बिहार में इस बार मौसम को लेकर चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि राज्य में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है। इसके साथ ही भीषण गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
जानकारों के मुताबिक इस सीजन में लगभग 30 दिन तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। तापमान कई जिलों में 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है।
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जून और जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ने की आशंका है।
बिहार के कई हिस्सों में अभी से तेज धूप और गर्म हवाओं का असर दिखाई देने लगा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी पड़ जा रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश में बड़ी कमी होती है तो सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। इसका असर धान, मक्का और दूसरी फसलों की बुआई पर पड़ सकता है। किसान समुदाय के बीच इसे लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
भीषण गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और कमजोरी की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
कई जिलों में जलस्तर गिरने की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम बारिश होने पर पेयजल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी लोग भीषण गर्मी और बारिश की कमी को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने खेतों की सूखी तस्वीरें और तपती सड़कों के वीडियो साझा किए हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। हीटवेव और सूखे जैसी स्थितियां अब पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर होती जा रही हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासनिक एजेंसियां संभावित हालात से निपटने की तैयारी में जुट गई हैं। जिलों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं।








