बिहार में भारतीय जनता पार्टी और सरकार के स्तर पर अगले एक महीने तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर से शुरू होने वाले इस अभियान को जनभागीदारी, सेवा कार्यों और सरकार की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने से जोड़कर देखा जा रहा है। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाने की तैयारी है। बिहार में इसके तहत 13 प्रमुख घटकों के माध्यम से अलग-अलग गतिविधियां आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की समीक्षा से जुड़े कार्यक्रम का फोकस केवल कार्यक्रमों के आयोजन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाकर अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर भी है। भाजपा के मंत्री और पार्टी के प्रमुख नेता अभियान की तैयारियों और कार्यक्रमों को लेकर सक्रिय हैं। पार्टी संगठन की मशीनरी को भी अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां देने की तैयारी की जा रही है, ताकि महीनेभर चलने वाली गतिविधियों का असर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई दे।
‘सेवा संकल्प अभियान’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में आयोजित किया जा रहा है। देशभर में यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर अक्टूबर तक चलने वाला है। इसका उद्देश्य सेवा, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को लोगों तक पहुंचाना तथा विकसित भारत के संकल्प से आम जनता को जोड़ना बताया गया है।
बिहार में अभियान को स्थानीय जरूरतों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 13 प्रमुख घटकों के जरिए जनभागीदारी बढ़ाने, सेवा गतिविधियों को गति देने और सरकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। इनमें सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाने से लेकर युवाओं की भागीदारी, जनजागरूकता और विभिन्न सेवा गतिविधियों तक को शामिल किया गया है।
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकार की योजनाओं से लोगों के जीवन में आए बदलावों को सामने लाना है। ‘कहानी बदलाव की’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ऐसे लाभार्थियों की वास्तविक कहानियों को रील्स और लघु वीडियो के रूप में संकलित करने की योजना है। इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर डिजिटल डेटा बैंक तैयार करने की बात सामने आई है। इससे सरकार की योजनाओं का जमीनी प्रभाव आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
अभियान में युवाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के तहत पदयात्रा, साइकिल और बाइक रैलियां निकाले जाने की योजना है। इसमें ‘मेरा युवा भारत’ के स्वयंसेवकों की भागीदारी होगी। कार्यक्रमों के समापन के दौरान ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक संकल्प से इसे जोड़ने की तैयारी है।
भाजपा के स्तर पर भी अभियान को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। देशभर में पार्टी ने सेवा संकल्प अभियान के तहत कई तरह के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। अलग-अलग राज्यों और जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में भी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 13 सेवा संकल्प कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे इस अभियान के व्यापक संगठनात्मक स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिहार में सरकार और भाजपा संगठन के बीच समन्वय इस अभियान का अहम हिस्सा हो सकता है। सरकार की ओर से चल रही योजनाओं और भाजपा संगठन की जनसंपर्क क्षमता को एक साथ जोड़ने से लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी नेताओं और मंत्रियों की मौजूदगी में अभियान की तैयारियों को गति देने का उद्देश्य भी यही है कि अलग-अलग कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका सीधा संपर्क आम जनता से हो।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार पहले से ही जनता से सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दे रही है। हाल ही में ‘सहयोग कार्यक्रम’ के जरिए हर महीने के दूसरे मंगलवार को जनता की समस्याएं सीधे सुनने की पहल भी सामने आई है। इसमें लोगों को अपनी समस्याएं और सुझाव सरकार तक पहुंचाने का अवसर दिया जाता है। ऐसे में सेवा संकल्प अभियान को भी सरकार और जनता के बीच संपर्क बढ़ाने की व्यापक कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
अभियान का समय भी राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सितंबर के मध्य से शुरू होकर अक्टूबर के मध्य तक चलने वाले इस अभियान में अलग-अलग जिलों में लगातार गतिविधियां होंगी। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देने तथा सेवा गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
