हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया है। अब नशा तस्करी और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सिर्फ पुलिस स्तर पर मुकदमे और गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके सरकारी और वन भूमि पर किए गए कथित अवैध कब्जों की भी जांच की जाएगी। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके कब्जों की जांच कर एक महीने के भीतर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य फोकस उन लोगों पर है, जिनके खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी या अवैध कारोबार से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं और जिनके बारे में यह जानकारी मिलती है कि उन्होंने सरकारी या वन भूमि पर कब्जा कर रखा है। संबंधित विभागों को ऐसे मामलों की सूची तैयार करने, जमीन के रिकॉर्ड की जांच करने और मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने के लिए कहा गया है। इसके बाद यदि कब्जा नियमों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित कानून और नियमों के तहत उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक महीने की समयसीमा तय की है। इसका मतलब है कि विभागों को पहले नशे से जुड़े मामलों में संलिप्त लोगों की पहचान करनी होगी और फिर यह देखना होगा कि उनके नाम या कब्जे में सरकारी अथवा वन भूमि तो नहीं है। इसके बाद भूमि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि इस प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए और निर्धारित अवधि में रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाए।
इस कार्रवाई में संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सरकारी भूमि से जुड़े मामलों और वन भूमि पर हुए कथित कब्जों की पहचान संबंधित विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार करेंगे। प्रशासनिक स्तर पर केवल आरोप या किसी व्यक्ति के नशे के मामले में शामिल होने के आधार पर जमीन खाली नहीं कराई जाएगी, बल्कि कब्जे की स्थिति और भूमि रिकॉर्ड की जांच के बाद ही नियमानुसार कदम उठाया जाएगा। इस प्रक्रिया में दस्तावेजों और मौके की स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रशासन का यह कदम नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को संपत्ति और भूमि से जोड़कर देखने की दिशा में है। अब जांच का एक हिस्सा यह भी होगा कि नशे के अवैध कारोबार से जुड़े किसी व्यक्ति ने सरकारी संसाधनों या भूमि पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा तो नहीं कर रखा है। यदि जांच में ऐसा सामने आता है तो संबंधित विभाग अपने अधिकार क्षेत्र के तहत कार्रवाई करेंगे। इससे प्रशासन को नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में वित्तीय और संपत्ति संबंधी पहलुओं की भी पड़ताल करने का रास्ता मिलेगा।
बिलासपुर जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई भी लगातार जारी है। इसी बीच 21 सितंबर की एक अन्य कार्रवाई में बिलासपुर पुलिस की स्पेशल डिटेक्शन टीम ने कैंची मोड़ के पास नाकाबंदी के दौरान करीब 60 ग्राम चिट्टा बरामद कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान धर्मशाला निवासी ओम प्रकाश के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि आरोपी इस खेप को बिलासपुर क्षेत्र में बेचने की फिराक में था। मामले में स्वारघाट थाने में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
जिला प्रशासन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक नशे से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। बिलासपुर जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी या इससे संबंधित गतिविधियों में 10 सरकारी कर्मचारियों के संलिप्त पाए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें से छह कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किए जाने की बात सामने आई है, जबकि चार कर्मचारियों के मामलों में विभागीय जांच की प्रक्रिया चल रही है।
सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई को प्रशासन नशे के खिलाफ अपनी सख्ती का हिस्सा मान रहा है। इसका संकेत यह है कि नशे से जुड़े मामलों में व्यक्ति की पहचान या पेशे की परवाह किए बिना संबंधित विभागीय कार्रवाई की जा रही है। हालांकि किसी कर्मचारी या व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
बिलासपुर प्रशासन के अनुसार नशे के मामलों में संलिप्त लोगों की भूमि की जांच के आदेश दिए गए हैं। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि यदि किसी नशा तस्कर ने सरकारी या वन भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है तो एक महीने के भीतर ऐसे मामलों की रिपोर्ट तैयार करने और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में भूमि रिकॉर्ड की जांच सबसे अहम होगी। कई बार सरकारी और वन भूमि पर लंबे समय से कब्जे होने के कारण वास्तविक स्थिति मौके पर जाकर ही स्पष्ट होती है। इसलिए विभागों को रिकॉर्ड देखने के साथ स्थल निरीक्षण भी करना होगा। यदि रिकॉर्ड में भूमि सरकारी या वन विभाग की पाई जाती है और मौके पर किसी व्यक्ति का अनधिकृत कब्जा मिलता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार नोटिस और आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन की ओर से एक महीने की समयसीमा तय किए जाने से अब संबंधित विभागों पर भी कार्रवाई जल्द पूरी करने का दबाव रहेगा। विभागों को पहले संदिग्ध मामलों की पहचान करनी होगी, फिर उनकी पुष्टि करनी होगी और इसके बाद कार्रवाई की रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगी। इससे यह भी पता चलेगा कि नशे से जुड़े मामलों में कितने लोगों ने सरकारी या वन भूमि पर कब्जा कर रखा है।
नशे के खिलाफ अभियान में संपत्ति संबंधी कार्रवाई का उद्देश्य केवल कब्जा हटाना नहीं बल्कि अवैध गतिविधियों से जुड़े संसाधनों पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाना भी है। यदि किसी व्यक्ति ने नशे के कारोबार से जुड़े रहते हुए सरकारी जमीन पर निर्माण या कब्जा किया है, तो उस पर अलग से भूमि कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित रिकॉर्ड, साक्ष्य और लागू नियमों के आधार पर ही होगी।
बिलासपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार जिले में चार उपमंडल, सात तहसील-उपतहसील और नौ पुलिस स्टेशन हैं। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारी और वन भूमि से जुड़े मामलों की पहचान के लिए प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर समन्वय जरूरी होगा।
इस कार्रवाई के साथ प्रशासन का संदेश यह है कि नशे के अवैध कारोबार को केवल पुलिसिंग के स्तर पर नहीं देखा जाएगा। नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आरोपी या संदिग्ध लोगों की संपत्ति और भूमि संबंधी स्थिति भी जांची जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किए हुए पाया जाता है तो संबंधित विभाग उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई कर सकते हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ नशे से जुड़े मामले में आरोपी होना और किसी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा साबित होना दो अलग-अलग कानूनी मुद्दे हैं। इसलिए प्रशासन को दोनों मामलों में अलग-अलग रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी होगी। भूमि खाली कराने से पहले संबंधित जमीन का स्वामित्व, कब्जे की प्रकृति और लागू नियमों की जांच जरूरी होगी।
स्थानीय स्तर पर इस अभियान का असर आने वाले दिनों में दिखाई दे सकता है। विभागों द्वारा सूची तैयार होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बिलासपुर जिले में नशे से जुड़े कितने लोगों के खिलाफ सरकारी या वन भूमि पर कब्जे की जांच की जा रही है। इसके बाद सत्यापन और नियमानुसार कार्रवाई का चरण शुरू होगा।
फिलहाल प्रशासन ने एक महीने के भीतर ऐसे कब्जों की पहचान और कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा है। पुलिस की ओर से नशे की तस्करी के मामलों में कार्रवाई जारी है और प्रशासन अब उससे आगे बढ़कर संपत्ति तथा भूमि संबंधी पहलुओं की भी जांच कर रहा है। आने वाले समय में विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने कब्जे सामने आते हैं और उनमें से कितनों को नियमानुसार हटाया जाता है।












