Brics Summit: विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और वैश्विक सहयोग पर दिया जोर

BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक संपन्न हो गई है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने और वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में

नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक आज संपन्न हो गई। इस बैठक में सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS Foreign Ministers Meeting का दो दिवसीय सत्र संपन्न हो गया। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करना, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना रहा।

तीन प्रमुख स्तंभों पर सहमति

बैठक के दौरान विदेश मंत्रियों ने ब्रिक्स सहयोग ढांचे के तीन प्रमुख स्तंभों—राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक और जन-जन संपर्क—के तहत सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सम्मान, समानता, एकजुटता, खुलेपन और समावेशिता जैसे सिद्धांत ब्रिक्स के मूल आधार हैं और इन्हीं के आधार पर संगठन आगे बढ़ रहा है।

मंत्रियों ने यह भी माना कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है, जो संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा दे सकता है।

भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता को समर्थन

बैठक में 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सभी सदस्य देशों ने पूर्ण समर्थन दिया। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण” (Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) विषय प्रस्तावित किया है। मंत्रियों ने कहा कि यह थीम वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एक संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। भारत की अध्यक्षता से ब्रिक्स सहयोग को नई दिशा मिलने और विकासशील देशों के हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर

बैठक के दौरान सभी सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में United Nations की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। विदेश मंत्रियों ने बहुपक्षवाद और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रियों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति और सुरक्षा बनाए रखने, सतत विकास को बढ़ावा देने और मानवाधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बैठक में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियां जटिल और परस्पर जुड़ी हुई हैं। इन चुनौतियों का प्रभाव विकासशील देशों की आर्थिक प्रगति और सतत विकास लक्ष्यों पर पड़ रहा है। सदस्य देशों ने माना कि वैश्विक असमानता और विकास अंतर को कम करने के लिए अधिक न्यायसंगत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता है।

विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि संवाद, कूटनीति और सहयोग वैश्विक समस्याओं के समाधान के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकास के स्तर को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।साथ ही, सतत विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि को वैश्विक एजेंडे में प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

आर्थिक और विकास सहयोग पर फोकस

बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग, नवाचार, तकनीकी विकास और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने माना कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में सहयोग और साझेदारी ही स्थिर विकास का आधार बन सकते हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, और निवेश के नए अवसरों को ब्रिक्स सहयोग का भविष्य बताया गया।

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