बेगूसराय: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शिक्षा विभाग के एक डिप्टी डायरेक्टर के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने का मामला सामने आया है। पटना स्थित आवास से 30 लाख रुपये से अधिक कैश बरामद किया गया है, जबकि बेगूसराय में करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही कोठी से 4.50 लाख रुपये नकद मिले हैं। दोनों जगह हुई कार्रवाई में कुल बरामद नकदी 35 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसी की टीम ने अधिकारी से जुड़े अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान घर में मौजूद दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
पटना में अधिकारी के आवास पर हुई तलाशी के दौरान सबसे अधिक नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। यहां से 30 लाख रुपये से ज्यादा कैश मिला है। टीम ने बरामद रकम को जब्त कर लिया है और नकदी के स्रोत से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच अधिकारियों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घर में इतनी बड़ी रकम किस उद्देश्य से रखी गई थी और इस रकम का स्रोत क्या है। यदि अधिकारी इस नकदी का वैध स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाते हैं तो जांच आगे बढ़ सकती है।
वहीं बेगूसराय स्थित ठिकाने से 4.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह संपत्ति करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की है। इतनी महंगी संपत्ति में नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसी संपत्ति के निर्माण, खरीद और आय के स्रोत से जुड़े दस्तावेज भी खंगाल रही है।
बेगूसराय में जिस कोठी की तलाशी ली गई, उसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि अधिकारी की घोषित आय और उसकी संपत्ति के बीच कितना अंतर है। इसके लिए वेतन, बैंक लेनदेन, निवेश, जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियों का रिकॉर्ड देखा जा सकता है।
छापेमारी के दौरान टीम ने सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जुटाए हैं। बैंक पासबुक, संपत्ति के कागजात, लॉकर से संबंधित जानकारी और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इन दस्तावेजों के आधार पर अधिकारी की कुल संपत्ति और आय के स्रोत का मिलान किया जाएगा।
शिक्षा विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से विभागीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि अधिकारी के कार्यकाल के दौरान किन-किन मामलों में वित्तीय निर्णय लिए गए और उनकी भूमिका क्या रही।
यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या भ्रष्टाचार से संबंधित कोई तथ्य सामने आता है तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि अभी बरामद नकदी और संपत्ति के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद रकम का वास्तविक स्रोत क्या था।
पटना और बेगूसराय में एक साथ हुई कार्रवाई को लेकर यह भी चर्चा है कि जांच एजेंसी के पास अधिकारी की संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहले से कुछ इनपुट रहे होंगे। हालांकि कार्रवाई के आधार और आरोपों की विस्तृत जानकारी आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगी।
बेगूसराय की कथित 5 करोड़ रुपये की कोठी भी जांच के दायरे में है। अगर संपत्ति अधिकारी की आय के मुकाबले काफी अधिक पाई जाती है तो एजेंसी उसके निर्माण या खरीद में खर्च हुई रकम के स्रोत की जांच कर सकती है। इसके लिए जमीन की खरीद, निर्माण लागत, ठेकेदारों को भुगतान और बैंक ट्रांजैक्शन जैसे रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
पटना में बरामद 30 लाख रुपये से अधिक नकदी भी जांच का अहम हिस्सा है। सामान्य तौर पर किसी सरकारी अधिकारी के आवास से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने पर उसके स्रोत और इस्तेमाल की वजह की जांच की जाती है। अधिकारी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
वहीं बेगूसराय से मिले 4.50 लाख रुपये को भी जब्त कर उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया है। दोनों स्थानों से बरामद रकम और दस्तावेजों का आपस में मिलान किया जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संपत्ति और नकदी के बीच कोई वित्तीय संबंध है या नहीं।
इस तरह की जांच में बैंक खातों की पड़ताल बेहद महत्वपूर्ण होती है। पिछले कुछ वर्षों में अधिकारी की आय, खर्च और संपत्ति से जुड़े लेनदेन को देखकर यह पता लगाया जाता है कि घोषित आय के मुकाबले संपत्ति और नकदी कितनी है।
कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी अधिकारी की भूमिका की समीक्षा हो सकती है। यदि जांच में कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक मामला भी आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल पटना से 30 लाख रुपये से अधिक और बेगूसराय से 4.50 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई है। इसके अलावा करीब 5 करोड़ रुपये की बताई जा रही संपत्ति भी जांच के केंद्र में है। जांच एजेंसी की तलाशी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के घर इतनी बड़ी रकम और करोड़ों की संपत्ति का स्रोत क्या है। अब जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड यह तय करेंगे कि यह मामला आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार या किसी अन्य वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है या नहीं।










