करने और आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, चेतावनी के बावजूद कई परिवार अब भी इन जर्जर मकानों में रह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा को देखते हुए बार-बार जागरूक किया जा रहा है, लेकिन कई स्थानों पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इसी वजह से मानसून के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है।
वार्ड 40 में सबसे अधिक खतरनाक मकान
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर के 85 वार्डों में से 31 वार्ड ऐसे हैं जहां जर्जर भवनों की समस्या गंभीर रूप से मौजूद है। इनमें वार्ड 40 सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में सामने आया है, जहां करीब 600 जर्जर मकान दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा वार्ड 14 में 79, वार्ड 18 में 70 और वार्ड 28 में 61 खतरनाक भवन चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन इन इलाकों पर विशेष निगरानी रख रहा है और स्थानीय अधिकारियों को लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इंदौर हादसे के बाद शुरू हुई थी विशेष कार्रवाई
मार्च 2023 में इंदौर में हुई बावड़ी दुर्घटना के बाद प्रदेशभर में जर्जर संरचनाओं की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया था। इसी क्रम में भोपाल में भी पुराने भवनों, ओवरहेड टैंकों, बावड़ियों और अन्य असुरक्षित ढांचों का सर्वे कराया गया।
सर्वे में यह भी सामने आया कि शहर के 977 अत्यधिक जर्जर मकानों में करीब 4,000 लोग रह रहे हैं। नगर निगम ने ऐशबाग स्टेडियम के पीछे स्थित जनता क्वार्टर्स को भी कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है और इस मामले में संबंधित विभागों से जवाब मांगा गया है।
प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए जोखिम वाले भवनों की लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें और असुरक्षित इमारतों में रहने से बचें।









