बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा।
पटना: बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य और केंद्र की एनडीए सरकार पर राहत कार्यों में कथित लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता देने, किसानों की फसल क्षति का आकलन कराने और केंद्र से विशेष राहत पैकेज उपलब्ध कराने की मांग की।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इससे पहले भी वह बाढ़ की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और केंद्र से वित्तीय सहायता देने की मांग कर चुके हैं। सितंबर के मध्य में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के लगभग 15 जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित थे।
सरकार पर राहत व्यवस्था को लेकर लगाए आरोप
पटना स्थित अपने आवास पर संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार एक साथ बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण फसलों को नुकसान हुआ है, जबकि अन्य इलाकों में बाढ़ का पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
RJD नेता ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर सामुदायिक रसोई और राहत शिविर पर्याप्त धन के अभाव में जल्द बंद कर दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं या जिनका घरेलू सामान पानी में बह गया है, उन्हें राहत शिविर बंद होने के बाद सहायता कैसे मिलेगी। उन्होंने राहत वितरण के दौरान आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की मांग से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से संबंधित सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
आकस्मिक निधि और राहत बजट पर सवाल

तेजस्वी यादव ने राज्य की आकस्मिक निधि को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राज्य के खजाने का इस्तेमाल सबसे पहले प्रभावित लोगों की मदद के लिए होना चाहिए। RJD नेता ने आरोप लगाया कि सरकार के पास बाढ़ पीड़ितों को पर्याप्त सहायता देने के लिए संसाधनों की कमी बताई जा रही है।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि बिहार की आकस्मिक निधि में कितनी राशि उपलब्ध है और उसका इस्तेमाल किन मदों में किया गया। इन दावों के संबंध में आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों या सरकार की प्रतिक्रिया को सार्वजनिक रूप से सामने लाना जरूरी होगा।
फसल बर्बादी का आकलन कराने की मांग
तेजस्वी ने दावा किया कि बाढ़ के कारण धान, मक्का, सब्जियों और केले की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रभावित किसानों के लिए सर्वेक्षण कराने और जल्द मुआवजा देने की मांग की। साथ ही, कम बारिश वाले क्षेत्रों में सूखे से प्रभावित किसानों की स्थिति का भी आकलन करने की अपील की। उनके मुताबिक, बाढ़ और सूखे दोनों परिस्थितियों से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए जिला स्तर पर नुकसान का पारदर्शी सर्वेक्षण आवश्यक है।
तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया है। उन्होंने दौरे से संबंधित रिपोर्ट, राहत योजना और पुनर्वास संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। केंद्र की ओर से बिहार को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
15 हजार रुपये की सहायता की मांग
तेजस्वी यादव ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष और पीएम केयर्स फंड से बिहार को सहायता दिए जाने पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों पर खर्च को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की आलोचना की।
उनका तर्क था कि बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना ऐसे आयोजनों से अधिक जरूरी है। यह खर्च से जुड़ा आरोप है और इसकी पुष्टि के लिए आधिकारिक बजट या आयोजन संबंधी दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।