अभियान में सरकारी परिसंपत्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध तैयारियों के अनुसार अधिकारियों को मरम्मत कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने, सरकारी भवनों के रंग-रोगन और स्वीकृत नए निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे अभियान को केवल राजनीतिक या संगठनात्मक कार्यक्रम के बजाय विकास और प्रशासनिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा सहभागिता और जनकल्याण जैसे विषय भी अभियान की गतिविधियों के केंद्र में रह सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अभियान में स्वास्थ्य, स्वच्छता, रक्तदान, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों को शामिल करने की रूपरेखा बताई गई है। बिहार में भी स्थानीय स्तर पर इन गतिविधियों को अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ जोड़े जाने की संभावना है।
भाजपा के लिए इस अभियान का एक बड़ा उद्देश्य संगठन को बूथ और पंचायत स्तर तक सक्रिय करना भी है। महीनेभर चलने वाले कार्यक्रमों के दौरान कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने का अवसर मिलेगा। इससे एक तरफ सरकार की योजनाओं का प्रचार होगा तो दूसरी तरफ पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याएं समझने का मौका भी मिल सकता है।
सरकार-संगठन समन्वय की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभियान में प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक संगठन दोनों की भूमिका अलग-अलग होगी। सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों को लागू करने की जिम्मेदारी सरकार और अधिकारियों की होगी, जबकि जनसंपर्क और पार्टी स्तर की गतिविधियों को संगठन आगे बढ़ाएगा। दोनों के बीच बेहतर तालमेल रहने पर कार्यक्रमों का प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता है।
अभियान के दौरान लाभार्थियों की कहानियों को डिजिटल माध्यमों से सामने लाने की योजना भी सरकार के कामकाज को प्रचारित करने का आधुनिक तरीका माना जा रहा है। छोटी वीडियो कहानियों और सोशल मीडिया सामग्री के जरिए यह बताने की कोशिश होगी कि किसी योजना से वास्तविक लाभार्थी को क्या फायदा मिला। इससे सरकारी योजनाओं के प्रचार को स्थानीय अनुभवों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
‘सेवा संकल्प अभियान’ में केवल बड़े शहरों पर फोकस करने के बजाय जिलों और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां पहुंचाने की तैयारी है। अलग-अलग स्थानों पर पदयात्रा, साइकिल और बाइक रैली जैसे कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं और युवाओं को जोड़ने की योजना है। इस तरह अभियान का उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों को जनसहभागिता से जोड़ना है।
अभियान के राष्ट्रीय संदर्भ में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाने और इस दौरान रक्तदान शिविर जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा ‘आशीर्वाद का दीया’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए लाभार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बताई गई है।
बिहार में अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित कार्यक्रम कितनी प्रभावी तरीके से जिलों और प्रखंड स्तर तक पहुंचते हैं। इसके लिए संगठनात्मक तैयारी, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय महत्वपूर्ण होगा। समीक्षा बैठकों के जरिए कार्यक्रमों की प्रगति और तैयारियों पर नजर रखने की कोशिश इसी उद्देश्य से की जा रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की समीक्षा को इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा के मंत्री और नेता अभियान को लेकर सक्रिय हैं और महीनेभर चलने वाली गतिविधियों को सफल बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह कोशिश होगी कि अभियान के दौरान सेवा और जनसंपर्क दोनों गतिविधियां समान रूप से चलें और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
कुल मिलाकर बिहार में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को एक महीने तक चलने वाली व्यापक जनसंपर्क और सेवा गतिविधियों के रूप में तैयार किया जा रहा है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में 13 प्रमुख घटकों के जरिए जनभागीदारी, सरकारी योजनाओं की जानकारी, सेवा कार्य, युवाओं की भागीदारी और विकास से जुड़े संदेश को लोगों तक पहुंचाने की योजना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की समीक्षा और भाजपा नेताओं-मंत्रियों की सक्रियता के बीच अब चुनौती इन कार्यक्रमों को कागज और बैठकों से निकालकर जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की होगी।












