बॉयफ्रेंड ने अपने दोस्त के साथ किया दुष्कर्म: वीडियो बनाकर जान से मारने की धमकी, 8 महीने बाद मां ने वीडियो देखा तो कराई FIR

बॉयफ्रेंड पर दोस्त के साथ युवती से दुष्कर्म और वीडियो बनाकर धमकाने का आरोप है। 8 महीने बाद मां ने वीडियो देखा तो पुलिस में FIR कराई।
बॉयफ्रेंड ने अपने दोस्त के साथ किया दुष्कर्म: वीडियो बनाकर जान से मारने की धमकी, 8 महीने बाद मां ने वीडियो देखा तो कराई FIR
Photo Credit / Attribution: Google

प्रेम संबंध के बाद युवती को भरोसा था कि उसका बॉयफ्रेंड उसका साथ देगा, लेकिन आरोप है कि उसी युवक ने अपने दोस्त के साथ मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने कथित तौर पर घटना का वीडियो भी बना लिया और उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर पीड़िता को चुप रहने के लिए मजबूर किया। मामले में करीब आठ महीने बाद तब नया मोड़ आया, जब पीड़िता की मां की नजर उस वीडियो पर पड़ी। वीडियो देखने के बाद मां ने बेटी से पूरी बात पूछी और इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

पीड़िता की शिकायत के मुताबिक, आरोपी युवक से उसका पहले से परिचय था और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। आरोप है कि बाद में उसने अपने एक दोस्त को भी इस घटना में शामिल कर लिया। दोनों पर पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप है। घटना के दौरान वीडियो बनाए जाने की बात भी सामने आई है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वीडियो को हथियार बनाकर पीड़िता को लगातार डराया गया। उसे कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया या पुलिस से शिकायत की तो वीडियो सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। ऐसे में पीड़िता लंबे समय तक भय और दबाव में रही और उसने घटना की जानकारी परिवार के सदस्यों तक को नहीं दी।

आठ महीने बाद इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता की मां ने कथित वीडियो देख लिया। वीडियो सामने आने के बाद मां ने बेटी से पूछताछ की। इसके बाद पीड़िता ने पूरी घटना की जानकारी परिवार को दी। परिवार को जब घटना की गंभीरता का पता चला तो पुलिस से संपर्क किया गया और आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।

पुलिस के सामने मामला आने के बाद अब जांच का दायरा केवल दुष्कर्म के आरोप तक सीमित नहीं है। पुलिस कथित वीडियो, उसे बनाने और किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाने के आरोपों की भी जांच कर सकती है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि वीडियो का इस्तेमाल पीड़िता को धमकाने के लिए किस तरह किया गया और क्या आरोपितों ने उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा किया था।

ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य जांच का अहम हिस्सा बन जाते हैं। पुलिस मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर सकती है। यदि कथित वीडियो या उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उन्हें जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि वीडियो किस डिवाइस से बनाया गया और बाद में किन-किन डिवाइस या अकाउंट तक पहुंचा।

पीड़िता के लिए घटना के बाद के आठ महीने बेहद मुश्किल रहे होंगे। धमकी और वीडियो सार्वजनिक होने के डर के कारण उसने लंबे समय तक चुप्पी बनाए रखी। यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित अक्सर सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और आरोपितों की धमकी के कारण तुरंत पुलिस के पास नहीं पहुंच पाते। इस मामले में भी शिकायत में देरी का कारण कथित धमकी और वीडियो को बताया गया है।

मामले में बॉयफ्रेंड की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच करेगी। प्रेम संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दूसरे की सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाने या किसी आपत्तिजनक वीडियो के जरिए उसे धमकाने का अधिकार मिल जाता है। पुलिस यह देखेगी कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और पीड़िता की शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।

दूसरे आरोपी की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिकायत के अनुसार बॉयफ्रेंड ने अपने दोस्त के साथ मिलकर कथित अपराध किया। पुलिस दोनों आरोपितों के बीच घटना से पहले और बाद के संपर्क की जांच कर सकती है। मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दोनों के बीच घटना के संबंध में कोई बातचीत हुई थी या नहीं।

वीडियो के जरिए धमकी देने का आरोप मामले को और गंभीर बना देता है। किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना बनाना, रखना या प्रसारित करने की धमकी देना गंभीर मामला हो सकता है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो पुलिस संबंधित आपराधिक और साइबर कानूनों के तहत भी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं, यह प्राथमिकी और पुलिस जांच के आधिकारिक विवरण से ही स्पष्ट होगा।

