बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान तेज हो गया है। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से पहले ही राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएँ चल रही हैं।
Bihar Politics: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव होने हैं, जिसके मद्देनजर एनडीए और महागठबंधन अपनी-अपनी रणनीतियों में जुटे हैं। चार सीटों पर एनडीए की स्थिति मजबूत है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर भी JDU के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया है। उन्होंने कहा कि एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने में सफल होगा और राजद के कई विधायक JDU के संपर्क में हैं।
मीडिया से बात करते हुए नीरज कुमार ने कहा कि जनता ने एनडीए को प्रचंड जनादेश दिया है। उनके अनुसार, यह लहर तेजस्वी यादव के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित होगी।
एनडीए की स्थिति मजबूत, पांचवीं सीट पर नजर
चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट पर भी सभी की निगाहें हैं। नीरज कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनडीए पांचों सीटें जीतने की स्थिति में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजद के कई विधायक जदयू के संपर्क में हैं और उनके आने से महागठबंधन की स्थिति कमजोर हो सकती है।
नीरज कुमार ने कहा, “जनता ने एनडीए को प्रचंड जनादेश दिया है। यह लहर महागठबंधन, खासकर तेजस्वी यादव के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। राजद के अंदरूनी मतभेद उनके विधायकों में बेचैनी पैदा कर रहे हैं।

राजद विधायकों में बेचैनी
जदयू नेता ने खुलासा किया कि राजद में अंदरूनी कलह के कारण उनके विधायक अनिश्चितता में हैं। नीरज कुमार के अनुसार, “राजद में काम करना राजनीति में कत्ल की तरह हो गया है। सहयोगी दल राजद द्वारा थोपे गए उम्मीदवार के समर्थन को लेकर संशय में हैं। इस बीच यह भी कहा गया कि राजद के विधायकों की जदयू में एंट्री फिलहाल “वेटिंग लिस्ट” में है और आगे की प्रक्रिया आरएसी (Recommendation and Approval Committee) के बाद तय होगी। नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि अभी इस मामले पर कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता।
राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए के अंदर भी राजनीति गर्म है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राज्यसभा की सीट नहीं मिली, तो वह गठबंधन छोड़ सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि एनडीए को अपने सहयोगियों को संतुष्ट रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। महागठबंधन के पास राज्यसभा सीटों के लिए आवश्यक प्रस्तावों की संख्या पर्याप्त नहीं है। नीरज कुमार ने बताया कि महागठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं में असंतोष है, जिससे उनकी रणनीति पर असर पड़ सकता है। इस तरह राजद और उसके गठबंधन की स्थिति इस चुनाव में काफी कमजोर नजर आ रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि राजद के विधायक जदयू में शामिल होते हैं, तो राज्यसभा चुनाव में एनडीए की स्थिति और मजबूत हो जाएगी। इससे महागठबंधन के लिए न केवल सीटें जीतना मुश्किल होगा, बल्कि उनके अंदरूनी मतभेद और भी उजागर हो सकते हैं।












