क्या बेटे को मंत्री बनाने के लिए नीतीश कुमार राजी हो गए? क्या निशांत कुमार भी मंत्री बनने के लिए तैयार हैं? खबर है कि देर रात जेडीयू नेताओं ने नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत को मंत्री पद के लिए मना लिया है।
पटना: बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की चर्चा के बीच राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 7 मई को पटना के ऐतिहासिक Gandhi Maidan में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह से पहले कई अहम नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा Nishant Kumar को लेकर है, जो कथित तौर पर मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
क्या नीतीश कुमार ने बेटे के लिए दी सहमति?
सूत्रों के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के आवास पर जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की लगातार बैठकें चल रही हैं। इन बैठकों में पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा निशांत कुमार को सरकार में शामिल करने के लिए मनाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे विचार-विमर्श और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए निशांत कुमार ने कथित तौर पर सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाने के लिए सहमति दे दी है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बिहार में होने वाले इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। 7 मई को गांधी मैदान में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में कुल 27 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। संभावित कैबिनेट फॉर्मूला:
- Bharatiya Janata Party: 12 मंत्री पद
- Janata Dal (United): 11 मंत्री पद (निशांत कुमार सहित)
- Lok Janshakti Party (Ram Vilas): 2 मंत्री पद
- Hindustani Awam Morcha और अन्य सहयोगी दल: 1-1 पद
इसके अलावा कुछ सीटें भविष्य के राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए खाली रखी जा सकती हैं।
![]()
जेडीयू नेताओं की सक्रियता तेज
जेडीयू के वरिष्ठ नेता लगातार मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद हैं। केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh Lalan Singh दिल्ली से पटना पहुंच चुके हैं और लगातार बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा Sanjay Kumar Jha और उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha सहित कई वरिष्ठ नेता भी फाइनल लिस्ट को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
निशांत कुमार लंबे समय से राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में बहुत कम सक्रिय दिखाई दिए हैं। वह फिलहाल “सद्भावना यात्रा” के तहत बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं, जहां वे बिना किसी राजनीतिक प्रचार या ब्रांडिंग के लोगों से मिल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि जेडीयू नेताओं ने उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनका सक्रिय होना पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।










