पटना में शनिवार को बिहार की राजनीति का अहम दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री आवास पर वर्तमान मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से मुलाकात की। यह बैठक देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास पर हुई और करीब 20 मिनट तक चली।
पटना: Bihar की राजनीति में जारी हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने शनिवार को देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली, जिसमें राज्य और देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ सरकार के कामकाज पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बिहार में हाल के दिनों में राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
पहली औपचारिक मुलाकात बनी चर्चा का विषय
15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह पहली बार था जब नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी आमने-सामने मिले। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सौहार्दपूर्ण रहा। दोनों नेताओं के बीच राज्य और देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, प्रशासनिक कामकाज और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री स्तर के नेताओं की मौजूदगी भी रही, जहां विकास और शासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुलाकात की तस्वीरें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर साझा कीं। तस्वीरों में नीतीश कुमार मुस्कुराते और सहज नजर आए। एक तस्वीर में नीतीश कुमार को सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए देखा गया, जो दोनों नेताओं के बीच सौहार्द और राजनीतिक सहयोग का संकेत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी ने पोस्ट में लिखा कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

राजनीतिक संकेतों से भरी मुलाकात
इस मुलाकात को केवल औपचारिक बैठक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में हाल ही में सत्ता परिवर्तन के बाद यह बैठक नई सरकार और पुराने नेतृत्व के बीच समन्वय का संकेत देती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मुलाकातें राज्य में स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
बैठक के दौरान बिहार की बहुचर्चित शराबबंदी नीति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में शराबबंदी कानून पूरी तरह लागू रहेगा और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह नीति पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच का हिस्सा रही है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में भी इस कदम को सकारात्मक माना गया है।
शराबबंदी पर बढ़ती बहस
हालांकि, राज्य में इस नीति को लेकर लगातार बहस जारी है। कई जनप्रतिनिधियों का मानना है कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी है और इससे सामाजिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। जदयू विधायक Anant Singh सहित कुछ नेताओं ने इस नीति की समीक्षा की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे समाज में नशे के अन्य खतरनाक रूपों को बढ़ावा मिल रहा है।
इन तमाम चर्चाओं के बावजूद सरकार ने संकेत दिया है कि शराबबंदी नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह नीति सामाजिक सुधार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और इसे सख्ती से लागू रखा जाएगा।












