CAA Citizenship: नागरिकता आवेदनों पर कलेक्टरों को मिला अधिकार, गृह मंत्रालय ने जारी की नई अधिसूचना

CAA Citizenship: गृह मंत्रालय ने सीमा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कलेक्टरों को CAA के तहत नागरिकता आवेदनों को प्राप्त करने, जांचने और निपटाने का अधिकार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता से जुड़ी अर्जियों पर कार्रवाई को लेकर अहम फैसला लिया है। मंत्रालय ने गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कलेक्टरों को सक्षम अधिकारी के तौर पर अधिसूचित किया है।

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने कुछ सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कलेक्टरों को नागरिकता संबंधी आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए सक्षम अधिकारी के रूप में अधिसूचित किया है।

नई व्यवस्था के तहत संबंधित कलेक्टर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के आवेदनों को स्वीकार करने, दस्तावेजों की जांच करने और पात्रता पूरी होने पर नागरिकता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगे। सरकार का यह कदम जिला स्तर पर नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किन राज्यों के कलेक्टरों को अधिकार मिला?

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के कलेक्टरों को यह अधिकार दिया गया है। त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी संबंधित कलेक्टरों को सक्षम अधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन क्षेत्रों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पात्र आवेदकों की नागरिकता संबंधी अर्जियों पर जिला स्तर पर कार्रवाई की जा सकेगी।

किन लोगों को CAA के तहत लाभ मिल सकता है?

CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के ऐसे लोग पात्रता के दायरे में आते हैं, जो कानून में निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं। नए प्रावधानों का उद्देश्य इन आवेदनों की जांच और निर्णय की प्रक्रिया को अधिक स्थानीय स्तर पर संचालित करना बताया जा रहा है। हालांकि, नागरिकता देने के लिए आवेदक को निर्धारित कानूनी शर्तों और दस्तावेजी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।

नागरिकता आवेदन की प्रक्रिया में क्या बदलेगा?

नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत नियम 11A में नया उप-नियम जोड़े जाने की जानकारी है। इसके अनुसार, CAA, 2019 के तहत नागरिकता के लिए आवेदन संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर के पास प्रस्तुत किया जा सकेगा। आवेदन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त होने पर आवेदक को निर्धारित फॉर्म IX में रसीद जारी की जाएगी। इसके बाद कलेक्टर आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और आवश्यक जांच की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

कलेक्टर आवेदक से भारत के प्रति निष्ठा की शपथ भी दिला सकते हैं। इसके साथ ही वह नागरिकता अधिनियम की धारा 6B के तहत आवेदक की पात्रता को लेकर आवश्यक संतुष्टि दर्ज करेंगे।

कलेक्टर किन आधारों पर फैसला ले सकते हैं?

नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर आवेदक की ओर से जमा दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा नागरिकता के लिए आवेदक की उपयुक्तता और पात्रता का आकलन करने के लिए आवश्यक जांच भी की जा सकेगी। यदि कलेक्टर को लगता है कि आवेदक निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करता है, तो रजिस्ट्रेशन या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

वहीं, यदि किसी आवेदक को उचित अवसर दिए जाने के बावजूद आवेदन पर हस्ताक्षर करने या भारत के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है, तो आवेदन को अस्वीकार किया जा सकता है।

आवेदन प्रक्रिया में देरी कम होने की उम्मीद

गृह मंत्रालय के इस कदम को जिला स्तर पर नागरिकता आवेदनों के निपटारे को तेज करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक ऐसे मामलों में अधिकार प्राप्त समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ स्थानों पर आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रहने के कारण आवेदकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।

कलेक्टरों को सक्षम अधिकारी बनाए जाने से दस्तावेज सत्यापन और पात्रता जांच जैसी प्रक्रियाएं स्थानीय प्रशासन के स्तर पर पूरी की जा सकेंगी। इससे आवेदन के निपटारे में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।

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