मां द्वारा वीडियो देखे जाने के बाद शिकायत दर्ज कराए जाने से मामले में एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग सामने आया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि वीडियो पीड़िता की मां तक किस तरह पहुंचा। यदि वीडियो किसी मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए सामने आया है तो उसकी डिजिटल ट्रेल भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

पुलिस पीड़िता का बयान भी दर्ज करेगी। यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता के बयान की प्रक्रिया संवेदनशील तरीके से पूरी की जाती है। जांच एजेंसी को पीड़िता की निजता और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कार्रवाई करनी होती है। उसकी पहचान सार्वजनिक करना भी उचित नहीं है, इसलिए मामले से जुड़ी जानकारी में पीड़िता की पहचान बताने वाले विवरणों से बचना जरूरी है।

परिवार की भूमिका भी इस मामले में महत्वपूर्ण रही। यदि मां की नजर कथित वीडियो पर नहीं पड़ती तो संभव है कि घटना लंबे समय तक परिवार से छिपी रहती। वीडियो सामने आने के बाद मां ने बेटी से बात की और उसके बाद पुलिस तक मामला पहुंचा। इससे यह भी सामने आता है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले अपराधों में परिवार को सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन किसी पीड़ित को दोष देने के बजाय उसकी बात सुनना और उसे कानूनी मदद दिलाना अधिक महत्वपूर्ण है।

जांच के दौरान पुलिस यह भी पता कर सकती है कि आरोपितों ने पिछले आठ महीनों में पीड़िता से कितनी बार संपर्क किया। यदि धमकी देने के लिए फोन कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया है तो उसके रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। पीड़िता या परिवार के पास मौजूद पुराने संदेश और कॉल रिकॉर्ड भी जांच में मदद कर सकते हैं।

आरोपितों ने यदि वीडियो के नाम पर पीड़िता को किसी तरह का दबाव, धमकी या ब्लैकमेल किया है तो पुलिस उस पूरे घटनाक्रम को समयक्रम के अनुसार समझने का प्रयास करेगी। घटना के बाद क्या हुआ, पीड़िता से कब संपर्क किया गया, किस तरह की धमकी दी गई और वीडियो को लेकर क्या कहा गया—इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान तलाशे जाएंगे।

इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से जुड़े साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ी है। एक ओर तकनीक अपराधियों को पीड़ित को डराने का साधन दे सकती है, वहीं दूसरी ओर वही डिजिटल रिकॉर्ड जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण सबूत भी बन सकते हैं। इसलिए पुलिस यदि मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करती है तो उनकी फोरेंसिक जांच से मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं।

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करना है। पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और जांच के आधार पर की जाती है। आरोपी भी अदालत में अपना पक्ष रखने के अधिकारी हैं। अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय के बाद ही होगी।

मामले में आठ महीने की देरी को लेकर भी जांच की जा सकती है, लेकिन केवल शिकायत में देरी होना अपने आप में आरोपों को गलत साबित नहीं करता। इस मामले में पीड़िता की ओर से कथित वीडियो और जान से मारने की धमकी के कारण चुप रहने की बात सामने आई है। पुलिस इन परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाएगी और यह समझने की कोशिश करेगी कि शिकायत देर से क्यों दर्ज हुई।

यदि जांच में दुष्कर्म, धमकी और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने के आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपितों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि जांच में कोई अलग तथ्य सामने आता है तो पुलिस उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और पुलिस द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा किया है कि निजी वीडियो और तस्वीरों को लेकर लोगों को कितना सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति को बिना सहमति के किसी का निजी वीडियो बनाने या उसे प्रसारित करने की धमकी देने का अधिकार नहीं है। यदि किसी को इस तरह की धमकी मिलती है तो डरकर चुप रहने के बजाय परिवार, पुलिस या संबंधित साइबर सहायता व्यवस्था से संपर्क करना जरूरी है।

कुल मिलाकर, मामला प्रेम संबंध से शुरू हुआ और आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर युवती के साथ उसके बॉयफ्रेंड और उसके दोस्त ने दुष्कर्म किया। आरोपितों पर घटना का वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक करने की धमकी देने का भी आरोप है। करीब आठ महीने बाद पीड़िता की मां ने कथित वीडियो देखा, जिसके बाद परिवार को घटना की जानकारी मिली और पुलिस में FIR दर्ज कराई गई। अब पुलिस वीडियो, मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के साथ पीड़िता के बयान के आधार पर मामले की जांच कर रही है। आरोपों की वास्तविकता और आरोपितों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

Leave a comment