BPSC Success Story: 3 बार असफल होने के बाद अंकिता बनीं SDM, मां का सपना किया पूरा

BPSC Success Story: अंकिता कुमारी ने तीन बार असफल होने के बाद चौथे प्रयास में 70वीं BPSC परीक्षा पास कर SDM बनीं और अपनी दिवंगत मां का सपना पूरा किया।

अंकिता कुमारी की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत का उदाहरण है। मां के निधन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी, तीन असफल प्रयासों के बाद BPSC परीक्षा पास कर SDM बनने का सपना साकार किया।

BPSC Success Story: बिहार के सारण की अंकिता कुमारी ने कठिन परिस्थितियों और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। तीन बार BPSC प्रारंभिक परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की और SDM बनकर अपनी दिवंगत मां का सपना पूरा किया।

मां का सपना बना अंकिता की सबसे बड़ी प्रेरणा

बिहार के सारण जिले की रहने वाली अंकिता कुमारी की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। उस समय उनकी उम्र केवल 12 वर्ष थी। मां हमेशा चाहती थीं कि उनकी बेटी एक प्रशासनिक अधिकारी बने। उनके निधन के बाद यह सपना अंकिता की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया। पारिवारिक जिम्मेदारियों और भावनात्मक चुनौतियों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।

पढ़ाई में हमेशा रहीं अव्वल

अंकिता ने अपनी शुरुआती शिक्षा छपरा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने राजेंद्र कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और पटना विमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। अपनी मेहनत और लगन के दम पर वह यूनिवर्सिटी टॉपर भी रहीं। आगे उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की।

शिक्षा के दौरान उन्होंने तीन बार UGC-NET परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की। इससे यह साफ हो गया कि उनकी शैक्षणिक तैयारी मजबूत थी। इसके बावजूद उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था, इसलिए उन्होंने BPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की।

लगातार तीन बार असफलता, फिर भी नहीं छोड़ी तैयारी

साल 2022 में अंकिता ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। लगातार तीन प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। बार-बार असफल होने के कारण उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा और कई बार उन्हें लगा कि शायद उनका सपना अधूरा रह जाएगा।

हालांकि, परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा। खासकर उनके पिता ने समय प्रबंधन, नियमित रिवीजन और धैर्य के साथ तैयारी जारी रखने की सलाह दी। अंकिता ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और तैयारी की रणनीति को बेहतर बनाया।

चौथे प्रयास में मिली सफलता

चौथे प्रयास में अंकिता ने पहले प्रारंभिक परीक्षा पास की, फिर मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भी सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी लगातार मेहनत का परिणाम तब मिला जब उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा में 272वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन SDM पद के लिए हुआ।

यह सफलता केवल एक सरकारी नौकरी पाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह उनकी मां के उस सपने की भी जीत थी, जिसे उन्होंने वर्षों पहले देखा था। अंकिता की उपलब्धि आज हजारों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अंकिता की सलाह

अंकिता का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास सबसे जरूरी हैं। उनके अनुसार, बार-बार स्टडी मटेरियल बदलने के बजाय सीमित और भरोसेमंद संसाधनों से तैयारी करनी चाहिए। नियमित रिवीजन, मॉक टेस्ट और अपनी कमजोरियों पर काम करना सफलता की संभावना बढ़ाता है।

वह कहती हैं कि असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानना चाहिए। यदि उम्मीदवार लगातार मेहनत करते रहें और अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखें, तो सफलता देर से सही लेकिन जरूर मिलती है। अंकिता कुमारी की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों के सामने कठिन परिस्थितियां भी ज्यादा समय तक टिक नहीं पातीं।

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